चुदक्कर भाग – ६

करीब ९ बजे रागिनी चली गई। सानिया ने उससे वादा लिया कि वो फ़िर एक बार आयेगी, तब शुक्रवार को आने की बात कही, क्योंकि शनि और रविवार को रजिन्दर उसकी मेरे साथ बूकिंग के बाद एक घन्टे में अगले ५ सप्ताह की बूकिंग कर चुका था। मुझे भी रागिनी बहुत अच्छी लगी थी। जाते-जाते वो मुझे कह गई-“अंकल आपको जब मन हो फ़ोन कर दीजिएगा, सुरी सर वाले दिन छोड़ कर, चली आऊँगी, अब आपके साथ पैसे ले कर नहीं करुँगी, आपने सच मुझे बहुत इज्ज्त और प्यार दिया, थैंक्यु”। उसके जाने के बाद मैं और सानिया ने अगले एक घन्टे में घर साफ़ किया और फ़िर कपड़े वाशिंग मशीन में डालने के बाद सानिया मेरे पास आई और बोली-“चाचु, एक बार और कीजिएगा, अब दर्द बिल्कुल ठीक हो गया है”।
सुबह साढ़े छः के करीब सानिया पहली बार चुदी और अभी साढ़े दस बजे वो दुसरी बार चुदाने को तैयार थी। मेरे लिए तो सानिया का जिस्म दुनिया का सबसे बड़ा नशा था सालों से, कैसे मना करता। तुरंत ही अपना कपड़ा खोल दिया और बोला-“आओ”।
सानिया आई और घुटनो पर बैठ गई। मैं समझ गया कि अब वो होगा जो मैंने हमेशा सपने में होने की उम्मीद करता था। हाँ, सानिया ने मेरे ढ़ीले लन्ड को पकड़ अपने मुँह में डाल लिया था और उस पर अपना जीभ चला रही थी। अचानक वो बोली-“चाचु, अब आपका बुढ़ा होने लगा हैं; देखिए आपका कई बाल सफ़ेद हो गया है।” वो मेरे झाँट के बारे में बात कर रही थी। उसे इस प्रकार बात करते देख अच्छा लगा कि अब ज्यादा मजा आयेगा पहली बार तो कुछ खास बात चीत हुई ना थी। मैंने उसे थोड़ा एनकरेज किया-“अभी बुढ़ा न कहो इसको। बारह घन्टे में दो जवान लौन्डिया चोदा है मेरा पट्ठा। एक की तो सील तोड़ी है। मर्द तो साठ साल में पट्ठा होता है – साठा तब पाठा – सुना नहीं क्या? अभी पाँच मिनट रुको, पता चलेगा जब तेरी बूर की बीन बजाएगा ये काला नाग।” उसने अपनी आँख गोल-गोल नचाई-“हूँ, ऐसा क्या?”।
सच उसकी यह अदा लाजवाब है। वो चुस-चुस कर मेरे लन्ड को कड़ा कर रही थी और काफ़ी अच्छा चुस रही थी। मैंने कहा-“अभी थोड़ा और चुसो आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह, सानिया तुम तो सब बहुत जल्दी सीख गई”। उसने नजर मिला कर कहा-“मेरा प्यारा चाचु सिखाए और मैं ना सीखू, ऐसा कैसे होगा?” मैं-“आय हाय, बड़ी मस्त लौन्डिया हो रे तुम चाचा की भतीजी”। उसने मुझसे हँसते हुए पूछा-“मैं लौन्डिया हूँ?” मैंने जवाब दिया-“हाँ तुम लौन्डिया हो लौन्डिया, मेरी लौन्डिया, मेरी लौन्डी हो।” वो बोली-“अच्छा और क्या हूँ मैं?” और मेरे लन्ड को हल्के हल्के चुसती जा रही थी। मै मस्ती की मूड में आ गया-“दिखने में तो तुम माल हो माल, वो भी टौप क्लास का। आआआअह्ह्ह्ह्ह, मक्खन हो साली तुम। खिलती हुई गुलाब की कली हो जान। वाह बहुत अच्छा चुस रही हो, इइइइस्स्स्स्स,मजा आ रहा है। और चुस मेरी लौन्डी। कैसा लग रहा है, जरा बता ना साली। थोड़ा खेल भी हाथ में ले कर।”
