किसी को पता ना चले

दोस्तों मई आपका संजय..महिलाओं का प्यारा..मई मुंबई मे रहता हू..और एक चोनसूलटानत का कम करता हू मेरी उमर अभी 40 साल की है अभी भी मई ऐसा ही र्मगीला और छोड़ू हू ये वाकीया आज से 15 साल पहले का है उस वक्त मई 25 साल का था ,और अपने फ्लाइट मे रहता था उसी मे आज भी रहता हू. कहानी को उसी वक्त के हिसाब से कहता हू..मई अकेला ही रहता हू ,अभी मेरी शादी नही हुई है (तब की बात है, आज मई शादी शुदा हू.), मई एक जवान और स्मार्ट लड़का हू . ये मेरी लाइफ की सच्ची कहानी है ,कुछ 6 महीने पहले की है , रोजाना मई सुबह 9.30 आम ओफ्फिचे के लए पर निकल जाता था और फिर शाम को 7.00 पीयेम पर आता हू . मेरे सामने के फ्लाइट मे . शर्मा रहते है . हे इस आन अद्वोछते. उनकी एक मस्त सी वाइफ है मधु , जो की उनकी दूसरी पत्नी है . शर्मा जी की उमर कोई 50 के पास होगी और भाभिजी की उमर कोई 25 के पास होगी , वो बड़ी ही प्यारी और सेक्सी है , और कॉलोनी के ही एक स्कूल मे टेआच्छेर है . वो सुबह 8.00 आम पर स्कूल जाती है और 1.00 पीयेम पर घर आ जाती है . जब वो सुबह स्कूल जाती है तो रोज़ मई उनको देखता हू , और व्हो एक बार मूज़े देख कर हलकी सी मुस्कान ज़रूर देती है , पिछले एक साल से ऐसा ही चल रहा था एक दिन जब वो सुबह स्कूल जा रही थी तो मई अपने गेट पर खड़ा था और वो अपने गेट पर खड़ा था और वो अपने दरवाजे पर टला लगा रही थी तभी मेरी तावेल खुल गई और मई तावेल के अंदर कुछ नही पहना हुआ था , वो मूज़े देख कर ..रुक गई..मेरा लंड वैसे आधा ही खड़ा था..लेकिन वो उसे ध्यान से देखती रही.फिर हल्का सा मुस्कुरा दी और चली गई कुछ दिन तक मेरा और उसका आमना सामना नही हुआ. फिर एक दिन मेरी छुट्टी थी मई गिगरेट पीने के लए दरवाजा खोल के बाहर आया. देखा तो वो अपने दरवाजे के सामने जादू लगा रही थी. क्यूकी उसकी कम वाली नही आई थी.उसने एक छोटा ती शर्त और छोटा जींस का शॉर्ट पहना था ,

जब वो जुक कर जादू लगा रही थी तो उसके ती शर्त से उसकी गोरी चुचियाँ बाहर जंकने लगी थी..बहुत ही मस्त चूंचियाँ थी..मेरे लंड मे हरकत होने लगी..मई उसे ही देख रहा तोउस वक्त वो बहुत ही मस्त और एक लड़की जैसी लग रही थी मई उसे तोड़ा सा छूटा हुआ बाजू से निकाला..उसने हलकी सी मुस्कान दी…मूज़े लगा की ये माल छोड़ने को मिलेगा फिर कुछ दिन ऐसे ही गुज़र गए .एक दिन मई ओफिस से लौटा तो देखा वो अपने फ्लाइट के बाहर खड़ी है..मैने पूछा क्या हुआ भाभिजी उन्होंने कहा मेरे फ्लाइट की छवि खो गई है और शर्मा जी टूर पर गए है एक हफ्ते के लए..मैने कहा कोई बात नही..