पहला सेक्स का अनुभव ५

मुझे शरम भी आ रही थी. एक एक कर जब सारा बटन खोल डाला तो चाचा ने लंड को नीचे से तुनका कर पूछा, “खुला?” “जी चाचा,” चाचा अब एंजाय कर रहे थे,बोले, “सामने से कपड़ा हटाओ,” रूम में एक मोमबत्ती जल रही थी, इसलिय लाइट कम था इसलिय आपने कड़े नोकिले चुचीॉ को चाचा के सामने करने का हिम्मत भी हुवा. शर्ट के दोनो पल्लो को सामने से दरवाज़े की तरह खोला.
इतना तो लाइट था के नज़र तो आही रहा था लेकिन चाचा मस्ती लेने के लिए बोले, “खोलो ना रानी,” मैं भी चुचि पर हाथ रखवाने को बेठाब थी. चाचा को देख कर बोली,,”खुला तो है चाचा नापो ना” चाचा दोनो हथेलिओ को फैला कर बगली (आर्म पीट)मे डाला और ढेरे ढेरे साइड से चुचीॉ पर ले पहले तो हर तरफ का जयजा लिया फिर हौले हौले पंपिंग कर बोले, “ऐसे पता नही चलेगा पूरा उतरो.”
चाचा अब मुझे पूरा नंगा करने का जुगार लगा रहे थे. उन्होने आपने हाथो से शर्ट उतार दिया और मिनी स्कर्ट के हुक पर हाथ लाकर बोले, “इसे भी अलग कर देता हू ताकि एक ही साथ पेंटी का भी नाप ले लूँगा.” और हुक खोल कर उपर से निकल दिया. मैं बोली, “चाचा पूरा क्यू खोल दिया? मुझे नंगा क्यू कर रहे है?”
चाचा पूरा बदन पर हाथ फेर कर जयजा किया फिर बोले, “नीता रानी अंधेरा मे कुछ पता नही चलता है,” मुझे आपनी गोद से उतार कर बोले, “ज़रा जा कर बल्ब का स्विच तो दे दो.” मैं उतना नही चाहती थी आधे मन से स्विच के तरफ चल पारी जो सामने दूसरे दीवाल पर था.
जैसे ही स्विच ऑन हुवा पूरा कमरा चमक उठा मेरी आँखे चौंधिया गई. तज़ूब भी हुवा के पहले तो इतना वॉट का बल्ब नही था. मैं समझ गयी ओह तो ये चाचा की चाल थी. चाचा ने 20 वॉट का बल्ब हटा कर बड़ा साइज़ का कफ्ल लगा दिया था जिसकी लाइट तुबेलीघत जैसी थी.
मई पूरा नंगी थी, इसलिए तुबेलीघत जलते ही कमरे मे बहुत रोशनी हो गयी, मेरे को बहुत शरम आई. चाचा मेरे नंगे बदन को देख कर मज़ा ले रहे थे. मैं तो जैसे लाज़ शरम से मारी जा रही थी. मैं चाचा की तरफ पलटी और आपना एक हतह आपनी चुत पर रख कर उसको चुपा लिया और दूसरा हाथ से आपनी दोनो चूचीोन को धक लिया और चाचा से बोली, “ है चाचा बाजुट शरम आ रही है, मैं लाज़ से मार जाऊंगी, यह लाइट बंद करने दो ना.” चाचा मेरी चूचीॉ को देख कर मस्त नोट हुए बोले “ अरे नीता बिटिया रानी, इसमे शरम की क्या बात है. मैने तो तुम्हे आपनी गोद मे खिलाया है. मैने तो बचपन मे हज़ारों ही बार तुम्हे नंगा देखा है. मेरे लिए तो तुम आज़ भी मेरी वही प्यारी सी बेटी हो. बाकी रही नंगा होने मे शरम आने की बात , तो लो मैं भी नंगा हो जाता हूँ. हम दोनो बराबर होन्गे तो कोई भी लाज़ शरम की बात ही नही है.”
यह कह कर चाचा ने आपनी कमर मे लिपटा हुआ गमछा उतार कर एक साइड मे फेंक दिया और खुद भी बिल्कुल नंगे हो गये. चाचा का लंबा और मोटा सा लंड बिल्कुल उपर चाट की तरफ मूह उठाई हुए खड़ा था. चाचा मेरी नंगी जवानी देख कर बहुत मस्त थे. उनका लंड ऐसे उपर नीचे हो रहा था , जैसे परदे करते हुए फ़ौजी के हाथ , लेफ्ट रिघ्त करते हुए उपर नीचे हो रहे हू. उनका लंड पूरा आकड़ा हुआ था, जिसे देख कर मैं मस्त हो रही थी.
