चुदक्कर भाग – १

मैं हूँ बाबू, उम्र ४३ साल, अविवाहित पर सेक्स का मजा लेने में खुब उस्ताद। मेरी इस कहानी में जो लड़की है उसका नाम है – सानिया खान। वो मेरे एक दोस्त प्रोफ़ेसर जमील अहमद खान की बेटी है। सानिया के पिता और मैं दोनों कौलेज के दिनों से दोस्त हैं। उनकी शादी एम०ए० करते समय हीं हो गई। मेरी भाभी यानि उनकी बेगम रिश्ते में मौसेरी बहन थी। खैर मैं तो सानिया के बारे में कहने वाला हूँ उसके माँ-बाप में तो शायद हीं आप-लोगों को रुचि हो। सानिया १८ साल की बी०कौम० फ़र्स्ट ईयर की छात्रा है। बहुत सुन्दर चेहरे की मालकिन है। एक दम गोरी, ५’५” लम्बी, पतली छरहरी काया, लहराती-बलखाती जब वो सामने से चलती तो मेरे दिल में एक हूक सी उठती। मेरे जैसे चूतखोर मर्द के लिए उसका बदन एक पहेली था, कैसी लगेगी बिना कपड़ों के सानिया? तब मैं भूल जाता कि वो मेरे गोद में खेली है, उसके बदन को जवान होते मैने देखा है। उसकी चुची नींबू से छोटे सेव, संतरा, अनार होते देखा है, महसूस किया है। सोच-सोच कर मैंने पचासों बार अपना लंड झाड़ा होगा। पर उसका मुझे चाचा कहना, मुझे रोक देता था कुछ भी करने से। उसके दिल की बात मुझे पता नहीं थी न। वैसे सानिया का चक्कर दो-तीन लड़कों से चला था, घर पर उसे खुब डाँट भी पड़ी थी, पर उन लोगों ने हद पार की थी या नहीं मुझे पता न चल पाया, और जब भी मेरे दोस्त और भाभी जी ने इस बात की चर्चा की, तब उनके भाषा से मुझे कुछ समझ नहीं आया। और एक बार…भगवान की दया से कुछ ऐसा हुआ कि…
हुआ ये कि सानिया के नाना की तबियत खराब होने की खबर आई, और सानिया के अम्मी-अब्बा को उसके ननिहाल मेरठ जाना पड़ा, और सानिया की क्लास चलते रहने की वजह से वो उसको नहीं ले जा सके। उनके घर में नीचे के हिस्से में जो किरायेदार थे वो भी अपने गाँव गए हुए थे, सो सानिया को अकेला वहाँ न छोड़, उन लोगों ने उसको एक सप्ताह मेरे साथ रहने को कहा। असल में ये प्रस्ताव मैंने ही उन लोगों को परेशान देख कर दिया था। वो तुरंत मान गए। मेरे दोस्त ने तब कहा भी कि यार मैं भी यही सोच रहा था पर तुम अकेले रहते हो, लगा कहीं तुम्हें कोई परेशानी ना हो। बात-चीत करते हुए जमील ने हल्की आवाज में बताया कि एक बार पहले भी वो सानिया को अकेले तीन दिन के लिए छोड़े थे तो आने पर किरायेदार से पता चला कि दो दिन लगातार सानिया के साथ कोई लड़का रहा था, जो उसके साथ स्कूल में पढ़ता था, अब कहीं इंजीनियरिंग पढ़ रहा है। वो अपनी परेशानी मुझे बता रहा था और मैं सोच रहा था कि जब सानिया अपने घर पर एक लड़के को माँ-बाप के नहीं रहने पर रख सकती है, तो घर के बाहर तो वो जरूर ही चुदवायी होगी। खैर…, अगले दिन सुबह कोई ७ बजे वो लोग सानिया को मेरे अपार्ट्मेंट पर छोड़े, चाय पिया और मेरठ चले गये। सानिया तब अपने स्लीपिंग ड्रेस में ही थी – एक ढ़ीला सा कैप्री और काला गोल गले का टी-शर्ट। उसको को ९ बजे कौलेज जाना था, दो घंटे के लिए।
