बहना चुदती रहना

मेरे नंगे जिस्म का एहसास जब भैया को हुआ तो उनका लंड खड़ा हो गया जिसका एहसास मुझे मेरी कमर पर होने लगा। मैं एकदम उनसे अलग हुई और उनसे जाने को कहा। लेकिन भैया एकटक होकर देखते रहे। मोमबत्ती की मद्धिम रोशनी में उनको मेरे जिस्म के स्पष्ट दर्शन हो रहे थे। उनकी आँखों में वासना उतरती नज़र आने लगी। उनके इस तरह देखने से मेरा जिस्म भी गरम होने लगा और मैं मन ही मन अपनी चुदाई के सपने देखने लगी। मैं नज़रें नीची कर ख्यालों में उनके लंड को अपनी चूत में महसूस करने लगी। इतना सोचने से ही मुझे महसूस हुआ कि मेरी पैंटी गीली हो चुकी है। मैंने नज़र उठाकर भइया कि तरफ़ देखा तो चौंक गई। वो जा चुके थे और मेरी चुदाई के सपने पल भर में टूट चुके थे।
रात के १२.०० बज चुके थे। मैं अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी लेकिन अब मुझे नींद नहीं आ रही थी। भइया अभी भी हॉल में टी.वी. देख रहे थे। मेरा जिस्म अभी भी गरम था और चुदाई के पहले एहसास ने मेरे रोम-रोम में सेक्स भर दिया था। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ?
यही सोचते-सोचते कब मेरा हाथ मेरी पैंटी में चला गया पता ही नहीं चला। अब मेरी उँगलियाँ मेरी चूत के साथ खेल रहीं थीं। मैं अपनी उँगलियों से चुदाई करके अपने आपको संतुष्ट करने लगी। लेकिन उँगलियों से मुझे कुछ खास मज़ा नहीं आ रहा था इसलिए मैं किसी मोटी चीज़ की तलाश में अपने बिस्तर से उठी। मैंने मोमबत्ती के पैकेट में से एक नई मोमबत्ती ली और अपने रूम में आ गई। रूम में अभी भी मोमबत्ती जल रही थी।
मैंने अपनी पैंटी उतार कर फेंक दी, अब मैं सिर्फ़ नाईटी पहने थी उसके नीचे ना तो ब्रा थी ना ही पैंटी। मैंने अपनी एक टांग टेबल पर रखी और दीवार के सहारे स्थिति बनाकर अपनी नाईटी ऊपर कर मोमबत्ती को अपनी चूत में डालने लगी। मोमबत्ती काफी मोटी थी और मेरी चूत बिल्कुल कुंवारी थी इसलिए मोमबत्ती अन्दर नहीं जा रही थी। लेकिन मेरे ऊपर तो चुदाई का भूत सवार था सो मोमबत्ती को जबरदस्ती अपनी चूत में पेल दिया।
मोमबत्ती के अन्दर जाने से मुझे काफी दर्द हुआ और मेरे ना चाहते हुए भी एक घुटी सी चीख मेरे मुंह से निकल गई। दो मिनट तक मोमबत्ती को अपनी चूत में डाले मैं वैसे ही खड़ी रही। फिर मैंने मोमबत्ती को अन्दर-बाहर करना शुरू किया। अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, उह्ह्ह्ह्ह्ह …………….. मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं, मुझे मोमबत्ती से चुदाई करने में मज़ा आने लगा।
मैं कल्पनाओं में खोई हुई मोमबत्ती को सुनील भइया का लंड समझने लगी और बड़बड़ाने लगी ‘हाँ………… सुनील भइया, जोर से डालो अपना लंड, आज मेरी प्यास बुझा दो, जाने कितने दिनों से प्यासी है मेरी चूत आज इसको जी भर के चोदो और अपने लंड की ताकत से इसके दो टुकड़े कर दो, फाड़ दो, हाँ…… फाड़ दो……. मेरी चूत को। अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, उम्म्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…………….. मेरी सिसकारियाँ तेज़ होती जा रही थीं।
