और उसके मुँह में ही

ये मेरी पहली कहानी है जो बिल्कुल सच्ची है।
मैं जामिया, दिल्ली से बीबीए कर चुका हूँ और यह मेरी बीबीए के पहले साल की बात है।
मेरे दूर के रिश्ते में एक अंकल थे.. उनका नाम सतीश चंद्रा था.. उनके घर में उनकी बीवी के अलावा 2 बेटियाँ थीं.. वो लोग ग्वालियर में रहते हैं। वो लोग पहली बार जब हमारे घर पर आए तो मैं उनसे पहली बार मिला था और फिर मैं अपने कमरे में जाकर पढ़ने लगा।
उस समय वो दोनों पति-पत्नी अकेले ही आए थे। उन्होंने शाम को खाना खाया और थोड़ा बहुत उन लोगों ने मेरी पढ़ाई के बारे में पूछा.. फिर मैं सोने चला गया।

काफ़ी दिन बीत गए.. तो एक दिन मेरे पापा ने मुझसे कहा- तेरे इम्तिहान हो गए हैं.. जा कुछ दिन अंकल के यहाँ घूम आ..
मेरी माँ और पापा को कहीं काम से 7-8 दिन के लिए जाना था।
पहले तो मैंने मना कर दिया लेकिन फिर सोचा कि चलो कुछ बदलाव हो जाएगा.. घर में पड़ा-पड़ा बोर हो जाऊँगा..

उनके कहने पर मैं ग्वालियर चला गया। मैं सुबह 6 बजे घर से निकला.. सिकोहाबाद से पहले आगरा गया.. फिर आगरा से बस से ग्वालियर गया।
मैं 11 बजे ग्वालियर पहुँचा.. अंकल-आंटी दोनों लोग मुझे लेने के लिए बस स्टैंड पर ही आ गए थे।

हम घर चल दिए.. घर पहुँचा तब घर में कोई नहीं था। मैं थक गया था.. सो नहाया.. फिर चाय पी.. बाद में सो गया।

मैं जब शाम को सोकर उठा तो 5 बज चुके थे। तब मुझे अपने कानों में एक प्यारी सी आवाज़ सुनाई दी.. पहले तो मुझे लगा कि कोई पड़ोसी वग़ैरह होगा.. लेकिन जब आंटी मेरे कमरे में आईं और प्यार से मेरे बालों में हाथ फिराती हुई बोलीं- बेटा हाथ-मुँह धो कर आ जाओ.. सब तुम्हारा चाय पर इन्तजार कर रहे हैं।

मैं उठा और 10 मिनट बाद सबके साथ था।

मैं थोड़ा शर्मीले स्वभाव का हूँ। आंटी ने मेरा परिचय अपनी दोनों बेटियों से कराया। बड़ी बेटी रिया.. जो बी.कॉम. सेकण्ड इयर में थी और छोटी बेटी दिया.. जो 12 वीं में थी।
दोनों कमाल की सुंदर थीं.. मेरा मन खिल उठा.. लेकिन अपने शर्मीले स्वभाव के वजह से मैं उनसे ज़्यादा कुछ बोल नहीं पाया।
छोटी बेटी ने तो ‘भैया-भैया’ बोल कर मेरा दिमाग़ खराब कर दिया था.. लेकिन वो बहुत क्यूट थी।

अगले दिन सुबह की बात है.. बड़ी बेटी रिया कॉलेज जा रही थी.. वो प्रेस्टीज कॉलेज मे थी.. उसकी स्कूटी स्टार्ट नहीं हो रही थी.. और वो कुछ जल्दी में थी।

वो अन्दर गई और अपने पापा से कुछ कहा तो अंकल ने मुझे बुलाकर कहा- बेटा मुझे तैयार होने में देर हो जाएगी.. तुम रिया को कॉलेज छोड़ आओ।

पांच मिनट बाद मैं बाहर आया.. बाइक निकाली और चल दिया।
रिया शायद हमेशा दोनों तरफ पैर करके बैठती थी.. इसलिए मुझे कुछ असहज सा महसूस हुआ।

मैंने रिया को एक तरफ पैर करके बैठने को कहा.. तो वो बैठ तो गई.. लेकिन कुछ लड़कियों की आदत होती है.. कसकर पकड़कर बैठने की..
जैसे-तैसे मैं उसे छोड़ कर वापस आ गया.. हमारे बीच में उस समय थोड़ी बहुत बात ही हो पाई थी।

शाम को वो आई तो बहुत खुश थी और आते ही मुझे ‘थैंक यू’ बोली और कहा कि शाम को वो मुझे घुमाने ले जाएगी।

शाम को बाइक पर बातों-बातों में रिया से मैंने उससे ब्वॉयफ्रेण्ड के बारे में पूछा.. तो उसने कहा- नहीं है।

फिर हम थोड़ा खुल कर बातें करने लगे.. अचानक मेरी बाइक के सामने एक स्कूटर गलत तरफ से आ गया और इस चक्कर में बैलेंस बिगड़ गया और रिया गिर गई।