मेरी नौकरानी नास्ता बना रही थी, जब सानिया किचेन में जा कर उससे पूछी कि कोई साबुन है या नहीं। असल में अकेले रहने के कारण मेरे रूम के बाथरूम में तो सब था पर दुसरे रूम, जिसमें सानिया का सामान रखा गया था, वह बाथरूम कपड़े धोने के लिए ही इस्तेमाल होता था। मैं ही तब कहा-“सानिया, तुम मेरे रूम का बाथरूम युज कर लो, मुझे अभी समय है”। और सानिया अपना कपड़ा ले कर मुस्कुराते हुए चली गई। मैं बाहर वाले रूम में अखबार पढ़ रहा था, जब सानिया तैयार हो, नास्ता करके आई और बोली-“चाचा, मैं करीब १२ बजे लौटूँगी, तब तो घर बंद रहेगा।” मैंने उसको भींगे बालों से घिरे सुन्दर से चेहरे को देखते हुए कहा- “कोई परेशान होने की बात नहीं है, तुम एक चाभी रख लो”, और मैने नौकरानी से चाभी ले कर उसको दे दी, (मैंने एक चाभी उसको इसलिए दी थी कि वो शाम को आ कर काम कर जाए और मेरा खाना पका जाए) साथ हीं नौकरानी को शाम की छुट्टी कर दी कि शाम को हम लोग होटल में खाना खा लेंगे। थोड़ी देर में नकरानी भी काम निपटा कर चली गई, और मैं तैयार होने बाथरूम में आया। और..
बाथरूम में सानिया की कैप्री और टी-शर्ट खूँटी से टंगी थी, और नीचे गीली जमीन पर सानिया की ब्रा-पैन्टी पड़ी थी। ऐसा लग रहा था कि उसने उन्हें धोया तो है, पर सुखने के लिए डालना भूल गई। मेरे लन्ड में सुरसुरी जगने लगी थी। मैंने उसके अन्तर्वस्त्र उठा लिए और उनका मुआयना शुरु कर दिया। सफ़ेद ब्रा का टैग देखा-लवेबल ३२बी०। सोचिए, ५’५” की सानिया कितनी दुबली-पतली है। मैंने अब उसकी पैन्टी को सीधा फ़ैला दिया। वो एक पुरानी पन्टी थी-रुपा सौफ़्ट्लाईन ३२ साईज। इतनी पुरानी थी कि उसके किनारे पर लगे लेस उघड़ने लगे थे और वो बीच से हल्का-हल्का घिस कर फ़टना शुरु कर चुकी थी। मैंने उसे सूँघा, पर उसमें से साबुन की हीं खुश्बू आई। फ़िर भी मैंने ऐसे तो कई बार उसके नाम की मुठ मारी थी, पर आज उसकी पैन्टी से लन्ड रगड़-रगड़ कर मूठ मरा और अपना माल उसके पैन्टी के घीसे हुए हिस्से पर निकला और फ़िर बिना धोये ही पैन्टी-ब्रा को सुखने के लिए डाल दिया। मेरे दिमाग में अब ख्याल आने लगा कि एक बार कोशिश कर के देख लूँ, शायद सानिया पट जाए। पर मुझे अब देर हो रही थी सो मैं जल्दी-जल्दी तैयार हो कर निकल गया।