आप मेरे फ्लाइट मे बैठिए मई फ्रेश होकर किसी छवि वाले को बुला के लता हू तब वो मेरे फ्लाइट मे आ कर सोफे पर बैठ गई..मई अंदर बाथरूम मे चला गया ., सोफे पर बैठ कर उन्होंने रिमोट से टीवी चालू किया, मेरे टीवी पर उस वक्त एक ब्लू फिल्म की सीडी लगी हुई थी वो चालू हो गई..मई बाथरूम से आया और मैने देखा वो फिल्म देख रही है , मूज़े देखते ही वो बोली कैसी गंदी फ़िल्मे देखते हो ? ,मई उनको सॉरी कहा और जल्दी से टीवी बम्द कर दिया , फिर मई निकल गया और छवि वाले को ले कर आया वो तब तक मेरे फ्लाइट मे थी और मूज़े मालूम है की उन्होंने वो फिल्म पूरी देखी ,क्योनि मई करीब डेढ़ घमते बाद वापिस आया तो उनकी आँखें गुलाबी हो रही थी और वो मूज़े अजीब नज़रों से देख रही थी. फिर मार्केट से छवि वाले को लाया उसने टला खोल दिया.शाम को भाभी ने मेरी दरवाजे की घहमति बजाई और पूछा संजय आज शाम को क्या कर रहे हो?मैने कहा कुछ नही बस खाना खा कर सोना ही है तो वो बोली आज आप मेरे साथ खाना खाओ..मेरे घर पर..मूज़े भी कंपनी मिल जाएगी ,हम मई भी अकेला बोर हो रहा हू..कम से कम आज घर का खाना आरू आपकी प्यारी कंपनी मूज़े भी मिल जाएगी..ठीक है मई ठीक आठ बजे आपके घर आ जौगा..मेरा लंड तो मारे खुशी के अभी से तनताना गया..मैने उसे बाहर निकाला और अच्छे से तेल से मालिश किया और वो तो फूफकर रहा था. मैने तैयार होने के बाद भाभी के घर की घहमति बजाई..भाभी ने दरवाजा खोला ..वाहह.. मेरे मूह से निकल गया..भाभी ने एक स्कर्ट और छोटा टॉप पहना था वो भी खुले गले का..आधी चुचियाँ बाहर जंक रही थी..उन्होंने मूज़े अंदर आने को कहा और दरवाजा बम्द किया ..मैने पीछे से देखा स्कर्ट उनके नितंबो पर कसी हुई थी. एकदम गंद से चिपकी..मई समाज गया आज वो भी मूड मे है. थी. मैने उनसे कहा आज तो ग़ज़ब ढा रही हो.उसने मुस्कुरा के कहा तैंक्स..मई सोफे पर बैठा और वो किचें मे चली गई..मेरा लंड पैंट के अंदर मचलने लगा..मैने पीछे मूड के देखा.वो किचें मे कुछ कर रही थी..उनकी पीठ मेरी तरफ थी..पीछे से वो बहुत सेक्सी लग रही थी..मैने एक बार सोचा अभी जा कर पीछे से दबोच लू…उन्होंने पीछे देखा मेरी और उनकी नज़र टकराई वो मुस्कुरा दी और पूछा..संजय क्या देख रहे हो..मैने कहा आपको..आप बहुत हसीन लग रही हो..उन्होंने कहा ..अच्छा..अभी तो एक बार तारीफ कर चुके हो..ये बताओ खाना खाने के पहले कुछ ड्रिंक करोगे….मैने कहा..हम..मई अभी ले कर आता हू..उन्होंने कहा कोई ज़रूरत नही..तुम्हारे भाई साहब का स्टॉक है..मैने कहा आप भी लॉगी..उन्होंने कहा मई सॉफ्ट ड्रिंक लेती हू..और उन्होंने दो ग्लास और एक चाइल्ड..बीयर ला कर ती पॉय पर रखा..साथ मे कुछ भुने काजू भी थे..और एक पेप्सी…..