सानिया ने लन्ड को अब हाथ से सहलाना शुरु किया, “बहुत बढ़ीया है आपका लवड़ा।” मैंने सुधारा-“लवड़ा नहीं लौंड़ा बोल इसे। चुदाते समय रन्डियों की तरह बोलना सीख”। वो मचल कर बोली-“तो सिखाओ ना कैसी रन्डी बोलती है, मुझे थोड़े न पता है। मैं तो सीधी-साधी लड़की हूँ, अम्मी-अब्बू ने इतने प्यार से पाला और अब आप मुझे ये सब कह रहे हो, कैसे होगा?” मैं बोला-“तुझे लड़की कौन बेवकुफ़ कहेगा। मैंने बताया न, तुम माल हो वो भी एक दम टंच माल। एक चुदाई के बाद जैसे लन्ड खा रही है, लगता है कि अम्मी-अब्बू के घर जाने तक तू पुरी रन्डी बन जाएगी।” सानिया मेरी बात सुन कर बोली-“हाँ चाचु, मुझे सब सीखना है, जल्दी-जल्दी सीखाओ न अब, एक सप्ताह तो तुम बर्बाद कर दिए मेरा उदघाटन करने में। वो भी हुआ तब, जब मैं कौलगर्ल लाने को बोली, वर्ना तुम तो मुझे ऐसे ही अपने घर से विदा कर देते। मैं जब आई थी तब से यह सब सोच कर आयी थी। शुरु से तुमको लाईन दे रही थी और तुम साधु बने हुए थे।
पहले दिन से ही मैंने तुम्हारे बाथरुम में अपना अन्डरगार्मेन्ट छोड़ना शुरु किया पर तुम थे कि आगे बढ़ ही नहीं रहे थे।” मैं सब सुना और कहा-“हाँ बेटा, तुम सही कह रही हो। असल में मुझ लग रहा था कि थोड़ी-बहुत छेड़-छाड़ तो ठीक है, पर शायद तुम सेक्स के लिए ना कह दोगी तो मुझे बहुत शर्म आयेगी फ़िर तुमसे। यही सब सोच मैं आगे नहीं बढ़ रहा था। पर मैंने भी धीरे-धीरे ही सही पर तुम्हारी तरफ़ आगे बढ़ रहा था ये तो मानोगी। और पता है, रोज मास्टरबेट करके तुम्हारी पैन्टी पर अपना लन्ड का रस डाल देता था, तुम्हें पता चला कुछ?” वो मुस्कुराई-“सब पता है, सुखने पर भी थोड़ा तो अलग लगता है। अब ऐसे अपना क्रीम मत फ़ेंकना, मैं हूँ ना, सब खा जाऊँगी। कहीं पढ़ा है कि, मर्द के उस रस में बहुत पौष्टिक मैटेरीयल होता है।” मेरा लन्ड अब जैसे माल निकालने की स्थिति में आ गया था। मैंने समय लेने के लिए कहा-“अब बात बन्द कर और चल बिस्तर पर लेट। तेरे चूत का स्वाद लेना है अब मुझे।”
वो झट उठी और बेड पे लेट गई। मैं भी साथ ही आ गया और तुरंत उसकी चूत पर मुँह भिरा दिया। पुरे दस मिनट तक उसकी चूत को खुब चुभला-चुभला कर चुसा, चबाया। उसकी गीली चूत का नमकीन स्वाद मस्त था। साली खुब मस्त हो कर अपना चूत चटा रही थी। एक बार वो पानी भी छोड़ी, पर थोड़ा सा। इसके बाद वो थोड़ा शान्त हो गई, तब मैंने पुछा-“क्या हाल है? कैसा लगा इस चुतिया चाचा के मुँह का मजा?” बेचारी कुछ बोल न सकी, बस हाँफ़ती रही, और मुझे समझ आ गया की बछिया अब हार चुकी है। मैं एक बार फ़िर साँढ़ बन कर बछिया पर चढ़ गया और सिर्फ़ उसके चेहरा पर नजर गड़ा कर साली की जोरदार चुदाई शुरु कर दी।
अब वो जैसे छोटे पिल्ले केंकीयाते हैं, वैसा आवाज मुँह से निकाल रही थी। आप सब ने ऐसी आवाज की चाईनीज या जपानी लड़की की चुदाई वाली ब्लु-फ़िल्म में सुनी होगी। उसकी चूत से निकलने वाला “राग मस्त-चुदाई” मुझे एक विशेष मजा दे रहा था। थोड़ी देर में मैंने पुछा-“क्या रे अब रोना-चीखना छोड़ और बोल कहाँ निकालूँ अपना वीर्य, अब मेरा छुटेगा।” वो संभली और बोली-“मेरे मुँह में चाचु, मेरे मुँह में।” ये सुन मैंने अपना लन्ड बाहर खींचा और