शाम को करीब ७ बजे मैं घर आया, सानिया बैठ कर टीवी देख रही थी। उसने ही मुझे चाय बना कर दी। हम दोनों साथ चाय पी रहे थे, जब मैंने कहा-“तैयार हो जाओ, आज बाहर हीं खाना है।” खुशी उसके चेहरे पे झलक गई, और मैं उसके उस सलोने से चेहरे से नजर हटा न पाया। हम लोग इधर-उधर की बात कर रहे थे, तभी उसे ख्याल आया, बोली-“सौरी चाचा, आज आपके बाथरूम में गलती से मेरा कपड़ा रह गया। असल में मेरे जाने के बाद अम्मी जब सारे घर को ठीक करती है, तो वो ये सब भी कर देती है। कल से ऐसा नहीं होगा।” उसके चेहरे पे सारी दुनिया की मासुमियत थी। मैंने भी प्यार से कहा-“अरे, कोई बात नहीं बेटा, मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। तुम तो धो कर गई ही थी, मैंने तो सिर्फ़ सुखने के लिए तार पर डाल दिया।” फ़िर थोड़ी शरारत मन में आई तो कह दिया-“वैसे भी तुम तो खुद १० किलो की हो, तो तुम्हारी ब्रा-पैन्टी तो १० ग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए न। उसको सुखने डालने में कोई मेहनत तो करना नहीं पड़ा मुझे।” उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखो को गोल-गोल नचाया-“पुरे ४१ किलो हूँ मैं”। मैंने तड़ से जड़ दिया-“ठीक है फ़िर तो मैं सुधार कर देता हूँ, फ़िर ४१ ग्राम होगी ब्रा-पैन्टी।” वो मुस्कुरा कर बोली-“मेरा मजाक बना रहें हैं, मैं तैयार होने जा रहीं हूँ।” और वो अपने रूम में चली गई, मैं अपने रूम में।
कोई आधे घन्टे बाद हम घर से निकले। सानिया ने एक गहरे हरे रंग की कैप्री और गुलाबी टौप पहनी थी। बालों को थोड़ा उपर उठा पोनीटेल बनाया था, पैर में बिना मोजा रीबौक के जूते। मैं उसकी खुबसुरती पर मुग्ध था। हम लोग पैदल हीं एक घंटा घुमे और फ़िर करीब ९ बजे एक चाईनीज रेस्ट्रां मेम खाना खा कर १० बजे तक घर आ गए। थोड़ी देर टीवी देखने के बाद अरीब ११ बजे सानिया अपने रूम में और मैं अपने रूम में सोने चले गए। सानिया के बारे में सोचते सोचते बड़ी देर बाद मुझे नींद आई। अगले दिन करीब ६ बजे सानिया ने मुझे जगाया, वो सामने चाय ले कर खड़ी थी। मेरे दिमाग में पहला ख्याल आया कि आज का दिन अच्छा हो गया, उसकी सलोनी सूरत देख। हमने साथ चाय पी। वो तब मेरे बिस्तर पे बैठी थी। उसने एक नाईटी पहनी हुई थी जो उसके घुटने से थोड़ा नीचे तक थी। रेडीमेड होने के कारण थोड़ा लूज थी, और उसके ब्रा के स्टैप्स दिख रहे थे। आज उसे ८.३० बजे निकलना था, सो वो बोली-“आप बाथरूम से हो लीजिए तब मैं भी नहा लूँगी, आज थोड़ा पहले जाना है”। मैं जब बाथरूम से बाहर आया तो देखा कि उसने मेरा बिस्तर ठीक कर दिया है, और अपने कपड़े के साथ मेरे बेड पे बैठी है। जब वो बाथरूम की तरफ़ जाने लगी तब मैंने छेड़ते हुए कहा, आज भी अपना ४१ ग्राम छोड़ देना। वो यह सुन जोर से बोली-छीः, और हल्के से हँसते हुए बाथरूम का दरवाजा लौख कर लिया। मैं बाहर बैठ पेपर पढ़ रहा था, जब वो बोली-“मैं जा रही हूँ चाचु, करीब १ बजे लौटूँगी, मेरा लंच बनवा दीजिएगा, नस्ता मै कैंटीन में कर लूँगी।” मैं उसको पीले टाईट सलवार कुर्ते में जाते देखता रहा, जब तक वो दिखती रही। उसकी सुन्दर सी गांड हल्के हल्के मट्क रही थी।
