Texla Mein Chudai

ही एवेरिवन मेरा नाम नीति है. मैं देहरादून की रहने वाली हूँ. मैं 23 साल की हो चुकी हूँ. मेरी शादी हो चुक्की है. मेरा पति एक बिज़्नेस्मेन है और इसीलिए Wओह काम की वजह से काफ़ी दीनो तक घर से बहार रहते है. मेरी सेक्षुयल नीड्स बहुत बड़ी हुई रहती है बुत कोई होता ही नही ऊण्को सॅटिस्फाइ करने वाला. ऐसा नही है की मेरे पति में इतनी काबिलियत नहीं. Wओः एक नॉर्मल इंसान की तरह छोड़ सकते है. बुत मेरी ज़िंदगी में एक ऐसी घटना घाटी थी जिसके बाद कोई भी लड़की शरम के मारे मार जाएगी या तो एक रंडी बन जाएगी.यह बात कुच्छ साल पहले की है जब मैं देल्ही में रहती थी अपने मामा मामी के साथ उनके घर पे. घर ग्राउंड फ्लोर पेट हा और काफ़ी छ्होटा था जिसमे दो रूम थे. यूयेसेस टिम मैं 17 साल की थी और मेरे बोर्ड्स के एग्ज़ॅम पास आ रहे थे. मैं आपको अपने बारे में बता डू . मेरा रंग गोरा है और मेरी हाइट 5 6 है. मेरा फिगर एक नॉर्मल इंडियन गर्ल की जैसा ही था. और मैं काफ़ी अच्छी दिखती थी. मैं काफ़ी शरीफ लड़की थी और मुझे अपने टन को ढकना आता था. एक शाम मेरी फ्रेंड्स का मुझे कॉल आया. उन्न लोगो ने डिसाइड किया की हम रात में क्लब जाएँगे पार्टी के लिए. जैसे की मैने बताया की मैं काफ़ी शरीफ थी इसीलिए मैने माना कर दिया जाने के लिए. मैने उनको कहा की मेरे ममाजी मुझे आने की पर्मिशन नही देंगे. और उन्होने मुझे कहा की तू अपनी बाल्कनी से कूद के आ जाना और हम तुझे पिक कर लेंगे. उनके काफ़ी फोर्स करने की वजह मैने उनको हन के दिया. मैने सोचा एब्ब चूल ख़तम होने के बाद हम कहा मिल पाएँगे इसीलिए मैने हन कह दी. और यही मेरी सबसे बड़ी ग़लती थी. जब रात के 11 बजे थे और मेरे मामा मामी सो गये थे तब मैं बाल्कनी से निकल गई. मैने पार्टी के जीन्स और एक त-शर्ट पहनी थी और उसके अंदर ब्रा और पनटी.सबसे पहले हम अपनी दोस्त के घर गये जोकि क्लब के पास ही रहती थी. हम 3 लड़किया के अलावा और 2 लड़के थे साथ में. मेरी दोस्तो ने मुझे कहा की इनफॉर्मल ड्रेस में एंट्री नही होगी क्लब में तो इसीलिए उन्होने कुच्छ और पहनने को कहाँ. मैने अपनी दोस्त की एक ड्रेस पहन ली जो की रेड कलर का थी और नी लेंग्थ तक था. वो ड्रेस काफ़ी टाइट और इसी वजह से मेरे बूब्स और बूम काफ़ी शेप में दिख रहे थे. सब तयार होके क्लब की तरफ निकल गये. मैं काफ़ी अकेली थी अपने दोस्तो के साथ क्यूंकी वो कपल्स थे. रास्ते में काफ़ी छेड़ छ्छाद और चुम्मा छाती हो रही इन सब के बीच और मैं यह देखके खाबरा सी रही थी.