मैने बीयर खोला और पीने लगा वो भी सोफे पर बैठ गई और पेप्सी पीने लगी..हम लोग बहुत सारी बातें करते रहे….. फिर मई उठ कर उसके पास बैठ गया…उसने कुछ नही कहा..मैने उसके कंढ़े पर हाथ रखा. और धीरे धीरे उसके साथ सताने लगा..मैने अब कंढ़े को दबाया..वो कुछ बोली नही..मैने कहा भाभी आपके होत बहुत रसीले है..वो मुस्कुरा दी..मैने अब देर नही किया और उसे अपने पास खिछा और उसके होठों पर अपने होत चिपका दिए..वो पहले मूज़े धकेल रही थी..लेकिन मैने ग्लास नीचे रखा और उसका चेहरा दोनों हाथों से पकड़ा और होठों को चूसने लगा…उसकी साँस बम्द होने लगी..मैने उसे छोड़ा..तब वो तेज साँस लेते हुए बोली..संजय..ये क्या कर रहे हो..किसी को पता चल गया तो…मैने कहा कैसे पता चलेगा भाभी?..मैने उसे मेरी तरफ खींचा..उसके बदन को हलके हाथों से सहलाने लगा..फिर से उसे खिछा और होतो को चूमा..मेरी जीभ उसके मूह मे घुसेड दिया..वो अब साथ देने लगी थी..और मेरी जीभ को चूसने लगी..मैने एक हाथ उसकी चुचि .पर .रखा ..सी..सी.. आह . .समजूऊ..क्या कर रहे हो..आग मत लगाओ..वो मुजसे चिपक रही थी.. मई अब उसके टॉप के खुले हिस्से पर मेरे होत रखे ..वो सिहर गई..और सिर को जतकने लगी..मैने उसकी एक चूंची को पकड़ा और मसल दिया..दबाया..वो सी.सी.सी.ई.ई.ई.ई.ई.ई.करने लगी..मैने उसका टॉप उपर उठा दिया..गुलाबी ब्रा मे दूधिया स्तनों को देखा तो मई पागल हो गया..अब ब्रा के उपर से ही उन्हें दबाने लगा..निपल पर मूह रखा..और पीछे हाथ ले जाकर ब्रा का हुक खोल दिया..

इस तरह हम दोनों खोने लगे थे.भाभी ने कहा चलो खाना खा लो..तमदा हो रहा है..मूज़े खाने की फिकर नही थी मई तो आज भाभी को छोड़ने के मूड मे था..वो भी उसी मूड मे थी..मेरी बाँहों मे थी वो..अब पूरी गरम हो चूली थी. उसने कहा..संजय..अब बस करो..ये ग़लत है..लेकिन उसने मेरे शर्त मे हाथ दल के मेरे सिने के बलों को सहलाना शुरू कर दिया था..मेरा लंड अब बेकाबू हो गया था….मैने उसकी चुचियों को बुरी तरह मसलना और चूसना शुरू कर दिया था..मैने कहा.भाभी खाना बाद मे खा लेंगे..अभी तोड़ा प्यार करने दो..उसके मूह से सीत्कार निकल रही थी..मैने उसके .. स्कर्ट को अब उपर उठा के उसकी केले के खम्भे जैसी जांघों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया था..चिकनी और गोरी जंघें ..वो भी बेचैन हो रही थी..मेरे हाथ उपर की तरफ जा रहे थे..अचानक उसने मेरे पैंट पर हट रखा और मेरा लंड सन-साना गया लंड बुरी तरह से बाहर निकालने को तड़पने लगा , भाभी जी पैंट के उप्पर से मेरा लंड सहलाने लगी..इधर मेरा हाथ उपर उठाते हुए उनकी पनटी तक पहुँच गया मैने उसके उपर से उनकी छूट पर हाथ लगाया..सी.स ई.ई.ई.ई.ई.,स स.स.स.स उफ़ संजय आह..क्या कर रहे हो उन्होंने जुक कर मेरे पैंट को खोला..मैने भी जल्दी से पैंट उतार दिया फिर अंडरवईयर भी निकल दिया…फनफनता लंड बाहर निकालने को बेताब था और वो स्प्रिंग जैसा उछाल कर भाभी के मूह के सामने आ गया..उसे देखते ही भाभी ने कहा..बाप रे..इतना लंबा..और मोटा..संजय..उस दिन तो छोटा था..मैने कहा भाभी अभी और मोटा होगा आप प्यार करो.. , जब उन्होंने मेरा लंड का साइज़ देखा तो उन्हें विश्वास नही हुआ.. समजू इतना लंबा और मोटा….