मैंने उसे ‘सॉरी’ कहा.. तब वो बाद में दोनों तरफ पैर करके बैठ गई। उसके मम्मे बार-बार मेरी पीठ पर लग रहे थे.. मेरे लवड़े की हालत खराब हो रही थी।

बाद में वापस घर पहुँच कर हम सबने खाना खाया और फिर हम कैरम खेलने बैठ गए।
वो बार-बार मेरे पैर में अपना पैर मार रही थी.. थोड़ी देर बार रिया और दिया मेरे साथ छत पर टहलने गए।
तभी दिया किसी काम से नीचे आई तो रिया ने मुझे चुम्बन कर लिया..

मैं रोमांचित हो उठा.. फिर मैं अपने आपको रोक नहीं पाया और हम चूमा-चाटी करने लगे और ये भी भूल गए कि दिया भी आ सकती है।

तभी दिया आ गई.. उसने ये देखा तो रिया से बोली- ये ग़लत है..।
तो रिया ने उसे हड़का कर समझा दिया और कहा- तेरा चक्कर पड़ोस के लड़के से चल रहा है.. मुझे पता है।
फिर दिया चुप हो गई और बोली- इट्स ओके.. लेकिन ‘जो’ भी होगा.. मेरे सामने करना होगा।

हम फिर नीचे आ गए..

अगले दिन अंकल बाहर चले गए और आंटी अपनी किटी पार्टी में जाने लगीं।
आंटी दिया से बोलीं- मैं 11 बजे रात तक आऊँगी.. ध्यान रखना।
हम सब खुश हो गए थे।

रिया ने तभी अन्दर जाकर अपनी माँ की नाईटी पहन ली.. जो बिल्कुल पारदर्शी थी और उसने अन्दर ब्रा-पैन्टी के सिवा कुछ पहना भी नहीं था…

शायद रिया पिछले दिन कुछ ज़्यादा ही उत्तेजित हो गई थी। वो मेरे कमरे में आते ही मुझ पर टूट पड़ी। मुझे बेतहाशा चुम्बन करने लगी.. मैं भी सब कुछ भूल कर उसके होंठों का रस पान करने में लग गया।

मैंने जल्दीबाजी में उसकी ब्रा भी फाड़ दी.. हम पहले चूमा-चाटी करते रहे.. फिर रिया बोली- अब किस ही करोगे.. या कुछ और भी करोगे?
मैं इस खेल में नया था.. तो उसी ने पहल की और मेरा लण्ड पकड़ कर चूसने लगी।
मैं उत्तेजित हो गया और उसके मुँह में ही झड़ गया, फिर मैंने उसे बाँहों में भर लिया और बिस्तर आ गया।

उसने अपनी पैन्टी उतार कर फेंक दी.. उसे बिल्कुल नंगी देखकर मैं बौरा सा गया था।
रिया बोली- तुम्हारा बहुत बड़ा है.. मेरी जरा सी में.. इतना बड़ा कैसे जाएगा।

मैंने तेल की शीशी उठाई और उसकी चूत पर तेल लगा दिया।

उसकी चूत कमाल की थी.. वो एकदम गोरी.. मोम की तरह मुलायम.. मैं तो उसकी चूत के गुलाबीपन पर पागल ही हो गया था.. पहले हम चूमा-चाटी करते रहे.. फिर उसकी चूत पर मैंने अपना लण्ड रख दिया.. धक्का मारा तो पहली बार वो फिसल गया।

फिर मैंने उससे कहा- जरा इसको पकड़ कर अपनी चूत के मुँह पर रखो..
उसने मेरा लवड़ा पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर टिका लिया।
मैंने जैसे ही धक्का मारा.. मेरा लण्ड 2 इंच उसकी चूत में घुस गया.. वो सिहर उठी और चीख पड़ी।

मैंने झट से उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए.. दो मिनट रुककर मैंने फिर से एक ज़ोर से झटका मारा.. तो उसकी आँखों से आँसू निकल आए… वो रोने लगी और उसकी चूत से खून भी निकल आया।

मैंने उसे सहलाया और प्यार किया। कुछ मिनट बाद वो कुछ जरा नॉर्मल हुई.. फिर उसे मज़ा आने लगा।
अब वो खुल कर चुद रही थी.. मैं उसके आमों को खूब चूस रहा था।

कुछ ही मिनट के बाद वो झड़ गई और मैं उसे धकापेल चोदता रहा.. करीब दस मिनट बाद मैं भी उसकी चूत में झड़ गया।
हमने 12 बजे तक 3 बार चुदाई की… मज़ा आ गया।

मैं जब तक वहाँ रहा.. मौका मिलते ही उसकी लेता रहा.. अब भी मैं जब ग्वालियर जाता हूँ.. तो हम मज़े करते हैं।
बस एक ही मलाल रहा कि दिया की नहीं ले पाया।

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