चाचा मुझे बोले, “ बेटी देखो अब हम बराबर हैं, तुम आपने दोनो हाथ आपनी साइड मे कर लो. “ मैं तो जैसे लाज़ से मरने ही वाली थी. मैने चाचा के कहे मुताबिक आपने हाथ साइड मे किए , जिस से मेरी चूची और मेरी चुत बिल्कुल नंगी हो गयी. मेरी नंगी चुत को देखते ही चाचा के लंड ने एक ज़ोर का जटका खाया. मैं बोली “ है चाचा मुझे बहुत दर लग रहा है.” और मैं दोध कर चाचा से लिपट गयी, ताकि चाचा को मेरी नंगी बॉडी दिखाई ना दे. चाचा ने प्यार से आपने सीने मे छुपा हुआ मेरा मूह उपर उठाया और मेरे होठों को प्यार से चूम कर बोले “ नीता बेटी तुम बेकार मे ही डराती हो. इस मे डरने की क्या बात है. लो मैं अभी तुम्हारा दर दूर कराता हूँ.” यह कह कर चाचा ने मेरा हाथ पाकर कर आपने लंड पर रख दिया और मेरे को आपना लंड पकड़ा दिया. मैने जिंदगी मे पहली बार एक लंड को पकड़ा था और वो भी एक जवान और खड़ा हुआ लंड . मैने “ उई मा” कह कर एक दम लंड पर से हाथ हटा लिया. चाचा ने फिर प्यार से दुबारा मेरा हाथ पाकर कर आपने लंड पे रख दिया. इस बार मेरे को दर नही लगा , बल्कि मेरे को लंड का सपर्श अजीब सा मस्ती फारा लगा. मैने आपने हाथ की उंगलियाँ लंड पर लप्पेट दी और लंड को पाकर कर धीरे धीरे सहलाने लगी.
चाचा ने भी आपने हाथ मेरी चुत पर रख दिया और मेरी चुत को आपने मुति मे भर कर मसलने लगे. मैं तो जैसे स्वराग मे थी. मैं उंजने मे ही लंड को सहलाने लगी. चाचा के लंड का सुपरा , उनकी चमरी से धक्का था. मैं जब हाथ को पीछे की टाराग ले जाती , तो लंड का सुपरा , आपने खोल मे से ऐसे बाहर आ जाता. और फिर जब मैं हाथ को आयेज की टाराग लाती तो लंड का सुपरा फिट धक जाता. जैसे की कोई चूहा आपने बिल मे से गार्डेन बाहर निकलता हो पर फिर बिल्ली को देख कर अंदर घुस जाता हो. मुझे यह एकहनेल की तरह लग रहा था, और मैं लंड पर हाथ को आयेज पीछे कर उसे सहलाती हुई, यह देख रही थी.
चाचा मुझे आपने आप लंड को सहलाते देख कर बहुत खुश हो रहे थे. हू एक हाथ से मेरी चुत और दूसरे हाथ से मेरी चूची मसलते हुए बोले, “ नीता बेटी , अब कैसा लग रहा है. दर तो नही लग रहा? और लंड का टच कैसा है. क्या तुम्हे पसंद आया?. “
मैने लाज़ से आपना मूह चाचा की च्चती मे चुपा लिया और कुच्छ ना बोली, पर मैने आपना हाथ से चाचा का लंड पाकरे रखहा और उसे सहलाती रही. चाचा ने फिर दुबारा से आपने क्वेस्चन पूछा. मैं धीरे से आपना मूह चाचा के कान के पास ले गयी , और हल्की से आवाज़ मे शरमाते हुए कान मे बोली “ चाचा अब कोई दर नही लग रहा. आपका यह बहुत अच्छा है.” चाचा खुश हो कर बोले “ अच्छा है तो क्या मतलब , तुम्हे पसंद तो है ना?. “
मई फिर उसी तरह उनके कान मे शरमाते हुए बोली “ है चाचा आप ऐसे क्वेस्चन्स क्यों पूच रहे हो? मुझे आप का यह बहुत पसंद आया है.”