पार्टी में जब मैं पहुचि तो एक दूं नया सा बाड़िया सा लगा. पार्टी में सब मस्ती में झूम रहे थे. काफ़ी लड़के लड़किया साथ में मस्ती भी कर रहे थे जैसे की किस्सिंग आंड टचिंग. मेरे दोस्तो ने मुझे एक ग्लास बियर का पीला दिया था. मैं आधी नशे में और आधी नॉर्मल थी. बियर पीने के बाद मैने भी काफ़ी डॅन्स किया लड़को साथ. सबने मेरे मूमें और छूट को च्छुने की पूरी क़ोस्सिष की. एक ने तो मेरी ड्रेस के अंदर हाथ डालके भी मेरी छूट से खेला. मुझे ना चहके वे भी यह सब अच्च्छा लग रहा था. एक अजीब सा नशा चाड गया था मेरे दिमाग़ में. यह सब करते करते ना जाने कब 3 बाज गये थे. मुझे दर्र था की अगर मेरे घर में कोई जग्ग गया तो आयेज से मेरा घर से निकलना मुश्किल हो जाएगा. इसीलिए मैं अपने दोस्तो के पास गयी जो की पूरी तरह से टल्ली हुए पड़े थे. उन्होने मुझसे कहा की वो एब्ब सुबह ही जाएँगे और मुझे भी रोकने की ज़िद्द की. बुत मामा मामी के दर्र से मैं पार्टी से निकल गई और घर जाने के लिए कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट ठूँदने लगी. मैने बस नही लेनी चाही क्यूंकी बस इतनी रात में खाली ही होती है और उनमें सारे आदमी की होते है. रोड पे कई ऑटो दिखे बुत सब बहुत हाइ चार्ज कर रहे थे बुत मैने अपने कुच्छ पैसे बचाने के चक्कर में उनको माना कर दिया. मैने क्लब आते समय एक ऑटो स्टॅंड देखा था और मैं वही पे चली गई. जब 3:30 होगआया तब मुझे लगा एब्ब काफ़ी लाते हो गया है. ऑटो स्टॅंड पे सिर्फ़ एक ऑटो था और उसने बहुत कम रते लगाया जाने का. बुत एक ही परेशानी थी की यूयेसेस ऑटो वाले के साथ उसका एक दोस्त था. उसने कहा मुझे की हू पीच्चे बैठेगा क्यूंकी आयेज की सीट बहुत छ्होटी है. कम रुपये खर्च होने की वजह से मैं यूयेसेस ऑटो में बैठ गई.इतनी रात में ऑटो में दो आद्मीो के साथ जाना काफ़ी अनकंफर्टबल था. हू दो आदमी काफ़ी घिनोने लगते थे थे. दोनो ही मोटे और गंजे थे और आगे में काफ़ी बड़े भी थे.

मेरी टाँगें उनको बहुत अच्च्ची तरह से दिख रही थी क्यूंकी मेरा ड्रेस नीस तक था. मेरे साइड में जो आदमी बैठा हुआ था वो तिरच्चि नज़रो से मेरे बदन को देखे ही जेया रहा था. मैं पुर रास्ते दुआ करके चल रही थी की कुच्छ ग़लत ना हो. यही सोचते सोचते अचानक मेरे मूह पे एक हाथ आया और उसके बाद मैं बेहोश हो गई. उसके बाद पता नही मुझे ये दो आदमी कहा लेके चले गये.जब मेरी आँख खुली तो मैं उससी ऑटो में लेती हुई थी. मेरे हाथ दोनो हाथ बँधे हुए थे ऑटो के दो ऑपोसिट हॅंडल्स से. मेरा बदन पे अभी भी वोही ड्रेस था और मैं खुश थी क्यूंकी इन्होने मुझसे कोई छेड़ खानी नि की. डोर डोर तक कोई नज़र नि आ रहा था और ऑटो रोड से भी डोर खड़ा हुआ था. यहा सिर्फ़ पेड़ पौधे ही नज़र आ रा रहे थे. मैने काई बार कोशिश की मेरे हाथ खुल जायें मगर मेरी मेहनत से मुझे कुच्छ नही मिला. मुझे काफ़ी धंध भी लग रही थी यूयेसेस ड्रेस में. कुच्छ देर बाद मुझे वो दो आदमी आयेज दिखे ऑटो की तरफ बदते हुए. मुझे लग रहा था की