लेकिन उन्होंने हाथ मे पकड़ा और सहलाने लगी..और लंड महाराज भी उछालने लगे.मेरा 7 इंच लंबा और 3 मोटा लंड उन्होंने हाथ मे पकड़ रखा..उस पर प्री चूम की ब्ड दिखाने लगी थी वो उस टूट पड़ी और लंड को चूसने लगी विश्वास नही हुआ.. समजू इतना लंबा और मोटा….लेकिन उन्होंने हाथ मे पकड़ा और सहलाने लगी..और लंड महाराज भी उछालने लगे.मेरा 7 इंच लंबा और मोटा लंड उन्होंने हाथ मे पकड़ रखा..उस पर प्री कम की ब्ड दिखाने लगी थी वो उस पर टूट पड़ी और लंड को चूसने लगी उसने लंड के सूपदे को चटा मई तो सातवें आसमान पर पहुँच गया.मैने उसका सिर और नीचे दबाया और ज़्यादा से ज़्यादा लंड उसके मूह मे डालने लगा…मेरे मुँह से भी आ श ..ऐसी आवाज़े निकालने लगी…मई हात्से उसकी चुचि को भी मसल रहा था. मैने उसकी जांघों को सहलाते हुए हाथ उपर ले जाने लगा….और मेरा हाथ उसकी पनटी को लगा..वो..श हास हः..शी ई.ई.ई..कर उठी..मैने देखा पनटी गीली हो चुकी थी..मैने उसे मेरे लंड से हटाया और सोफे पर लिटा दिया..और उसकी स्कर्ट खोल दी..उसने अपनी गुलाबी छूट को गुलाबी पनटी के अंदर बम्द कर रखा था..मई उसके होत और चूंची को चाटते हुए उसकी छूट को पनटी के उपर से सहलाया…वो गान गान उठी..और आ. म. म .म. .उफ़. करने लगी..भाभी ने आँख खोल कर मूज़े देखा और कहा..संजय .प्लीज़.. ये ग़लत है..मत करो.. लेकिन मूज़े मालूम था ये सब नखरे है..मैने उसके पेट और कमर को किस करते हुए..पनटी के एलस्टिक मे दो उंगलियाँ पमसाई और उसे नीचे खिछा..भाभी ने अपनी गंद उठा के मदद की और मैने पनटी उसके पैरों से निकल दी..अब उसका गुलाबी ख़ज़ाना मेरी आँखों के सामने था..क्या छूट थी..एकदम एक लकीर..उसके छूट का छेड़ भी ढाका हुआ था,.उसकी नरम गुलाबी छूट को सहलाया.. भाभी के शरीर मे हरकत हुई..मैने छेड़ को खोला और छूट के दाने को एक उगली से छेड़ा…उई..ई..ई.ई.ई.ई.ई.ई.ई…करते हुए वो उचक गई.मैने उसे सहलाना जारी रखा. .और अपना मुँह नीचे ले गया..

मैने छूट के आसपास चूमना शुरू किया ..वो पैरो को खींच रही थी और फैला रही थी..फिर मैने छूट को फैला के मेरी जीभ उसमे लगाई..आ..उ.उ.उ.उ.उ.. .उहह…श..श स..स…स…स..स..स..स, भाभी ने पैर और फैला दिए. मैने अपनी जीभ अब छूट के उपर ही नही उसके अंदर भी घूमना शुरू कर दिया..मई उसकी छूट अपनी जीभ से छोड़ रहा था. ओह संजय ऐसा मेरे साथ पहले कभी नही हुआ..उफ़.उहह माँ …संजय मेरा हो जाएगा आ …आ ऐसा कहते हुए ..भाभी मेरा सिर छूट के उपर दबा रही थी..और उनकी उभरी हुई छूट को और उभर रही थी. ..मई एक अंगूठे से उसके दाने को सहला रहा था..उसकी छूट मे एक खुशबू थी शायद उसने भी छुड़वाने के लए छूट को सज़ा के रक्खा था….करीब 3 मिनिट मे भाभी ने एक ज़ोर की सिसकारी ली और उनका बदन खिचाने लगा..और कमर को उछाल कर 3-4 जटाके लए और वो निस्तेज और शांत लेट गई मेरा सिर भी उन्होंने अपनी छूट से हटा दिया …मई उठ कर उसे चूमने लगा..फिर मैने उसे गोद मे उठाया..और नमगी..भाभी को लेकर उसके बेड रूम मे गया..हम दोनों ही न्मगे थे…मेरा लंड 120 डिग्री की पोसिशन मे था और इधर उधर सिर हिला रहा था..बिस्तर पर भाभी को लिटा कर मैने अपना लंड फिर से उसके मुँह के पास ले गया..