उसके चेहरे की ओर आ गया। उसने अब अपना मुँह मराने के लिए खोला और मैं उसके मुँह में लन्ड घुसा अब उसकी मुँह मारने लगा। मैं अपने किस्मत पर खुश था, मुझे सानिया जैसी हूर चोदने को भगवान ने दे दी थी। १०-१२ बार के बाद मेरे लन्ड ने पहली पिचकारी छोड़ी और फ़िर अगले ५ बड़े झटके में मेरा कम-से-कम एक बड़ा चम्मच वीर्य उसकी मुँह में गिरा। वो बड़े चाव से वो सब माल निगल गई, हाँफ़ रही थी पर शौक से खाई। फ़िर मेरे लौंड़े को चाट-चुस कर साफ़ भी किया। जब वो मेरा लन्ड चाट रही थी, तब मैं भी उसकी ताजा चुदी चूत को चाटा, और उसके नमकीन गीलेपन और कसैले-खट्टेपन से भरी गंध का मजा लिया।
करीब १२ बजे हम दोनों साथ ही नहाए, और नंगे ही बाहर आए तो मैंने कहा कि जल्दी तैयार हो जाओ, आज बाहर हीं लंच लेंगे। वो जल्दी हीं आ गई। उसने एक सफ़ेद स्कर्ट और गोल गले का लाल टौप पहन रखा था, और पोनी टेल में बंधे बाल के साथ वो बहुत सुन्दर दिख रही थी। मैंने आँख मारी और कहा ऐसा जानमारूँ माल बन कर घर से निकलोगी, तो सड़क पर हंगामा हो जायेगा। वो हँस दी, और मैं उसकी मोहक मुस्कान पे फ़िदा हो उसके होठ पर एक हल्का सा चुम्बन जड़ दिया। हम अब एक अच्छे से रेस्ट्राँ में आए, और खाना खाया, फ़िर पास के ही एक मल्टीप्लेक्स में २ बजे के शो में एक अंग्रेजी रोमैंटिक फ़िल्म देखी। तीन शानदार बेडरुम सीन था। हौल में इधर-उधर कई सिस्की सुनाई दे जा रही थी। मैंने सानिया का ध्यान एक जोड़े की तरफ़ किया। एक २१-२२ साल की लड़की नीचे झुक कर शायद अपने बायफ़्रेन्ड का लन्ड चुस रही थी। हम दोनों अब बीच-बीच में उस जोड़े की हरकतों का भी मजा ले रहे थे।
सानिया ने भी मेरे लन्ड को अपने हाथ से मसल मसल कर झाड़ा, और जब मेरा वीर्य उसके हाथों पे फ़ैल गया तब उसने उसके चाट कर अपना हाथ साफ़ किया। फ़िल्म के बाद हम मार्केट गए और वहाँ पर मैंने सानिया के लिए एक सुन्दर सा लाल और हरा का एक कामदार सलवार-सुट खरीदा। तभी सानिया की अम्मी का फ़ोन आ गया कि अभी वो लोग एक सप्ताह और रुकेंगे। सुन कर हम दोनों खुश हो गए। उन्होनें जब सानिया से पूछा की कोई परेशानी तो नहीं, तब सानिया ने मेरी तरफ़ देख कर हँसते हुए कहा कि कोई परेशानी नहीं है, चाचा मेरा बहुत ख्याल रखते हैं, मुझे बहुत प्यार करते हैं। फ़िर भाभी जी मेरे से बात कीं और मुझसे माफ़ी माँगी कि उनके बाहर रहने से सानिया के कारण मुझे परेशानी उठानी पर रही है। मैंने भी कहा कि वो संकोच ना करें, मुझे सानिया से कोई परेशानी नहीं है। बल्कि सानिया की वजह से अब मैं ज्यादा घरेलु हो गया हूँ, शाम में घर आने पर अच्छा लगता है। सानिया हीं मुझे चाय पिलाती है बना कर। भाभी जी संतुष्ट हो गयीं और फ़ोन काट दिया। सानिया बोली-“अम्मी से तो ऐसे कह रहे थे जैसे मैं आपकी बीवी की तरह चाय पिला रही हूँ आपको?” मैंने तपाक जड़ दिया-“और नहीं तो क्या? न सिर्फ़ बीवी की तरह चाय पिलाती हो, अब तो रोज़ बीवी की तरह चुदाती भी हो। कहो तो यह भी कह दूँ तेरी अम्मी से?” सानिया शर्मा गई-“छिः, ये बात कहीं अम्मी से कही जाती है?”