दोनो ने शराब पीवी है क्यूंकी काफ़ी झूम के चल रहे थे. एक आदमी मेरे सीधी तरफ खड़ा हो गया और दूसरा मेरे उल्टे हाथ की तरफ खड़ा हो गया. मैने दोनो से कहा की मुझे छ्चोड़ दे, मैने आप लोगो का क्या बिगरा है मैं बहुत छ्होटी सी शरीफ सी बच्ची हूँ. ये सुनके उनमें से किसीने कुच्छ नही बोला. दोनो मुझे उपर से नीचे खूर रहे था जैसे की मुझे खा जाएँगे. मैने फिर कहा प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ मुझे छ्चोड़ दो आपको मैं 1000 रुपये दे दूँगी जिट्नी मेरे पास है. फिर उनमें से एक बंदे ने कहा की हम तुझे 2000 रुपये देंगे तुझे आज रात की मस्ती के लिए, आजा मेरी रानी. दोनो ने एक दूसरे को हेस्ट हुए आँख मारी और फिर अपने गंदे हाथ मेरे मूमें पे रख दिए. दोनो मेरे मूमें पे हाथ फ़ेड़ने लगे उनसे खेलने लगे. एक आदमी ने दूसरे को कहा बिशन यार कितनी पटाखा लड़की है यार यह. देख कैसे गुबारे की तरह इसके मूमेः झूल रहे है. दूसरे ने यह सुनके कहा मेरा तो मॅन कर रहा है इस्पे सिर रखके मैं सो जाऊ, तकिओ से भी मुलायम है यह तो. वो दोनो काफ़ी देर टक्क मेरे मूमें को नौचते रहे और मैं उनसे भीक मांगती रही की मुझे जाने दो. फिर उनमें से भिसन ने अपना हाथ मेरे उपर से हटा दिया ऑरा आगे जाके अपने ऑटो में कुच्छ ढूँदने गया और इसी बीच दूसरा वाला बंदा अपने दोनो हाथो से मेरे मूमओं का मज़ा लूटता. मेरी चीखे काफ़ी तेज़ थी मगर उसने मुझे धमकी डी की हू मुझे जान से मार देगा इसीलिए मैं चुप हो गई. बिशन जब मेरी ओर बड़ा तो मैने उसके हाथ एक कैची देखी और मैं समझ गई यह मेरी ड्रेस फाड़ देंगे. यह सोचके मैं और भी ज़्यादा दर्र गैट ही. मेरे कुच्छ बोलने से पहले ही बिशन ने मेरे उल्टे हाथ का स्ट्रॅप काट दिया और उसने कैची अपने दोस्त को डेडी. उसने मेरे सीधे हाथ स्ट्रॅप भी काट दिया. दोनो अपनी तरफ देख कर मेरी ड्रेस नीचे की तरफ खीच दी और मेरी पिंक ब्रा को देखा. गुस्से में आके दोनो ने मेरी ब्रा को खीच दिया जिसकी वजह से उसका स्टर्प टूट दिया और उन दोनो ने पहली बार मेरे नंगे मूमओं को देखा. उन्हे देखते ही बिशन ने अपनी गंदी ज़ुबान से उनको चाटने लगा और उसका दोस्त मेरेको होतो को चूम रहा था. मैने बहुत कोशिश करी की मेरे हाथ खुल जाए बुत मुझ में इतनी हिम्मत नही थी. बिशन ने कहा संतोष यार यह तो बिजली की तरह मचल रही है नज़ाने इसकी छूट कितना पानी छ्चोड़ रहा होगा. संतोष मुझे चूमते हुए उसको कहा यार मेरी गांद तो खंबे की तरह खड़ी हो गई मैं तो और बर्दाश्त नही कर सकता. संतोष ने अपनी पंत और अपने गंदा सा अंडरवेर उतारके मेरे मूह पे मारा. उसका मोटे पेट पे नाज़ाने कितने बाल होंगे और वो मेरे साथ आके बैठ गया. उसने बिशन को आँख मारी और उसने अचानक से मेरी दोनो टाँगें पकड़ली और उन्हे