उसकी आँखे गुलाबी हो रही थी..उसने एक हाथ से लंड को पकड़ा और उसे जीभ से चटा मैने फिर से उसकी चूंचियों को सहलाने और दबाने लगा..मैने मेरे दोनों पैर उसके दोनों साइड मे डाला और जुक कर उल्टा बैठा…फिर उसके पेट और उसके नाभि पर मेरी गीली छूट की नोंक गोलगोल..घूमने लगा…और मेरा हाथ फिर उनकी छूट पर पहुँ गायह..इस बार मैने उनकी छूट मे दो उंगलिया डाली ..मैने देखा उनकी छूट काफ़ी छोटी है..उगली मुश्किल से घुसी..लेकिन वो मेरा लुंड इस तरह चूस रही थी की मूज़े बहुत मज़ा आ रहा था…उसने मूज़े सीधा लेटने के लए कहा..मई लेट गया..वो उठ कर बैठी और मेरे लंड को मूह मे लिया.और पूरे लंड को चाटते हुए उसे मुँह मे लेने लगी..मैने पूछा..क्या तुम शर्मा जी को भी ऐसे ही चुसती हो? ..नही..ये पहली बार है..मई तुम्हारे लंड की उसी दिन दीवानी हो गई थी जिस दिन तुम्हारा टॉवेल खुल गया था. .लेकिनएे इतना बड़ा और मोटा होगा ये नही सोचा था…ऐसा कहते हुए एक तज़ुर्बेडार की तरह वो मेरे लंड को चूसने लगी..मेरे मूह से आह श.. उफ़ पीयेच.पीयेच.पीयेच.पीयेच. की आवाज़ निकल रही थी..उसने मेरे बाल.. को पकड़ के दबाया उसे भी जीभ से चटा ..फिर मेरे पूरे लंड को मुँह मे अंदर बाहर करने लगी…और मई भी नीचे से धक्के देने लगा…और अचानक मेरी पिचकारी निकल पड़ी..उसने जल्दी से मुँह से बाहर निकाला..लेकिन फिर भी पिचकारी रुकी नही वो उसके चेहरे और चूंचियों पर गिरती रही..बहुत लावा निकाला…मैने उसे बाजू मे लिटा लिया.. ऐसे ही हम चिपक कर लेते रहे..मैने..उसके चहरे को चूमना शुरू किया..बलों को सहलाते हुए..मई उठा और उसे पेट के बाल लिटा दिया ..अब मैने उसके बलों को हटा के गर्दन को पीछे से चूमना शुरू किया..मेरी गिल जीभ उसके पीठ पर घूमने लगी..उसकी छोटी सी गंद को दबाया मैने..नितंब बहुत ही मस्त लग रहे थे..गोरे और चिकान्य..ऐसा करते हुए मई उसके गंद तक आया..वो फिर से गरम हो रही थी..मैने देखा उसकी गंद भी एकदम गुलाबी है..मैने उगली थूक से गीली की और उसकी गंद मे दल दी.वो चिहुंक गई..नही .ई.ई.ई.ई.ई.. संजय वहाँ नही..मैने कहा ये तो कुँवारी है न..उसने कहा मेरी छूट भी कुँवारी है तुम्हारे इस मोटे लंड के लए..मी गंद से उसकी छूट तक जीभ घुमाया…मैने देखा छूट फिर गीली हो रही है..बिना बलों की छूट से जूस निकल रहा था..मैने उसे सीधा किया..फिर से छूट को चाटने लगा..मेरा लंड भी अब फिर से लोहे जैसा सख़्त हो गया था..वो कहने लगी..संजय..अब मत तड़पाव..मई मारी जा रही हू….मैने अब पोज़ीशन लिया. उसके पैरों के बीच आ गया..पैरों को फैलाया..अब मैने उसकी छूट को ध्यान से देखा..एकदम गुलाबी…और छोटा सा छेड़..मेरा लंड उसके उपर रखा और रगड़ने लगा …उसने पैर उपर उठा के फैला लए…मई एक हाथ से उसकी निपल को मसल रहा था..संजय..प्लीज़ मत तरसाओ.. अंदर दल दो..मैने छूट की पट्टियों को फैला के छेड़ के उपर लंड को रखा और दबाया..लेकिन लंड अंदर नही जा रहा था..छूट का मूह बहुत ही छोटा था..मैने लंड पर बहुत सारा थूक लगाया और छूट को फैला कर छूट के छोटे से छेड़ पर लंड का सूपड़ा रखा और कमर को ज़ोर से दबाते हुए धकेला … छूट के मुँह को खोलता हुआ लंड का सूपड़ा अंदर दाखिल हो गया..और वो आह.कर उठी..