फ़िर हम करीब ८ बजे डिनर ले कर घर लौटने लगे, तब सानिया ने कहा कि वो कभी ब्लु-फ़िल्म नहीं देखी है, इसलिए अगर संभव हो तो मैं उसको एक ब्लु-फ़िल्म दिखा दूँ, वर्ना अपने घर जाने के बाद तो वो ऐसी चीज कभी देख नहीं पाएगी। मेरे लिए यह कौन सी मुश्किल बात थी। मैंने रास्ते से ही ३ डीवीडी अपने एक परिचित दुकानदार से ले ली। सानिया तो उसके कवर को देख कर ही खुश हो रही थी। घर आने पर वो तुरंत ही एक को प्लेयर में डाली और सोफ़े पे बैठ गयी। मैंने रात के कपड़े पहने और फ़िर कौफ़ी बनाने लगा। जब आया तब सानिया तो फ़िल्म देखने में मग्न देखा। सामने टीवी पर एक काली लड़की को दो काले लड़के चोद रहे थे। एक का लन्ड लड़की के मुँह में था, और दुसरे का उसकी चूत में उसकी काली-काली चूत के चारों तरफ़ खुब झाँट थी। आह, ओह खुब हो रहा था।
फ़िर दोनों बारी-बारी से लड़की की झाँट पर झड़े, तब उसकी काली झाँट पर सफ़ेद वीर्य खुब चमक रहा था। झड़ते समय ही मैं रुम में आया था। मैंने एक कौफ़ी मग सानिया को पकड़ाया और फ़िर वहीं सामने सोफ़े पे बैठ गया। अगली फ़िल्म में एक लड़की का इन्टरव्यु हो रहा था। एक से एक गन्दे सवाल कोई पुछ रहा था, और वो भी बेशर्म की तरह बेबाक जवाब दे रही थी। वो लड़की ब्रा-पैन्टी में थी। वो नई थी और तीसरी बार अपनी चुदाई का विडियो बनवा रही थी, इसलिए ब्लु-फ़िल्म निर्माता उसका परिचय करा रहा था। मर्द के आवाज से शुरुआत हुई, लड़की के नाम और उमर पूछा, फ़िर उसने पूछा कि वो कब से सेक्स इन्डस्ट्री में है तब उसने हँस कर कहा करीब एक साल से, पर उसने पिछले महिने से ही विडियो करना शुरु किया, इसके पहले वो नाईट कल्ब में स्ट्रीप-डाँसर थी। जब उससे पूछा गया कि क्या उसके घरवालों को पता है कि वो क्या करती है, तब थोड़ा रुक कर उसने कहा-“दुर्भाग्य से हाँ, दो महीने पहले पता चल गया। जब उसके छोटे भाई ने उसको नाईट क्लब में डाँस करते देखा। मैं जब घर आई तब मम्मी ने बहुत डाँटा, और तब मैंने घर छोड़ दिया और एक दोस्त के पास आ गई। इसके एक महिने के बाद जब ठीक-ठाक पैसे का औफ़र मिला तो मैंने विडियो के लिए सीन करना मंजूर कर लिया। फ़िर अब जब आप अच्छा पे कर रहें हैं तब मैं आज आपके प्रोडक्शन के लिए काम कर रही हूँ।”
तब मर्द की आवाज आई, “हाँ, सो तो है, पर आज तुम्हें तीन मर्द एक साथ चोदेंगे। बहुत जबर्दस्त चुदाई होगी तुम्हारी आज। तीनों प्रोफ़ेशनल हैं, और लड़की को चोद-चोद कर बेदम कर देते हैं। हमारे दर्शकों के लिए तुम चुदवाने को तैयार हो? १९ साल की उमर में तुम शायद उन लोगों के लिए कुछ कम उमर की ही हो, और कम अनुभवी भी।” वो लड़की भी हँस कर बोली-“ठीक है तीन हैं तो कोई बात नहीं, जब पोर्न करना है तो ये सब क्या सोचना”। और अब जब उस मर्द की आवाज आई-“और अगर यह विडियो तुम्हारे घर के लोगों ने देख लिया तब?” वो फ़िर हँसकर बोली-“तब क्या कुछ नहीं, उन्हें भी मजा आए देख कर कोशीश तो यही करुँगी कि मेरी चुदाई देख कर उनको दुसरे किसी की फ़िल्म पंसद न आए और वो बार-बार मेरी विडियो को ही खोज कर देखें।”