आयेज की तरफ खीच लिया. एब्ब मैं ऐसी पोज़िशन में थी जैसे हवा में लेती हुई हो. मेरे नीचे संतोष आ गया और उसने मेरी कमर को अपने हाथो से नीचे की तरफ खीच लिया. पहली बार किसीने अपना लॅंड मेरी छूट में डाला. उसका लॅंड इतना मोटा था की मेरी आँखों से आँसू निकल गये. मेरी कमर को पकड़ते हुए वो उपर नीचे करता रहा. कभी एक दूं धीरे तो कभी बिल्कुल तेज़. साथ ही साथ बिशन ने भी अपने कपड़े उतार दिए और अपनी लॅंड मेरे मूह मह घुसा दी. बिशन मुज्ज़े देख के बोला चूस मेरे लॅंड को. मैं जानते हूँ की तू बहुत बड़ी रॅंड है ना जाने कितने आशिक़ होंगे तेरे. साली कभी लॉलिपोप नही खाई क्या बचपन में. डःअन्ग से चूस नही तो काट के फेक देंगे. यह सुनके मैं दर्र सी गयी और जैसा हू कह रहे वैसे ही करने लगी. संतोष का लॅंड मेरे अंदर और बड़ा होता ही जा रहा था वो मुझे 10 मीं से छोड़े ही जेया रहा था. उसने मुझसे कहा आज मैं तेरे अंदर अपना बच्चा डालता हूँ. ये निशानी तुझे हुमेशा मेरी याद दिलाई गी साली. और उसने अपना सारा पानी मेरे अंदर छ्चोड़ दिया. मेरी छूट में से पानी के साथ साथ खून भी बह रहा था. मैं काफ़ी थक्क गई थी मगर बिशन को अपनी प्यास भुजानी थी और उसने मेरे हाथ खोल दिया. मैं ेभागने की कोशिश करी मगर उसके एक तपद ने मेरेको नीचे गिरा दिया. बिशन और संतोष ने मुझे ऑटो के नीचे ख़ासिता और मुझे पेट के पल लिटा दिया. दोनो ने मेरी छूट पे कई थप्पड़ मारे. और बिशन ने अपना लॅंड मेरी गांद में डाल दिया. मुझे इतना दर्द कभी भी ज़िंदगी में नही हुआ था. वो मुझे भूके शेर की तरह खा जेया ना चाहता था. वो अपनी स्पीड बदाए ही जेया रहा था. मुझमें एब्ब चिल्लाने की भी ताक़त नही बची थी. बिशन ने संतोष से कहा आब्बी छूतिए अपनी लॅंड डाल इसके मूओ में कहीं छिला ना दे. बिशन ने भी अपने लॅंड का पानी मेरे गांद में डाल दिया. 5 मिनिट तक दोनो ज़मीन पे मेरे पास लेट गये थे. जैसी सुबह की किरण दिखी दोनो उठे और मेरे पे पिशब करने लगे. मेरा पूरा जिस्म उनके पिशाब से गंदा हो गया था. दोनो ने मेरी ड्रेस मेरे साइड में फेक दी और एक दूसरे से कहने लगे की इससे बाड़िया रांड़ कहीं नहीं मिलेगी. भगवान ने इससे हुमारे लिए ही बनाया है. और यही कहके चले गये. जब सुबह हो गयी तब भी वाहा कोई आदमी या औरत नही दिखाई दिया. मुझे यह भी नही पता था की वो दोनो कामीनो ने मुझे कहा छ्चोड़ दिया है. मैं हिम्मत करके खड़ी हुई और अपनी ब्रा और पॅंटीस ढूँढने लगी. मेरी ब्रा मुझे नही मिली मगर मेरी कच्च्ची जोकि पूरी तरह से गंदी हो गयी थी और पीच्चे से उसमें एक च्छेद हो गया था. मैने जल्दी से उससे पहें लिया. फिर मैने ड्रेस को पहने की कोशिश करी मगर दोनो स्ट्रॅप्स कट्ट जाने के कारण मैं उससे पहें नि पाई. मैने दोनो स्ट्रॅप्स पे