थोड़ी देर में मेरी नौकरानी मैरी आ गई, और अपना काम करने लगी, मैं भी तैयार होने बाथरूम में आ गाया। मुझे थोड़ा शक था कि आज शायद मुझे ब्रा-पैन्टी ना दिखे, पर मेरी खुशी का ठिकाना न रहा जब मैने देखा कि आज फ़िर उसने अपनी ब्रा-पैन्टी धो कर कल की तरह ही जमीन पर छोड़ दी है। कल शायद उससे गल्ती से छूट गया था, पर आज के लिए मैं पक्का था कि उसने जान-बूझ कर छोड़ा है। मुझे लगने लगा कि ये साली पट सकती है। मैंने आज फ़िर उसकी पैन्टी लंड पे लपेट मूठ मारी और माल उसके पैन्टी में डाल दिया। ये वाली पैन्टी कल वाली से भी पुरानी थी, और उसमें भी दो-एक छोटे छेद थे। पर मुझे मजा आया। मैंने अपने माल से लिपसे पैन्टी को ब्रा के साथ सुखने को डाल दिया। शाम को मुझे आने में थोड़ी देर हो गई, मैरी हम दोनों का खाना बना कर जा चुकी थी। मैं जब आया तो सानिया चाय बनाई और हम दोनों गपसप करते हुए चाय पीने लगे। सानिया ने ही बात छेड़ दी-“आज फ़िर आपको मजा आया मेरी सेवा करके?” मैं समझ न सका तो उसने कहा, “वही ४१ ग्राम, सुबह” और मुस्कुराई। मैंने भी कहा- “हाँ, मजा तो खुब आया, पर सानिया, इतने पुराने कपड़े पहनो, फ़टे कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता”। वो समझ गई, बोली- “ठीक चाचु, आगे से ख्याल रखूँगी।”
मैंने देखा कि बात सही दिशा में है तो आगे कहा-“अच्छा सानिया, थोड़ा अपने पर्सनल लाईफ़ के बारे में बताओ। जमील कह रहा था कि तुम्हारा किसी लड़के के साथ चक्कर था। अगर न बताना चाहो तो मना कर दो।” वो थोड़ी देर चुप रही फ़िर उसने रेहान के बारे में कहा, जो उसके साथ स्कूल में ५ साल पढ़ा था। दोनो अच्छे दोस्त थे। पर ऐसा कुछ नहीं किया कि उसको इतना डाँटा जाए, रेहान तो फ़िर उस डाँट के बाद कभी मिला भी नहीं। अब तो वो उसको अपना पहला क्रश मान ली थी। मैं तब साफ़ पूछ लिया-“क्यों, क्या सेक्स-वेक्स नहीं किया उसके साथ?” वो अपने गोल-गोल आँख घुमा कर बोली-“छीः, क्या मैं आपको इतनी गन्दी लड़की लगती हूँ, रेहान मेरा पहला प्यार था, अब कुछ नहीं है?” मैंने मूड को हलका करने के लिए कहा-“अरे नहीं बेटी तुम और गन्दी, कभी नहीं, हाँ थोड़ी शरारती जरूर हो, बदमाश जो अपनी ब्रा-पैन्टी अपने चाचु से साफ़ करवाती हो।” वो बोली-“गलत चाचु, साफ़ तो खुद करती हूँ, आप तो सिर्फ़ सुखने को डालते हो।” हम दोनों हँसने लगे। फ़िर खाना खा कर टहलने निकल गए। बातों बातों में वो अपने कौलेज के बारे में तरह तरह की बात बता रही थी, और मैं उसके साथ का मजा ले रहा था।