अब मुझे मोमबत्ती से चुदाई करने में अत्यन्त मज़ा आ रहा था। मेरा हाथ तेज़ गति से मोमबत्ती को मेरी चूत में पेल रहा था। मैं मदमस्त होकर पूरा आनंद ले रही थी। मैं अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। मेरे शरीर से पसीना आने लगा था और मेरी टाँगे काँपने लगी थीं। मेरा इस स्थिति में खड़ा होना मुश्किल हो रहा था लेकिन मुझे इस स्थिति में बहुत मज़ा आ रहा था इसलिए मैं अपनी स्थिति बदलना नहीं चाह रही थी। मेरा हाथ मुझे पूरी तरह से संतुष्ट करने के लिए बहुत तेज़ गति से चलने लगा। आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह,…………….. उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह,………….उम्म्म्म्ह्ह्ह्ह………… और आखिरकार वो पल आ ही गया, मेरा शरीर पूरी तरह जकड़ने लगा, अब मैं फर्श पर गिर पड़ी, अपनी दोनों टाँगे फैलाकर मोमबत्ती को फिर से डालने लगी और एक तेज़ आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह के साथ मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया जो फर्श पर फैल गया। अब मैं शांत हो चुकी थी, मेरी चूत की प्यास काफी हद तक बुझ चुकी थी। लेकिन मेरी असली चुदाई तो अभी बाकी थी।
सुनील भइया दरवाज़े पर खड़े थे। उनको देखकर मेरे होश उड़ गए। मैं फर्श से उठकर खड़ी हो गई और भइया को देखने लगी। भइया रूम में अन्दर आ गए और उन्होंने अपनी टी-शर्ट व हाफ-पैंट उतार दिया, अब वो सिर्फ़ अपनी फ्रेंची चड्डी में मेरे सामने थे जिसमे उनका तना हुआ लंड साफ़ दिखाई दे रहा था। वो पास आए और अपनी चड्डी में से अपना लंड निकालकर मेरे हाथ में रखकर बोले, “आयुषी, जरा चेक करो ये मोमबत्ती से मोटा है या नहीं?” उनके लंड को देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गई। लंड वाकई में बहुत मोटा था और उसका सुपाड़ा तो कुछ ज्यादा ही मोटा था
मैंने भइया से पूछा, “भइया, लंड इतना मोटा होता है?”
भइया ने कहा, “नहीं, आयुषी हर किसी का इतना मोटा नहीं होता है।”
मैंने फिर भइया से पूछा, “इसका, सुपाड़ा इतना मोटा है, ये चूत में अन्दर कैसे जाता होगा?”
भइया ने कहा, “अभी थोड़ी देर में पता चल जाएगा, ये अन्दर कैसे जाता है।”
और जैसे मैं कोई अजूबा देख रही हूँ और क्यूँ ना लगे, लंड पहली बार जो देख रही थी। खामोशी को तोड़ते हुए भइया ने मुझे घुटनों पर बैठने को कहा और मैं बैठ गई।
फ़िर भइया मेरे पास आए और अपने लंड को मेरे होठों से लगाते हुए बोले, “इसे अपने मुंह में डालो।”
मैंने कहा, “नहीं, भइया ये बहुत मोटा है मेरे मुँह में नहीं जाएगा।”
भइया को अब थोड़ा गुस्सा आ गया और गुस्से में बोले, “मुँह में लेती है या सीधा तेरी चूत में डालूँ?”