और काफ़ी ज़ोर चीखी.. .आ.ई.ई . ई .ई..ई…आ.ई.ई.आ.ई.ई..ई.,,माँ…और मूज़े धकेला… .मैने पूछा भाभी दर्द हुआ?..इतना मोटा अंदर जाएगा तो दर्द नही होगा क्या..? तो फिर निकल लू? मैने पूछा “नही ई.ई.ई..उसने कहा..मैने अब दूसरा धक्का दिया आधे से ज़्यादा लंड अंदर चला गया..उसके मूह से चीख निकली..मार गई..ई.ई.ई.ई.ई.रूको. थोड़ी देर ऐसे ही रहो..मेरी छूट फॅट जाएगी…मई रुका…कुछ सेकंड के बाद उसी हालत मे मई आगे पीछे करने लगा..जिससे उसकी छूट मेरे लंड की अभ्यस्त हो जाए. .अब उसे भी दर्द कम हो रहा था..अचानक ..भाभी ओह ओह..ओह..ओह..करते हुए जड़ गई..और छूट अंदर से बहुत गीली हो गई.मेरा लंड अब आसानी से अंदर बाहर हो रहा था..मैने भी मौका देखकर उसकी गंद के पास सहलाते हुए गंद मे एक चिमती ली और एक करारा जताका मारा और प.र..र .र.र.र..फ़च…की आवाज़ के साथ पूरा लंड अंदर..ये उसकी गंद के उछालने से और आसान हो गया..और भाभी की आँखों से आँसू निकल ए..और मूह से उई.ई.ई.ई.ई.ई..ई..ई..ई….माँ..मार डाला..संजय..मेरी छूट फॅट गई .ई.ई.ई.ई. मैने उसे कस के दबा लिया. 3-4 मिनिट रुकने के बाद मैने उसके बगल के नीचे से हाथ डाला और कंधों को पकड़ा और लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा..उसका दर्द कम हो रहा था..उसकी छूट की हालत से मई समाज गया था की उसका पति उसे ठीक से छोड़ नही पाया आज तक.. अब मई उसके होठों पर मेरे होंठ रख कर चूसने लगा..मैने इसी पोज़ीशन मे उसे धीरे धीरे छोड़ने लगा..मैने मेरा पूरा लंड बाहर खींचा और धक्का दिया एक जटाके मे पूरा लंड अंदर..उसके मूह से फिर से चीख निकली लेकिन मेरा मूह उसके मूह मे होने से ज़्यादा ज़ोर से चीख नही पाई. सिर ग.ग.ग.ग..गों…गों.. की आवाज़ ही निकली.. मैने अब उसे हुमच हुमच के छोड़ना शुरू किया.पूरा लंड बाहर खींच के अंदर दल रहा था..

घमासान चुदाई शुरू कर दी..इस दौरान वो दो बार जड़ गई..छूट से फ़चफ़च.. फ़च..फ़चक..फ़चक…फ़च.. फ़च ..फ़चक की आवाज़ निकल रही थी..करीब 25-30 मिनिट ऐसे ही चोने के बाद मूज़े लगा की अब मई जड़ने वाला हू…मैने कहा भाभी मेरा होने वाला है..वो भी अब चिल्ला रही थी..संजय..और ज़ोर से..और..ज़ोर.से .बहुत मज़ा आ रहा…है ..छोड़ो..ज़ोर से..वो मुजसे चिपक रही थी..संजय..आज तुमने मूज़े सुहागन बना दिया…आज मेरी छूट की चुदाई हुई है..आ…फाड़ दो..इसको…अब तुम मेरे पति हो..मूज़े रोज़ इसी तरह छोड़ने….आज फाड़ दो अपनी रानी की छूट..ये तुम्हारी है…मई अब रुकने की हालत मे नही था..मैने करार धक्के देते हुए…लंड को गहराई तक दबाया और उसकी बच्चेड़नी के मुँह पर अपना ढेर सारा लावा डालने लगा..मूज़े लगा इतना जूस मेरा कभी नही निकाला होगा..मई उससे लिपट कर सो गया..हम दोनों सारी रत न्मगे ही सोए रहे..सुबह 5 बजे निद खुली…मई उठ कर उसे देखा मेरा लंड फिर खड़ा हो गया था..मैने उसे प्यार किया और एक बार फिर उसे जाम कर जबरदस्त छोड़ा .हम लोग फिर से सो गए…जब 8 बजे मेरी निद खुली .उसके बाद मई कपड़े पहन कर अपने फ्लाइट मे आ गया.और फ्रेश होकर अपने कम पर चला गया .जाने के पहले उसे किस किया तो उसने मूज़े शाम को फिर से छोड़ने का प्रोमिस लिया . फिर वो भी उठ कर अपने कम पर निकल गई.