तीसरे दिन भी सुबह सानिया के चेहरे पर नजर डाल कर ही शुरु हुई। उस दिन मैरी थोड़ा सवेरे आ गयी थी, सानिया का नास्ता बना रही थी। मैं भी अपने औफ़िस के काम में थोड़ा बीजी था, कि सानिया तैयार हो कर आई। मैंन घड़ी देखे -८.३०। सानिया बोली- “चाचु आज भी रख दिया है मैंने आपके लिए ४१ ग्राम…. और आज धोई भी नहीं हूँ”, और वो चली गयी। मैंने भी अब जल्दी से फ़ाईल समेटी और तैयार होने चला गया। आज बाथरूम में थोड़ी सेक्सी किस्म की ब्रा-पन्टी थी और उससे बड़ी बात कि आज सानिया ने उसपर पानी भी नहीं डाला था। दोनो एक सेट की थी, गुलाबी लेस की। इतनी मुलायम की दोनों मेरी एक मुठी में बन्द हो जाए। मैंने पैन्टी फ़ैलाई-स्ट्रिन्ग बिकनी स्टाईल की थी। उसके सामने का भाग थोड़ा कम चौड़ा था, करीब ४ इंच और नीचे की तरफ़ पतला होते होते चुत के उपर २ इंच का हो गया था, फ़िर पीछे की तरफ़ थोड़ा चौड़ा हुआ पर ५ इंच का होते होते कमर के इलास्टिक बैंड मे जा मिला। साईड की तरफ़ से पुरा खुला हुआ, बस आधा इंच से भी कम की इलस्टिक। मैंने प्यार से उस गन्दी पैन्टी का मुआयना किया। चुत के पास हल्का सा एक दाग था, जो बड़े गौर से देखने पर पता चलता, मैने उस धब्बे को सुंघा। हल्की सी खट्टेपने की बू मिली और मेरा लन्ड को सुरुर आने लगा। मैने प्यार से उसी धब्बे पर अपना लन्ड भिड़ा, पैन्टी को लन्ड पे लपेट मजे से मूठ मारने लगा, और सारा माल उसी धब्बे पर निकाला, फ़िर उस पैन्टी-और ब्रा को सिर्फ़ पानी से धो कर सुखने डाल दिया।
शाम ७.३० बजे घर आया, साथ चाय पीने बैठे तो मैंने बात छेड़ दी-“आज तो सानिया बेटी, तुमने कमाल कर दिया।” वो कुछ नहीं बोली तो मैंने कह दिया-“बिना धोयी हुई ब्रा-पैन्टी से तुम्हारी खुश्बू आ रही थी।” वो शर्माने लगी, तो मैने कहा-“सच्ची बोल रहा हूँ, मैंने सुँघ कर देखा था। तुम्हारे बाप की उम्र का हूँ, पर आज वाली ४१ ग्राम की खुश्बू ने मेरे दिल में अरमान जगा दिये।” वो थोड़ा अनईजी दिखी, तो मैंने बात थोड़ा बदला, “पर मैंने भी दिल पे काबू कर लिया, तुम परेशान न हो।” वो मुस्कुराई, तब मैंने कहा-“पर आज वाली तो बहुत सेक्सी थी, अब कल क्या दिखाओगी मुझे?” वो मुस्कुराई-“कल ३० ग्राम मिलेगा”। मै-“क्यों?” वो बोली-“क्योंकि आज मैंने नीचे पहनी ही नहीं है। वो दोनो पुरानी वाली पहननी नहीं थी, और ये वाली तो आज धुली है, कल पहनुँगी।”