मैंने कहा, “नहीं भइया चूत में नहीं, वो फट जायेगी, मैं मुँह में लेती हूँ।”
ऐसा कहकर मैंने उनका लंड अपने मुँह में लिया। लंड का सुपाडा बड़ा होने के कारण मुँह में फँस रहा था और मैं लंड को मुँह में लिए उसे चूस नहीं पा रही थी लेकिन भइया के इरादे कुछ और थे उन्होंने मेरे बाल पकड़े और मेरे मुँह में धक्के देने लगे। मैं कुछ नहीं बोल पा रही थी और मेरी आँखों से आँसू निकलने लगे थे। भइया पूरी तरह से वहशी हो गए थे और मेरे बालों को खीचते हुए मेरी मुँह को चूत समझकर चोदने लगे थे।
मेरी हालत बहुत ख़राब हो रही थी और आँसू भी लगातार बह रहे थे लेकिन भइया के धक्के लगातार तेज़ हो रहे थे। वो मेरे बालों को इस तरह खींच रहे थे जैसे मैं उनकी बहन नहीं कोई रण्डी हूँ। भइया का मुँह लाल पड़ गया था और उनके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं।उनको मेरे ऊपर जरा भी तरस नहीं आ रहा था। वो तो किसी जानवर की तरह मेरे मुंह को चोदते जा रहे थे, कभी वो मेरे बाल खींचते तो कभी मेरे गाल पर चपत लगाते, वो इतने वहशी हो गए थे कि मुझे उनसे डर लगने लगा था।
मैं मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी, मुझे बचा लो। और भगवान ने मेरी सुन ली, भइया शायद झड़ने वाले थे इसीलिए उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकाल लिया। मैंने एक गहरी साँस ली और सिर पकड़कर बैठ गई। भइया बोले, “आयुषी ज़रा अपनी जीभ से मेरे लंड को चाटकर इसका पानी निकाल दो।”
मैंने भइया के लंड की तरफ़ देखा वो अब भी तना हुआ खड़ा था, उनके लंड को देखकर मेरा शरीर गरमा गया, मैं घुटनों पर चलती हुई भइया के लंड के पास पहुँची और उसे हाथ में लेकर जीभ से चाटने लगी। मेरे चाटने से भइया की सिसकारियाँ निकलने लगीं और वो बोलने लगे, “शाबाश, मेरी प्यारी बहना ! चाट और चाट, अभी रसमलाई निकलेगी उसे भी चाटना।”
इतना कहकर भइया ने एक जोर की अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह………. के साथ वीर्य मेरे मुंह पर छोड़ना शुरू कर दिया, मेरा मुंह पूरी तरह से उनके वीर्य से नहा गया, कुछ मेरे होठों पर भी रह गया जिसे मैंने जीभ से चाट लिया और उसके बाद भइया के लंड को भी चाटकर साफ़ कर दिया।
भइया ने मुझे खड़ा किया और तौलिए से मेरा मुंह साफ़ कर होठों से होंठ मिलाकर चूमना शुरू कर दिया। ५ मिनट के उस किस ने मेरे सेक्स को चरम पर पंहुचा दिया और मेरी चूत लंड खाने के लिए बेकरार होने लगी। भइया शायद इस बात को समझ गए थे इसलिए उन्होंने किस करते हुए ही मेरी नाईटी उठाकर अपना एक हाथ मेरी चूत पर ले गए और उसे सहलाने लगे।
मेरी बेकरारी भइया का स्पर्श अपनी चूत पर पाकर और बढ़ गई और मैं भइया से कहने लगी, “भइया, अब और सहन नहीं होता है, मेरी चूत में अपना लंड डालो प्लीज़ मुझे चोदो और बताओ चुदाई क्या है?”
भइया बोले, “आयुषी, चिंता मत करो पूरी रात अपनी है आज मैं तुझे वो मज़ा दूँगा जिसे तू जिंदगी भर याद रखेगी।”
ऐसा कहकर भइया ने अपनी एक उँगली मेरी चूत में डाल दी। मैं उनकी उँगली को चूत में पाकर कसमसा गई और सिसकारियाँ लेने लगी। भइया अपनी उँगली को मेरी चूत में अन्दर बाहर करने लगे उन्हें शायद मेरी नाईटी से दिक्कत हो रही थी इसलिए उन्होंने चूत में उँगली डालते हुए ही मुझसे नाईटी को उतारने के लिए कहा और मैंने किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उनकी बात मानकर अपनी नाईटी को सिर के ऊपर से उतारकर फ़ेंक दिया।
भइया की उँगली मुझे पूरा आनंद दे रही थी और मैं सिसकारियाँ लेकर मज़ा ले रही थी। मुझे मज़ा लेते देख भइया ने अपनी दूसरी ऊँगली भी मेरी चूत में डाल दी। और स्पीड से अन्दर बाहर करने लगे साथ ही अपने अंगूठे से मेरी चूत के ऊपरी हिस्से को रगड़ने लगे। उनकी उँगलियाँ भी मुझे इतना मज़ा दे रही थी कि मुझे जन्नत का अनुभव हो रहा था, मुझे लग रहा था कि मैं आसमान में कहीं उड़ रही हूँ। भइया की उँगली-चुदाई ने मुझे एक बार फिर झड़ने के लिए मजबूर कर दिया, मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया
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