फिर अगली शाम को हमारा प्रोग्राम स्टार्ट हुआ . उस रत मैने उसे बाथरूम मे चलाने का इशारा किया . वो उठाकर बाथरूम मे आ गई फिर मई भी बाथरूम मे आ गया . अंदर आ कर मैने उसे पीछे से ज़ोर से पकड़ कर उसकी चूंचियों को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा , उस दिन उसकी चूंचियाँ बहुत कड़क थी . उसने आँखें बम्द कर दी . मई उसके निपल को ती शर्त के उपर से दबाने लगा . थोड़ी देर बाद एक हाथ से उसकी केप्री (नीचे जो पहना था अंदर पनटी नही थी ) निकल दी उसकी छूट मे उगली दल दी और उगली से उसकी चुदाई करने लगा . अब धीरे धीरे मैने उसके सारे कपड़े निकालकर बिल्कुल नमगी कर दिया . अब वो मेरे सामने बिल्कुल नमगी थी . मैने अपनी पैंट की जीप खोल कर अपना लंड बाहर निकाला तो वो मेरा लंड देखकर वो फिर पागल हो गयी और एक हाथ से ज़ोर से मेरे लंड को पकड़ लिया . अपने कोमल हाथो से मेरे लंड को वो सहलाने लगी और बाद मे नीचे बैठ गयी और मेरे लंड को चूसने लगी . अपनी ज़ुबान से वो मेरे लंड को छत रही थी . धीरे धीरे उसने मेरे लंड को पूरा अपने मुँह मे ले लिया लंड भी एकदम कड़क हो रहा था…उसके मूह मे पूरा नही जा रहा था.लंड बहुत मोटा और बड़ा है..मैने उसके बाल पकड़ कर एक जताका दिया.आध लंड उसके मुँह मे चला गया…उसकी आँखों से पानी निकल आया… फिर धीरे धीरे ज़्यादा से ज़्यादा लंड मे ले कर चूसने लगी.करीब 15-20 मिनिट खूब लंड चुसवाने के बाद मैने उसे घोड़ी बनाने के लए कहा वो दोनों तमगे मोड़ कर घोड़ी बन गई. इस स्टाइल मे औरत को ज़्यादा मज़ा आता है .मैने अब पीछे से उसकी छूट और गंद को सहलाया..उसकी गुलाबी गंद को देख कर मेरा गंद मरने का दिल कर रहा था..लेकिन वहाँ हाथ लगते ही उसने कहा..संजय..प्लीज़ वह नही..मैने छूट को सहलाया..मेरा लंड भी छूट पर रगड़ा .छूट गीली थी इस के बार छूट के छेड़ पर लंड को टीका के दोनों हाथों से उसकी चूंचियों को पकड़ के एक जोरदार जताका मारा उसके मूह से चीख निकल पड़ी..उः..माँ…मार गई..आ ईई.ई.ई.ई.ई.ई. . मई अपना लंड उसकी छूट मई ऐसे ही दल कर उसके चूंचियों को दबाता रहा जब उसका दर्द तोड़ा कम हुआ तो धीरे धीरे अपना लंड अंदर बाहर करने लगा . वो धीरे से बोली ‘आज मेरी सारी प्यास बुजा दो..मूज़े माँ बना दो तुम्हारे लंड से..’ मैने कहा ‘आज तो तुम्हे ऐसे छोड़ुगा की सारी उमर तुम मेरा लंड याद रखोगी ‘

फिर मैने उसे खड़ा कर दिया और मई खुद कमोद के उपर बैठा….मैने लंड को हाथ से पकड़ा और कहा..रानी आज लंड की सवारी करो..और मेरे खड़े लंड पर उसे बैठने को कहा…दोनों पैर दोनों तरफ कर के उसने छूट को लंड पर रक्खा..और मैने उसके चूतड़ को मेरे हाथो से पकड़ा…वो दबाने लगी..लंड अंदर घुस रहा था..लेकिन उसे तकलीफ़ हो रही थी…मैने उसकी कमर को पकड़ा और नीचे से एक जताका दिया..ग..प.प.प. से लंड अंदर घुस गया..वो चिल्ला पड़ी..आ ..