मैंने कहा-“ऐसे बात है, चल आज ही खरीद कर लाते हैं। मैंने आज तक कभी लेडीज पैन्टी नहीं खरीदी, आज ये भी कर लेते हैं।” वो थोड़ा सकुचाई, तो मैंने उसको हाथ पकड़ कर उठा दिया, बोला जल्दी तैयार हो जाओ। मैं तब जींस और टीशर्ट में था, और वो अपने नाईटी में। वो दो मिनट में चेंज करके आ गई-नीले स्कर्ट और पीले टौप में वो जान-मारू दिख रही थी। उसने आते हुए कहा-“स्कर्ट में सुविधा होगी, एक तो वहीं पहन लूँगी, और एक और ले लूंगी।” बहुत मस्त लौन्डिया थी वो। मेरे जैसे मर्द को खुब टीज करना जानती थी। जब भी मैं ये सोचता कि साली नंगी चुत ले कर बाजार में है, मेरे दिल से एक हूक निकल जाती। हम एक लेडीज अंडरगार्मेंट्स स्टोर में गए। मेरे लिए ये पहला अनुभव था। दो-तीन और लेडीज ग्राहक थीं। हमारे पास एक करीब २८-३० साल की एक सेल्सगर्ल आई, तो मैने, उसे एक ब्र-पैन्टी सेट दिखाने को कहा। क्या साईज, और कोई खास स्टाईल, कहते हुए उसने एक कैटेलग हमें थमा दिया। एक से एक मस्त माल की फ़ोटो थी, तरह तरह की ब्रा-पन्टी में। मैं फ़ोटो देखने में बीजी था, कि सानिया बोली-“सिर्फ़ पैन्टी लेते हैं ना”। मैंने नजर कैटेलग पे ही रखते हुए कहा-“एक इसमें से ले लो, फ़िर दो-तीन पैन्टी ले लेना।” सेल्सगर्ल ने पूछा-“दीदी के लिए लेना है या मैडम के लिए?”, मैंने सानिया की तरफ़ इशारा किया। वो मुस्कुराते हुए बोली-“किस टाईप का दूँ, थोड़ी सेक्सी, हौट या सोबर?” मैंने जब उसे थोड़ा सेक्सी टाईप दिखाने को बोला तो वो मुस्कुराई। वो समझ रही थी कि मैं उस हूर के साथ लंपटगिरी कर रहा हूँ।
उसने कुछ बहुत ही मस्त सेट निकल दिए। एक तो बस सिर्फ़ पैन्टी के नाम पर २”x१” का सफ़ेद पारदर्शी जाली थी ब्रा भी ऐसा कि जितना छुपाती नहीं उतना दिखाती। मुझ वो ही खरीदने का मन हुआ, पर सानिया ने एक दुसरा पसंद किया। जब मैने कहा कि एक वह सेक्सी टाईप ले कर देखे, तो वो बोली, नही पर अगर आपका मन है, तो सिर्फ़ पैन्टी में ऐसा कुछ देख लेंगे, पैसा भी कम लगेगा। सानिया की पसंद की पैन्टी उसकी सेक्सी पैन्टी से थोड़ी और छोटी थी। चुतड़ तो लगभग ९०% बाहर ही रहता, पर चुत ठीक ठाक से कवर हो जाती। उसने उसका चटख लाल रंग पसंद किया। फ़िर उसने हेन्स की स्ट्रींग बिकनी पैन्टी माँगी, तो सेल्सगर्ल ने एक ३ का सेट दिया। अब मैंने उस सेक्सी पैन्टी के बारे में कहा और जोर दे कर एक सफ़ेद और एक काली पैन्टी खरीद ली। सानिया ने हेन्स की एक पैन्टी पैक से निकाली और ट्रायल रूम में चली गई और पहन ली। सामान पैक करते समय सेल्सगर्ल ने सानिया से उसकी पुरानी पैन्टी के बारे में पूछा तो सानिया ने कहा-“इट्स ओके, आई हैडन्ट बीन वीयरिन्ग एनी (सब ठीक है, मैने नहीं पहना हुआ था)। सेल्सगर्ल ने भी चुटकी ली-“आजकल के बच्चे भी ना…, इस तरह बिना चड्ढ़ी बाजार में निकल लेते हैं।” दुकान पर मौजूद तीनों सेल्सगर्ल और मैंने भी हँस दिया, और सानिया झेंप गई।
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