गीतान बंद दी और और उससे पहें लिया. गीटान की वजह से मेरा ड्रेस की उचई काफ़ी बाद गैट ही. अगर मैं ज़रा सा भी झुकती तो कोई भी मेरी कच्ची आराम से देख लेता. मैने सोचा की आयेज चलती हूँ तोड़ा सा शायद रोड आजाए या कोई गाओं आजाए जहा से मैं वापस जेया साकू. मैं आयेज चली करीब 1 घंटे बाद मुझे एक छ्होटा सा घर डीिखा. यूयेसेस इलाक़े में वही एक घर था. मैने रात से कुच्छ खाया भी नही था और पानी तक नही पीया था. मैं यूयेसेस घर के पास चली गई. वो घर काफ़ी पुअरना सा टूटा हुआ सा लग रहा था. मैने काफ़ी दरवाज़ा खत खाटाया मगर किसीने दरवाज़ा नही खोला. निराश होके मैं वाहा से जाने लगी. जैसी मैने चलना शुरू किया तभी वो दरवाज़ा खुल गया. मैने देखा एक बूरहा सा आदमी खरहा हुआ है. मैने उससे नमस्ते कहा और उससे बोला की मेरे पीच्चे कुच्छ गुंडे पद गये थे मैं किसी तरह से अपनी जान बचके आई हूँ. मुझे यह भी नही पता की यह जगह कौनसी है. अप प्लीज़ मुझे कुच्छ खाने पीने के लिए दे डीजये, आपकी भारही मेहेरबानी होगी. उन्न बाबा ने मुझसे मेरा नाम पूछा. मैने नीति बता दिया और मैने उनसे उनका नाम पूचछा. उन्होने मुझे अंदर बुला लिया और अपना नाम सुलेमान बताया. मैं घर में जब गई तो वाहा एक बिस्तर दिखा जिसपे गंदी सी चादर बिच्च्ि हुई थी, एक पंखा और उससी रूम के कौने में बर्तन और चूला रखा हुआ था. सुलेमान बाबा ने मुझे कहा बेटी तुम अभी जाईपुर हाइवे के पास ही हो. तुम कहा की रहने वाली हो? मैने कहा जी मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ. मैने बिस्तर पे बैठना ठीक नि समझा क्यूंकी अगर मैं बैठी तो मेरी ड्रेस और उपर हो जाती और मेरी कच्च्ची बिल्कुल अच्च्चे से बाबा को नज़र आ जाती. बाबा ने मुझे कहा की बेटी जाओ तुम अपने उपर तोड़ा पानी डाल्लो क्यूंकी तुम्हारी हालत काफ़ी खराब लग रही है. मैने पानी गरम होने के लिए रख दिया है. मैने हेस्ट वे इनकार कर दिया. मगर उन्होने कहा की बेटी कोई ग़लत ख़याल मत रखो आपे दिमाग़ में तुम मेरी बेटी जैसी ही हो. नहाने का सुनके मुझे वो याद आया की जब बिशन और संतोष ने मुझे कुटिया की तरह छोड़ा था और मेरे पे पिशाब कर दी थी. यह सोचके मेरे सिर चकरा गया और मैं बिस्तर पे बैठ गई. मेरे बैठने की आवाज़ से सुलेमान बाबा ने एक दूं अपना सिर मेरी तरफ किया और उन्हे मेरी गुलाबी कच्च्ची दिख गई. मूह फेरते हुए मैं खड़ी हो गई और बातरूम में जाने लगी. बाबा ने मुझे हाथ में एक टवल पकड़ा दिया और मैं नहाने के लिए चली गई. बातरूम में एक खिड़की थी जोकि काग़ज़ से ढाकी हुई थी. लाइट भी काफ़ी ठीक ताक थी. वाहा एक गंदी सी बाल्टी और मग रखा हुआ था. मैने अपने कपड़े उतार के कोने में रख दिए ताकि वो गीले ना हो जाए. मैने धीरे धीरे अपने उपर पानी डालना शुरू किया.

