नीग्रो डेविक ने धकापेल मेरी चूत और गान्ड चोदी

हैलो फ्रेंड्स.. मेरा नाम मीठल भगत है, मैं मुंबई से हूँ.. मुझे मॉडलिंग का शौक था।
मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से थी, इसी लिए मैंने एक बड़े घर के आदमी को पटाया, पहले उससे दोस्ती की और प्यार का दिखावा करके मैं उसके साथ सैट हो गई और अपना मॉडलिंग का सपना पूरा करने लगी।
पति की वजह से मुझे कई सारे ऑफर मिलने लगे थे। सब मेरे मन के मुताबिक चल रहा था।
एक दिन मेरे पति ने बिजनेस के लिए फ्रांस जाने का प्रोग्राम बनाया और मुझे भी चलने की रिक्वेस्ट की.. और मैं भी मना ना कर पाई।
हमने फ्रांस मैं एक बंगला किराए पर लिया.. यह बहुत खूबसूरत था।
आज मेरा दिल खुश था.. क्योंकि हम दोनों तन्हा थे, आज कुछ करने का मूड था.. पर रंग मैं भंग डालने के लिए कॉल आया और मेरे पति को जाना पड़ा।
मैं वैसे ही सो गई..
दूसरे दिन सुबह की किरणें आँखों पर पड़ीं तो मेरी नींद खुली.. वाहह.. क्या सुंदर नजारा था। मैं पारदर्शी नाईटी पहने हुए ही कमरे से बाहर आई।
मैं मौसम का आनन्द ले रही थी.. मेरी नाईटी की डोरी खुली हुई थी और अन्दर पहनी ब्रा और पैन्टी दिख रही थी। उसमें से मेरे आधे से अधिक मम्मे साफ़ दिख रहे थे।
मैं अपने बाल संवार रही थी कि मेरी नज़र नीचे पड़ी और देखा कि मेरे पति और उनके साथ 4-5 साथी बैठे हुए थे।
मुझे थोड़ी शरम सी आई.. पर मेरे पति ने नीचे से मुझे देख कर एक फ्लाइंग किस दिया।
फिर सब अपनी बातों में लग गए।
उनमें से एक आदमी बार-बार मुझे देखे जा रहा था, वो काला सा आदमी था.. शायद वो एक नीग्रो था।
मैं अन्दर चली गई और तैयार होकर नीचे आई, मेरे पति ने मुझे सबसे इंट्रोड्यूस कराया।
वो काला आदमी भी था.. उसका नाम डेविक था और मेरे पति के कहने पर वो मेरे साथ एक एड बनाना चाहता था।
वो मुझे ज़रा अजीब सा लगा.. पर मैंने सोचा काम करने में क्या हर्ज है.. मैंने ‘हाँ’ कर दी।
दूसरे ही दिन मेरे पति को आवश्यक काम से वापस मुंबई जाना पड़ा।
उसी दिन शाम को डेविक बंगले पर आया, उसने दस्तक दी.. मैंने दरवाजा खोला.. तो देखा कि डेविक है।
उसने अन्दर आते ही मुझे हग किया और मेरे गाल पर किस किया।
मुझे थोड़ा अजीब लगा.. लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा।
मैंने उसे बैठने को कहा और मैं रसोई में कॉफी लेने चली गई कि किसी ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरे मम्मों को मसलने लगा।
मैं लगातार छूटने की कोशिश करने लगी और जब छूटी तो देखा कि वो डेविक ही था।
मैंने उससे गुस्से से पूछा- क्या कर रहे हो?
वो बोला- आई वांट टू फक यू बेब..
वो मेरे साथ सेक्स करना चाहता था.. पर मैं नहीं चाहती थी।
मैंने उससे ज़ोर का धक्का दिया और भागने लगी।
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भागते हुए मैं सीढ़ियों तक ही पहुँची थी कि उसने मेरा पैर पकड़ कर मुझे अपने ओर खींचा और मुझे गोद में उठा कर बेडरूम में ले गया। उसने मुझे बेड पर पटक दिया.. मैं एकदम से डर गई कि अब ना जाने क्या होगा?
