भाई की मस्त बहन

जानता है, औरत को कुतिया की गाली क्यूँ दी जाती है…
मैं – नहीं…
मंटू – क्यूंकी गली के सब कुत्ते मिल कर, एक कुतिया को चोदते हैं… कभी सारे, बारी बारी से… कभी अलग अलग… एक ही बार में 10 10 कुत्तो का लंड ले लेती है, एक कुतिया… साली, हमेशा चुद्ने को तैयार रहती है… कुतिया वो जानवर है, जो अपनी जिंदगी में सबसे ज़्यादा लंड लेती है और जिसे ये तक नहीं मालूम होता की उसके पिल्ले किस कुत्ते के लंड की उपज़ हैं… हर कुत्ता, जब मर्ज़ी हो तब उसे चोद सकता है… असल में, औरत के लिए गाली रंडी, छीनाल या कोठे वाली नहीं है… सबसे बड़ी गाली, औरत के लिए कुतिया ही है… अब जा और जा के पूरी नंगी कर, अपनी रंडी कुतिया बहन को… नहीं तो अब की लात, तेरे लंड में पड़ेगी .
मैं तुरंत पीछे आ के, अपनी बहन के पीछे खड़ा हो जाता हूँ..
अब मेरी बहन, केवल एक ब्लाउज में थी और उसका बाकी शरीर एक दम नंगा था.
मैंने पीछे से ही, उसके ब्लाउज के दोनों हुक एक एक कर के खोल दिए और पीछे से ही उसका ब्लाउज उतार दिया.
उसके दोनों चुचे, उसके ब्लाउज से ऐसे बाहर आए जैसे किसी ने उबले हुए आलू से छिलका हटा दिया हो.
एक दम गोरे और एक दम चिकने.
उन्हें देख के तो मैं एक बार फिर से हिल गया पर तुरंत ही, मेरी लुल्ली में दर्द उठ गया.
मैंने सामने मंटू की तरफ़ आँसू भरी और मज़बूर निगाहो से देखा और उसके ब्लाउज को, उसकी तरफ दिखाते हुई बोला..
मैं – ये मेरी बहन का छोटा सा ब्लाउज… जो मेरी बहन के गोरे गोरे चुचे जो केवल आप जैसे मजबूत, तगड़े और मोटे के लिए है… और आप जैसे से पैदा होने वाली सपोलो को दूध पीलने के लिए है… ये लीजिए, इस कुतिया का ब्लाउज क्यूंकी मुझे नहीं लगता इसे इसकी ज़रूरत है क्यूंकी कुतिया को सच में नंगी घूमती है… ऐसे ही घूमाओ, इसे भरी सड़क पर नंगा और आते जाते हर इंसान से इसके ये मम्मे चुस्वा दो… सड़क पर छोड़ के तो देखो, इससे कुतिया भी शरम से पानी पीने लगेगी, मेरा वादा है…
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और फिर जा के, वो ब्लाउज मैं मंटू को दे देता हूँ.
मंटू उसे अपनी नाक से लगा के एक गहरी साँस लेता है और फिर उसे अपने खड़े हुए एक दम कड़क लण्ड पर रखता है और उससे अपना लण्ड मसलता है, और बोलता है.
मंटू – मादर चोद, क्या बयान किया है अपनी बहन के हुस्न को… मज़ा आ गया… मेरा लंड तक खड़ा कर दिया… अब जा के इस कुतिया बहन को मेरे पास ला… ज़रा मैं भी देखूं तेरी जवान, रंडी बहन की जवानी को छू के… मैं पीछे मूड के, अपनी बहन को लेने के लिए चल दिया…
पीछे से, मेरे को मंटू की आवाज़ आई..
मंटू – बहन चोद… तेरे बाप ने क्या खा के तेरी रंडी कुत्ति माँ को चोदता था, जो तेरे जैसी औलदें पैदा हुई… सही कहा, तूने गान्डू… तेरी बहन तो सड़क की कुतिया को भी पीछे छोड़ सकती है… साली, छीनाल, रंडी जब देखो चूत फैलाए खड़ी रहती है और तू साला, हिजड़ा… अपनी ही बहन को दिखा दिखा कर, मज़े ले रहा है… साले तेरी जगह मैं होता तो अपनी बहन को काट के फेंक देता और ऐसा कुछ मेरे साथ होता तो मैं आत्म हत्या ही कर लेता… ना जाने कैसे कैसे लोग हैं, इस दुनिया में… खैर मुझे क्या… इस जैसी, रंडी लाल बाज़ार में 20 25 हज़ार से कम में नहीं मिलेगी… मुझे फ्री में मिलती है…
मैं कुछ नहीं बोलता हूँ.
मेरी आँखों में तो आँसू थे और दिल में बेपन्ह नफ़रत…
मेरे को अब अपने उपर बहुत ज़्यादा शरम भी आने लगी थी पर मेरी दीदी के चेहरे पर मेरे और मंटू के द्वारा इतनी बेइज़्ज़ती करने के बाद भी मुस्कुराहट थी और वो मंटू की ही तरफ देख रही थी.
जी तो चाहा की साली को पटक पटक कर मारूं.