चाचा एक दम खुश हो गये और मुझे आपने से ज़ोर से कस कर लिपटा लिया.चाचा ने मुझे ज़ोर से भीच लिया और चूमने लगे. मेरा तो जैसे दूं घुटने लगा मगर बदन से चिंगारी छूटने लगी. फिर चाचा ने मेरा चुचि मुँह में ले लिया और चूसने लगे. कभी चुचि चूस्ते कभी दबाते. फिर हाथ पीछे ले जा कर मेरी चूतड़ दबाते.
थोड़ी देर तक चाचा इसी तरहा मज़ा लेते रहे. फिर उन्होने मुझे आपनी बाँहो से अलग किया ओर बेड पर पैर लटका कर बैठ गये ओर बोले “ नीता बिटिया , चलो मेरी गोद मे बैठ जयो और हम डन इक दूसरे को तुम्हारे जनमदिन का केक खिलते हैं. मैने एक प्लेट मे कुछ पीसस केक के डाले ओर चाचा के गोद मे बैठेने लगी. चाचा बोले “ बिटिया आपनी दोनो टाँगे मेरी कमर के इधर उधर कर के मेरी गोद मे बैठ जयो. “. मैं चाहती तो थी की इस पोज़ मे बैठों , पर जब मैं चाचा की कमर के दोनो तरफ टाँगे फैले कर बैठी, तो चाचा का मूसल सा लंड , जो खड़ा हो कर उपर चाट की तरफ झाँक रहा था, मेरे पेट मे चुबने लगा. चाचा ने कस कर मुझे आपने साथ भींच लिया पर लंड मेरे कमर मे चब रहा था ओर लंड के आकड़ा होने के कारण मैं चाचा के साथ चिपक नही पाई. चाचा मुझ से बोले “ बिटिया, लगता है , मेरे लंड के खरा होने के कारण , तुम मुझ से चिपक कर गोद मे नही बैठ पावगी. मैं ऐसा कराता हू , की इसे कहीं डाल देता हूँ तो , तुम्हे प्यार से हग करने के लिए जगह बन जाएगी.”.
मैं चाचा की चाल तो समझ रही थी , पर आक्टिंग करते हुए मासूमियत से बोली. “ चाचा कोई जगह तो है नहीं. ये इतना बड़ा और लंबा डंडे जैसा , कहाँ छुपा सकोगे. मेरे को तो लगता है की इस के कारण मैं आपने प्यारे चाचा से हग नही कर पयोंगी.” चाचा भी इसी तरहा आक्टिंग करते हुए मेरे पेट और झंगों पर हाथ फेराते हुए बोले “ नीता मेरी रानी, तुम्हारे नाभी मे इक छेद है पर वो तो इतना छोटा है की मेरी उंगली भी उस मे ना जा पाएगी. मैं क्या करूँ.” फिर चाचा इसी तरहा उणजानपुना शो करते हुए आपना हाथ मेरी चुत पर लाए ओर मेरी चुत के छेद मे उंगली डाल कर बोले. “ बिटिया, यहाँ तुम्हारी चुत मे जगह लगती है. तुम कहो तो मैं आपना लंड तुम्हारी इस चुत मे डाल दूं तो हम प्यार से हग कर सकेंगे.” चाचा की बात सुन कर मेरी चुत के मूह मे तो जैसे पानी ही आ गया. मैं तो इकड़म त्यआर ही थी. पर थोड़ी मासूमियत की आक्टिंग करते हुए बोली “ चाचा देख लो , अगर जगह है तो फिर कोई बात नही है. आप आपना लंड धीरे से मेरी चुत के छेद मे डाल दो और मुझे कस कर प्यार करो . आख़िर आज मेरा 18त जनमदिन है, और मैं आपने प्यारे चाचा को प्यार से केक खिलाना चाहती हूँ.” चाचा मेरी बात सुन कर बहुत ही खुश हो गये . उन्होने मुझे थोड़ा पीछे करके , आपने लंड को पाकर कर , मेरी चुत के छेद पर लगाया और अंदर करने की कोशिश करने लगे.लंड एक तो बहुत मोटा था और फिर आंगल बे प्रॉपर ना था, तो लंड को अंदर जाने मे जिक्कत आई, ओर मेरे मूह से इक हल्की सी दर्द की है निकल गयी.

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