मैं रोने जैसी हो गई थी।
अब वो मेरे कपड़े उतारने लगा, मैं फिर भी उसे रोकने में लगी रही.. पर वो ना रुका, उसने मेरा टॉप और जीन्स निकाल फेंका, मेरी ब्रा फाड़ डाली और पैन्टी को भी खींच कर मुझे नंगा कर दिया।
मैं सिकुड़ कर अपने-आपको ढकने लगी।
अब उसने खुद के कपड़े उतारे और वो नंगा हो गया। मैं उसका झूलता भीमकाय लौड़ा देखा कर और ज़्यादा डर गई।
अब वो मेरे ऊपर आ गया और उसने मुझे किस किया.. मेरे होंठों को चूसने-काटने लगा। मेरा तो दम घुटने लगा था.. पर मैं कुछ कर भी नहीं सकती थी।
वो मेरे चूचे चूसने लगा, उसने मेरे रसीले आमों को चूस-चूस कर लाल कर दिया।
मैं अब हाथ-पैर चला कर थक चुकी थी। अब उसने मेरी चूत को चाटना शुरू किया.. बीच-बीच में वो काटता रहा। मुझे बहुत दर्द होता.. उसने चाट-चाट कर मेरी चूत गीली कर दी। फिर उसने उंगली मेरी चूत में डाल कर फिंगरिंग करने लगा।
अब मुझसे रहा ना गया और मैं भी गर्म हो चुकी थी।
पहले एक.. फिर दो.. तीन.. चार और बाद मैं उसने पूरा हाथ चूत में डालने की कोशिश की.. मेरा दर्द से बुरा हाल था।
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।
अब उसने मुझे उल्टा किया और मेरी गाण्ड चाटने लगा। अब मेरा सब्र का बाँध टूट गया.. क्योंकि मेरे पति को तो कभी चुदाई करने का टाइम ही नहीं मिलता था।
अब वो जो भी करता.. मैं उसे करने दे रही थी।
फिर उसने अपना काला भुसंड लण्ड मेरे मुँह में दे दिया.. सच में ये बहुत ही बड़ा था.. एकदम काला और मोटा।
मुझे मुँह में लेना थोड़ा खराब लगा.. पर अच्छा भी लग रहा था, उसके रस का स्वाद नमकीन और उबकी वाला था।
उसका लण्ड मेरे गले तक ठोकर मार रहा था, मेरा गला दर्द करने लगा था.. पर मैं क्या करती।
करीब 10 मिनट तक ऐसा करने के बाद उसने मुझे उठा कर एक और किस किया।
अब मैंने भी इसमें उसका साथ दिया।
फिर हम बिस्तर पर लेट गए, उसने लण्ड मेरी चूत पर रखा, मुझे चूत में थोड़ी चुलबुली हुई।
फिर उसने ज़ोर से धक्के के साथ अपना मूसल मेरी चूत में अन्दर डाला.. मेरी तो दर्द से जान निकल गई, मैं चीख पड़ी..
फिर उसने दूसरा जोरदार धक्का दिया।
अब तो मैं जैसे मर ही गई.. बड़ा अजीब सा दर्द हो रहा था।
मैं दर्द के कारण फूट-फूट के रोने लगी.. पर उसके धक्के ना रुके।
ऐसा लग रहा था कि उसका लंबा लण्ड मेरी चूत से गुज़रता हुआ कहीं मेरे पेट तक जा चुका था और मुझे वो महसूस हो रहा था।
वो अनचाहा दर्द कम होकर अब मुझे प्यारा लगने लगा।
थोड़ी ही देर में मेरा पानी निकल गया.. पर वो मुझे चोदता ही रहा।
अब वो मेरे ऊपर लेटकर मुझे चोद रहा था।
‘आ..आ..आह..’ मेरी आवाजें उसके धक्कों में दब गई थीं और अंजाने में मेरे हाथ कब उसकी पीठ सहलाने लगे.. पता ही नहीं चला।
एक तरफ वो मुझे चोद रहा था और अपने होंठों से मेरे होंठ चूस रहा था।
उसके झटके और तेज हुए और वो मेरे अन्दर ही झड़ गया, इतना सारा पानी था उसका कि मैं उसके वीर्य से लबालब हो गई।
अब हम दोनों नंगे एक बिस्तर में पड़े थे।
फिर 20-25 मिनट बाद मैं उसके ऊपर चढ़ गई और उसे किस किया.. क्योंकि दर्द देकर भी उसने मुझे एक अजीब मज़ा दिया था।
वो भी मूड में आ गया और उसने अपना लंड फिर से मेरे मुँह में दे दिया, मैंने चूसना शुरू किया और थोड़ी ही देर में ही उसका लण्ड सख़्त हो गया।
अब उसे मेरी गाण्ड मारनी थी और मैं भी मना ना कर पाई।
उसने उसे बहुत चाटा.. मुझे भी अच्छा लगा।
फिर उसने अपना लण्ड मेरी गाण्ड में घुसड़ेना शुरू किया।
वो दर्द.. ना रे बाबा ना.. पर मैंने उसे रोका नहीं.. उसने मेरे पैर फैला दिए.. बेहद दर्द हुआ.. पर मैं चुप थी। फिर उसने ज़ोर से अन्दर ठेल दिया।
‘आआह्ह्ह..’ मेरी जोर की चीख निकली, मुझे बहुत ज़्यादा दर्द हुआ।
मैंने हाथ लगाया.. तो देखा कि मेरी गाण्ड से खून निकल रहा था।
उसने मुझे ज़बरदस्ती लेटा दिया और लगा मेरी गाण्ड मारने।
मैं तो बेहोश हो गई.. जब होश आया तो वो मेरे ऊपर ही था।
मैं कुछ बोलती.. इससे पहले उसने मुझे किस किया.. वो बहुत गहरा चुम्बन था।
अब उसने तीसरी बार मुझे चोदा.. लेकिन अब दर्द नहीं हुआ।
हम समागम से बाद थके हुए वैसे ही एक-दूसरे की बाँहों में पड़े रहे।
फिर उसने मुझे किस किया और यह भी बताया कि उसने ही मेरे पति को इंडिया वापस भिजवाया.. क्योंकि वो मुझे चोदना चाहता था।
फिर हमने एड शूटिंग के दौरान बहुत बार चुदाई की।
उससे अपनी चूत और गान्ड चुदवा कर सच में मुझे अदभुत आनन्द मिला था।
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