फ़िर अवाज आई-“ठीक है फ़िर अब तुम अपने कपड़े खोलो और अपने घर वालों को भी और हमारे दर्शकों को भी अपने नंगे बदन की नुमाईश कराओ, और देखो तुमको चोदने के लिए तीनों मुस्टंडे आ गये हैं। उसने खुब आराम से अपने कपड़े खोले और फ़िर पास आये तीनों मर्दों की तरफ़ बढ़ कर उनके पैन्ट खोल कर उनके लन्डों को बाहर खींच लिया। वो बारी-बारी से उन्हें चुस चुस कर खड़ा कर रही थी। इसके बाद खुब जम कर उन लन्डों द्वारा उस लड़की कि चुदाई हुई, बल्कि उसकी चुची, चूत, चुतड़ और गाल सब पर उसको कई थप्पड़ भी खाने पड़े, पर वो खुब मजे ले कर चुदवायी। थप्पड़ लगने पर चिखती फ़िर तुरंत ही उन मर्दॊं को उकसाने लगती और वो सब खुब जोर से उसको पेलते और फ़िर वो कराह उठती। बड़ी गर्म फ़िल्म थी। मुझ जैसे अनुभवी की नसें गर्म हो गईं तो सानिया साली का क्या हाल हुआ होगा आप सब समझ सकते हैं।
इसके बाद रात को सानिया ने फ़िर मेरे साथ चुदाई का खेल खेला। साली को नयी जवानी आयी थी सो सब्र हीं नहीं था, लगातार चुदा रही थी। दो बार चुदाने के बाद वो सोने की बात कि, फ़िर हम दोनों सो गये। अगली सुबह सानिया नंगी हे उठी और चाय बनाने चली गयी। दोनों एक साथ बेड पर बैठ चाय पीने के बाद कपड़े पहने और फ़िर डेली रुटीन शुरु हुआ। आज मुझे ओफ़िस भी जाना था। शाम को घर आने पर सानिया ने एक अनोखी बात कही।
शाम को घर आने पर सानिया ने एक अनोखी बात कही। रोज की तरह डीनर के बाद हम दोनों तहलने निकल गए और तभी सानिया ने अपने मन की बात की। उसने कहा कि वो एक बार जैसे रागिनी मेरे घर चुदाने आई थी वैसे ही किसी एकदम अनजान आदमी से चुदा कर देखना चाहती है। य्ह सुन मेरा लन्ड एक झटके में खड़ा हो गया। ये साली ढ़्ग से चार दिन नहीं चुदी थी और रन्डी बनने को तैयार थी। मुझे चुप देख वो घबड़ा गयी, बोली-“आप अम्मी-अब्बू से यह बात तो नहीं कहेंगे ना प्लीज।” उसके डरी देख मुझे मजा आया। मैं अब बोला-“अरे नहीं बेटी, तुम डरो मत। यहाँ मेरे घर रह कर जो तुम कर रही हो वो बात तुम्हरे घर पर कोइ नहीं जानेगा।
मैं तुम्हें बेइज्जत नहीं होने दुँगा।” उसको तसल्ली हुई तो फ़िर बोई-“असल में चाचु, जब तक आपके घर हूँ, सब तरह का मजा कर लेना चाहती हूँ, अपने घर तो मुस्लिम क्लचर हैं इसलिए यह सब मजा लेने को नहीं मिलेगा। मैं एक दम अनजान के साथ एक बार सेक्स करना चाहती हूँ कि कैसा फ़ील होता है।” आप कोई उपाय कीजिए न प्लीज। मैंने देखा कि साली एक दम चुदास से बह्र कर बोल रही है तो कहा कि ठीक है देखता हूँ, क्या कर सकता हूँ, पर तुमको ऐसा करके दर नहीं लगेगा? वो बोली,”यही दर तो खतम करने के लिए ऐसे चुदना चाहती हूँ। आपके साथ करने में भी तो डर था, पर अपनी अन्डरवीयर दिखा कर पटा ली ना आपको, अब जब मन होगा आपके साथ तो कर हीं लुँगी। अम्मी-अब्बा को न आप बताएँगे ना मैं।” मैं समझ गया कि अब साली बिना रन्डी बने मानेगी नहीं, तो मैंने सोचा को अब एक बार दलाली मैं भी कर लूँ। सानिया साली जैसी मस्त माल का दलाल बनना भी कम किस्मत की बात नहीं थी।
(Visited 2 times, 1 visits today)