मेरे आँखों में आँसू आ गये थे कल रात के भयानक हादसे के बारे में सोचके. मैने सोचा जो हो गया वो हो गया एब्ब किसी तरह घर पहुच ना है. हल्का सा गरम पानी मेरी बदन को गरम कर रहा था. उसी बीच में बाबा यूयेसेस टूटे हुए दरवाज़े से मुझे नहाते हुए देख रहा था. बेब अपने लॅंड से खेलते हुए मेरे गीले बदन को देखे ही जेया रहा था. मुझे नहाते समय तेज़ तेज़ सासो की आवाज़े सुनाई दे रही थी. जैसे ही मैने नहाने बंद कर दिया तो सासे आनी भी बंद हो गई. मैं अपने गीले बदन को यूयेसेस टवल से पौचने लगी. मेरे दिमाग़ में एक गंदा ख़याल आया. मैने सोचा क्यूँ ना मैं इश्स बाबा को सिड्यूस करू. देखने में तो यह बाबा शरीफ लगता है और मुझे कुच्छ नही कर सकता और मैं यहा से भाग जाऊंगी अगर ऐसा कुच्छ हुआ तो. यही सोचके मैने बातरूम का दरवाज़ा खोला. सुलेमान बाबा चूले पे छाई बना रहे था. जैसे ही मैने दरवाज़ा खोला उन्होने अपना चेहरा मेरी ओर खुमाया और देखके तोड़ा सा दर्र गये. मैं यूयेसेस समय सिर्फ़ टवल पहें लप्पेट रखा था और उसके नीचे अपनी गुलाबी रंग की कच्च्ची. टवल का कपड़ा काफ़ी ग़रीबो वाला था मतलब पाकी पतला सात हा और इसकी वजह से हू भी काफ़ी गीला हो गया था. सुलेमान बाबा कह कुच्छ कहने से पहले मैने उनसे कह दिया की मेरी ड्रेस ज़मीन पे गिरके गीली हो गई है, आपके पास कुच्छ पहनने को है क्या??? सुलेमान बाबा ने मेरेको पूरी अच्च्ची तरह देखके कहा नही बेटी फिलहाल कपड़े सूख रहे है तुम इश्स रज़ाई को लप्पेट लो क्यूंकी काफ़ी धंध है और तुम काफ़ी गीली भी हो. सुलेमान बाबा की आँखों की चमक को देखके मैं समझ गैट ही की यह बाबा तो लट्तू हो गया है. मैने बाबा से कहा की आपके पास फोन होगा क्या??? और उन्होने मुझे अपना सस्ता सा मोबाइल फोने दे दिया. मैं कमरे के बहार चली गयी और मैने अपने मामा मामी को फोन कर दिया. मैने उनको कहा की मैं अपनी सहेली के घर पे हू. उसकी ताब्यट काफ़ी खराब हो गैट ही और इसीलिए मैं उससे मिलने रात में ही चली गयी अपने दोस्तो के साथ. एब्ब मैं 2-3 दिन उससी के साथ रहने वाली हूँ क्यूंकी वो घर पे अकेली है. आप प्लीज़ नाराज़ मत होना और टेन्षन मत लेना. मेरी बात सुनके मेरे मामा ने कहा ठीक है बेटा मगर तुम वाहा पड़ाई अच्च्ची तरह से करना और अपना और अपने दोस्त का ख़याल रखना. यह बोलके मैने फोन काट दिया और वापिस घर में चली गई. बाबा ने मुझे छाई दी और कहा बेटी बिस्तर पे आराम से बैठ जाओ. मैने बाबा से पूचछा की आप इश्स घर में अकेले क्यूँ रहते हो?? आप की पत्नी या कोई बेटा बेटी नही है??? बाबा ने मुझे बताया की हू पहले बहुत अमीर थे मगर उनकी पत्नी के गुज़र जाने के बाद उनके बêते ने उनकी सारी दौलत हॅयाप ली. फिर वो यहा पे आ गये शहेर से डोर. यह सुनके मुझे बाबा पे थोड़ी दया आ गई. बाबा मेरे पास आ गये और मुझसे छाई का कप लेके चले गये. मैने सोचा की एब्ब मैं क्या करू. यही सोचते सोचते मुझे नींद आ गई और मैं यूयेसेस बिस्तर पे सो गैMएरे सपने में फिर से रात का पूरा सीन आया. मैं सपने में ही दर्र रही थी और काफ़ी घबरा सी गई थी. थोड़ी देर के बाद मुझे एक और सपना आया और यूयेसेस सपने में फिर से बिशन और संतोष दिखाई दिए. मगर यह सपना पिच्छले सपने से बिल्कुल अलग था. मैं फिर से रात में ऑटो ढूँढ रही हूँ और मुझे फिर से वही ऑटो मिलता है. मैने वोही कपड़े