नंगी खींच के ले जाऊं और बीच चौराहे पर पटक दूँ और इंसानों से क्या कुत्तो तक से चुदवा दूं.
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खैर, मैंने दीदी का हाथ हल्के से पकड़ा और उसके साथ मंटू की तरफ़ चल दिया.
मंटू के बगल में दीदी को ले के खड़ा हो गया और बोला..
मैं – ये लीजिए मालिक, मेरी जवान खूबसूरत और शायद दुनिया की सबसे बेशर्म, नीचे और गिरी हुई बहन… आप अपने मज़बूत, कड़क, मोटे, लंबे लण्ड से जी भर के चोदिये और अपने जीवन का आनंद उठाइए और अपने इस लंड के होने का गर्व करिए.
मेरे मुँह से ये सुन के मंटू ने मेरी तरफ़ देखा और हल्के से मुस्कुराते हुए, मेरी बहन का हाथ पकड़ के अपनी तरफ खींच लिया, जिससे मेरी बहन उसके ऊपर गिर गई.
मेरी बहन के चुचे, उसके सिने से टकरा गये और उसका एक हाथ मेरी बहन की नंगी, गोरी, चूत पर आ गया.
वो मेरी बहन को देखते हुए बोला..
मंटू – तेरा ये गंडिया भाई बोलता तो बड़ा सॉलिड है और सही है… तुझसे नीच औरत तो मैंने भी आज तक नहीं देखी, कुतिया…
और वो मेरी बहन के लाल होंठों को हल्के से किस कर लेता है.
दीदी मंटू का कुर्ता उतार थी हैं और मुस्कुराते हुए बोलती हैं..
दीदी – सही कहा आपने, मेरे हुस्न के मालिक… गिरी हुई हूँ, नीच हूँ या सड़क की कुतिया, मेरी नंगी चूत देख कर आपका लंड गुब्बारे की तरह फूला हुआ है… ना जाने क्यूँ नीच और गिरी हुई चूत देख कर भी आप का लंड क्यूँ खड़ा हो जाता है… तो माने ये रखता है की आख़िर रिश्ता सिर्फ़ एक ही होता है – गीली चूत और खड़े लंड का… अगर आपके महान लंड, हमारी नीच चूत को देख कर खड़े ही ना हो तो हम भी नीच ना बने…
दीदी के कुछ भी कहने से, हम दोनों को ही कुछ फरक नहीं पड़ा.
चुद्वाने की आग में, बिचारी ये भी नहीं समझ पाई थी की जो औरत अपने पति का साथ छोड कर दूसरे मर्द के पास जाती है, जो एक बार अपनी दहलीज़ पार कर लेती है, वो औरत नहीं रह जाती सिर्फ़ बियर की बॉटल या टिश्यू पेपर से ज़्यादा, किसी मर्द की नज़रों में उसकी कोई कीमत नहीं रह जाती.
चाहे कितनी भी बड़ी बड़ी बातें कर ले पर उसकी औकात, बिल्कुल छोटी हो जाती है.
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खैर, इधर अब हम तीनों लोग एक दम नंगे थे.
मेरा लण्ड मेरी कमर पर बँधा हुआ था, जिससे मेरे को अभी भी बड़ा दर्द हो रहा था.
जबकी मेरी बहन, दो मिनट पहले ही जिसने ताली बजाने वाला डायलाग मारा था वो अब नंगी होते हुए भी अपने हुस्न और जवानी पर इतरा रही थी और मंटू का तो कहना ही क्या था.
उसके हाथ में तो लड्डू था ही.
एक मस्त, जवान, बड़े घर की लड़की जो मिली थी, उसे चोदने के लिए, जिसका पति साला गधे की तरह ऑफीस में काम रहा था ये सोच कर की उसकी पत्नी घर में उसका बेसब्री से इंतेज़ार कर रही होगी और एक था, उसका नामर्द भाई जो खुद ही इतना कमजोर था की किसी ताक़ातवर इंसान का सामना नहीं कर सकता था और मजबूरी में ही सही, अपनी ही बहन को एक दूध वाले के बेटे के सामने नंगी कर रहा था.
उसका लण्ड तो करीब करीब 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा हो चुका था,
अब वो मेरी बहन को एक झटके में ऐसे उठाता है, जैसे उसने कोई फूलों की टोकरी उठाता हो.
उसे उठा के वो कुतिया के बेड रूम में, जिसमें थोड़ी देर पहले मैं दीदी को चोद्ना चाहता था और जिसमें दीदी शायद ही कभी जीजू के साथ चुदवाती थीं, उसी में ले जा के पटक देता है.
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दीदी के मुँह से हल्की सी आवाज़ निकलती है.
दीदी – धीरे… राजा जी…
मंटू (हंसते हुए) – अभी से ही शिकायत, रंडी की औलाद… अभी तो मेरा ये शमशेर लौड़ा, तेरी कमसिन चूत में गया ही कहाँ हैं… एक बार जाने तो दे…
मेरा वादा है आपसे, हर भाग आपके के लिए एक नया रोमांच लेकर आएगा.. .
बस जुड़े रहिये, मुझसे और मेरी सेक्स स्टोरी से.. . ..
धन्यवाद..
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