चेहरा खिच गया..थोड़ी देर लंड को अंदर ले कर बैठी रही..मैने उसके होतो को किस किया और चुचियो को मसलने लगा..घुंडी मूह मे ले कर चूसा.अब उससे कहा अपनी गंद को उपर नीचे कर के धक्के लगाओ..वो करने लगी…. आज चुदाई मे मज़ा आ रहा है..तुम्हारी छूट बहुत रसीली है…तुम्हारा लंड भी तो कितना मज़बूत है…उसे अब ल्म..छूट की गंदी बातों मे मज़ा आ रहा था और हमारी चुदाई चल रही थी….अब उसने गलियाँ देनी शुरू की अपने पति को..कह रही थी उसके लंड मे दम नही है..सला दो मिनिट मे ढीला हो जाता है..मेरी छूट को ठीक से खोला भी नही….और उसकी साँस तेज होने लगी..उसने धक्के ज़ोर से लगाने शुरू किए मेरे कंढ़े पकड़ के..आह ह..आ..संजय..मई जड़ गई.ई.ई.ई.ई.ई.ई.ई. ..और उसकी छूट का जूस बह कर नीचे मेरे लंड से बहता हुआ..मेरे बाल प आ गया.. मैने उसे खड़ा किया .. और बिस्तर पर ले गया बेड रूम मे.. वह मैने उसे बेड के किनारे पर लिटाया..मई ज़मीन पर खड़ा था..उसकी टाँगो को उसके सिर तक मोड़ा और एक ही जटाके मे लंड को अंदर डाला..और तूफ़ानी चुदाई चुरु कर दी..ऐसे मई उसे करीब 10 मिनिट तक छोड़ता रहा..और वो इस दौरान 2 बार और जड़ गई..अब वो चिल्ला रही थी..संजय..फाड़ दे..मेरी छूट..को..उसे बहुत मज़ा आ रहा था..उसकी छूट फूल गई थी..छूट का मैने कचुंमार बना दिया…और फिर मेरे लंड ने उसकी छूट की गहराई मे अपना पानी छोड़ दिया.लंड का पानी फव्वारे की तरह छूट मे गिरा..करीब 2 मिनिट तक मैने पिचकारी मारी..छूट से बह कर गंद तक बह रहा था..दोनों का जूस…मैने लंड को बाहर खींचा तो पाक.क की आवाज़ आई..मैने देखा उसकी छूट सूज गई थी और अँग्रेज़ी के ‘ओ’. जैसी खुल गई थी….मई उसके बाजू मे लेट गया और हम .दोनों एक दूसरे से चिपक गए…उस रत मैने उसे और 3 बार अलग अलग तरीके से छोड़ा..वो पूरी तक गई थी..उससे उठा नही जा रहा था..दूसरे दिन हम दोनों कम पर नही गए..छुट्टी ले ली..और दिन मे भी चुदाई की..उस दिन मैने उसे किचें मे और सोफे पर छोड़ा….वो मेरे लंड से बहुत खुश थी..हमारा ये चुदाई का सिलसिला चलता ही रहा करीब 5 साल तक इस दौरान वो 3 बार गर्भवती हो गई..उसके बाद उसके पति ने दूसरी जगह एक फ्लाइट खरीद लिया इस बारे मे दोनों पति पत्नी मे जगड़ा भी हुआ..वो जाना नही चाहती थी..लेकिन उसके पति ने सुना नही..जाने से पहले उसने मुजसे बहुत चुड़वाया और मेरे पास गर्भवती होकर गई..उसका एक ही लड़का है..जो की मेरा है…उसके बाद भी वो मेरे पास आती रही…मेरी शादी के बाद भी मई उसे छोड़ता हू..हम लोग कही बाहर मिलते है..क्यूकी मेरा बेटा अब 10 साल का हो गया है…वो अब भी मुजसे पत्नी की तरह चुड़वाती है…उसको छोड़ कर मूज़े अब भी उतना ही मज़ा मिलता है..और वो भी पूरी तृप्त होने तक चुड़वाती है..हम लोग कई बार मुंबई से बाहर भी जातें है जब उसका पति नही रहता तब.

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