पहें रखे है. संतोष मुझे घूरे जेया रहा है और मैं उससे और मजबूर कर रही हूँ बार बार हिल्के. मैने अपना हाथ संतोष के लॅंड पे रख दिया और उसपे फ़ेड़ने लगी. संतोष बिल्कुल चुप छाप हैरान सा हो गया. उसका लॅंड ऑटो की रफ़्तार के जैसा बड़ा हुए ही जेया रहा है. संतोष को इतनी धंध में भी पसीना आ रहा है. मैने उसके एक हाथ पकड़ के अपने नंगी जांग पे रख दिया और उसके लॅंड से और अच्च्ची तरह से खेलने लगी. संतोष एब्ब अपना हाथ मेरी जांग पे फेड रहा है और फेड़टा हुआ मेरे ड्रेस के अंदर ले गया. मेरी कच्च्ची पूरी गिल्ली हो रही थी और हू एब्ब मेरी छूट को नौचने लगा है. संतोष के मूह से आवाज़ निकली बिशन ज़रा ऑटो थोड़ी साइड में रोक दे रोड से तोड़ा डोर. यह बोलके संतोष ने अपना दूसरा हाथ मेरे मूमेन पे फेड़ना शुरू कर दिया और यह देखके बिशन ने जल्दी से ऑटो कहीं रोकक दिया. फिर उन दोनो मुझसे कहा की हुमारी पंत की ज़िप खोल और हुमारा लंड को चूसना शुरू कर. उनके कहते ही मैने उन दोनो की ज़िप खोलदी और उनके बड़े और मोटे लंड को निकालकर चूसने लगी. कभी मेरा यूयेसेस लंड को मूह लेकर चूस्टा और कभी दूसरे लंड को. दोनो बहोट ज़ोर से आवाज़े निकाल रहे है. दोनो ने मुझे मेरे कंधे पाकर के उठाया और ओहिर मेरे मोमें को मूह में लेकर चूसने लगे. मुझे इतना मज़ा आ रहा था की मैं खुद उन्हे बोल रही थी और ज़ोर से चूसने को. जब उन्होने मुझे छोड़ने के लिए मुझे नीचे लेतया तभी अचानक कुच्छ आवाज़ आई और मेरी नींद खुल गई. मैने हल्की सी आँख खोलके देखा तो बाबा नीचे बैठकर छाई बना रहे थे. मैं यूयेसेस वक़्त काफ़ी गरम हो गई थी अपने सपने को देखके. मगर मेरे मॅन में ख़याल आया की सुलेमान बाबा काफ़ी अच्च्चे इंसान है उनके साथ ऐसी हरकत नही करनी चाहिए. बाबा ने मुझे देखते हुए कहा उठ गयी बिटिया. मैने हल्के से कहा जी बाबा. बाबा ने फिर मुझे कहा की जाके अपना ड्रेस पहेनलो क्यूंकी धंध काफ़ी हो रही है. मैं बेड से उठी और अपने बदन पे चादर लपेटली. चॉक ए मैं बातरूम में आगाय और अपनी ड्रेस को मैने पहेनलिया. मैने बाहर आके रज़ाई बेड पे फेक दी और बाबा से मैने पूचछा की कुच्छ ड्रेस के नीचे पहेने के लिए है?? बाबा ने कहा बेटा बाहर मेरी धोती रखी हुई तुम चाहो तो उससे पहेनलो. मैं बाहर निकली तो देखा की रात हो चुकी थी. एब्ब मेरा घर के लिए निकलना ठीक नही होगा. मैने बाहर रहके ही धोती पहेनली और घर के अंदर आ गयी. मैं काफ़ी खुश थी क्यूंकी धोती मेरी जांगो को च्चिपा रही थी, मेरे घुटने तक आ रही थी. मैं आराम से बिस्तर पे बैठ गई और बाबा ने मुझे छाई दी. मैने बाबा से पूचछा बाबा टाइम कितना हो गया है?? बाबा ने मुझे कहा की बिटिया रात के 9 बाज गये है. मैने और बाबा ने छाई पीना शुरू किया और हम बातें करने लगे. मैने बाबा को दिल्ली के बारे में और अपने खानदान के बारे में बताया. और बाबा ने मुझे अपने बारे में और ज़्यादा बताया. देखते ही देखते टाइम कुच्छ ज़्यादा हो गया और मुझे नींद आने लगी. बाबा ने कहा बिटिया सो जाओ मैं ज़मीन पे सो जाऊँगा तुम आराम से बिस्तर पे सोजाओ. मैने बाबा से कहा आप क्यूँ ज़मीन पे सोगे आप उपर सोजाए मुझे कोई दिक्कत नही है आपसे. रज़ाई एक ही होने के कारण हम दोनो को रज़ाई शेर करनी पढ़ी

(तो बे कंटिन्यूड…….)

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