पहला सेक्स का अनुभव ७

मई ज़ोर ज़ोर से चाचा का लंड चूस रही थी और आपना मूह आयेज पीछे कर रही थी. थोड़ी हे देर मे चाचा की सिसकारी तेज हो गयी, और उन्होने मेरा सिर ज़ोर से पाकर लिए और सिसकारी भराते हुए बोले” नीते बिटिया और तेज, और तेज चूसो. बस पानी निकालने ही वाला है.”
मैने चूसना तेज कर दिया . अचानक चाचा का लंड मे सुरसूराहट से होने लगी और उनका लंड और भी कस कर टाइट हो गया. चाचा ने भी कमर हिलनी शुरू कर दी, और अचानक उनके मूह से आनंद भारी छ्चीख निकली “ है रानी बिटिया , मैं एयेए रहा हूँ , और तेज चूसो, और तेज, और तेज, और तेज”. मैने चूसना तेज किया .
अचानक चाचा के लंड ने इक जटका खाया ओर चाचा के मूह से इक सिसकारी निकल गयी “ है नीता , लो मैं गया” और इसी के साथ चाचा के लंड से जैसे वीर्या का फुवरा छ्छूट पड़ा. उनके लंड से वीर्या की पहली धार निकल कर सीधे मेरे गले के नीचे उतार गयी. चाचा का लंड जटके लेता रहा और उनके लंड से वीर्या के फुवरे छ्होट ते रहे. मैं जात से सारा वीर्या पे गयी. लंड के पानी का स्वाद इतना अच्छा था की क्या बताउन. मैं तो लंड को ज़ोर ज़ोर से चूस्टी रही , और लंड का सारा पानी चूस चूस कर पे गयी. धीरे धीरे लंड का तनाव ख़त्म हो गया और वो सिकुड कर छोटा होने लगा.
मैने लंड को आपने मूह से बाहर किया , और उपर चाचा की ओर देखा की चाचा तो आँखें बंद किए, आनंद के सागर मे गोते लगा रहे थे. उनके चेहरे पर वो चमक थी जो मैने आज तक नही देखी थी. मुझे बहुत अच्छा लगा , की मैने आपने चाचा को इतना मज़ा दिया.
थोड़ी देर के बाद चाचा ने आपनी आँखें खोली और मेरे को आपनी बाँहो मे लेकर कस लिया . उनकी आँखें गीले हो गयी थी . वो मुझे प्यार से चूमते हुए बोले “ नीता तुम मेरे जीवन की सब से प्यारी बेटी हो. आज तक मुझे जिंदगी मे इतना मज़ा नही आया. तुम्हारी मा ने भी कभी मेरा लंड आपने मूह मे नही लिया. चूसने की तो बात ही क्या है. आज जिंदगी मे किसी ने पहली बार मेरा लंड चूसा है, और मुझे इतना मज़ा दिया है. मैं तो जैसे तुम्हारा गुलाम हो गया हू. आज के बाद मैं वोही करोंगा जो तुम कहोगी. ई लव यू नीता, ई रियली लव यू.”
मैं गंगना कर चाचा से चिपक गयी, और उनके होठों को चूमते हुए बोली “ चाचा क्यों शर्मिंदा करते हो, आप तो मेरे सब से प्यारे चाचा हो. आप को खुश करना और खुश रखना तो मेरा फ़राज़ है. आआप जब भी कहेंगे, मैं हमेशा आपके लंड की इसी तरहा की सेवा करने को त्यआर हूँ.”
चाचा बहुत खुश हुए और मुझे ज़ोर से आपने साथ चिपका लिया. थोड़ी देर के बाद मैं बोली “ चलो चाचा अब मुझे आपनी गोद मे बिठा लो, ताकि मैं आप को केक खिला सकूँ और आप भी मुझे केक खिला सको. अब आप का लंड तो सिकुड कर छोटा हो गया है , इसलिए उस से हमें कोई दिक्कत ना होगी, और मैं आराम से आपके गोद मे बैठ सकती हूँ.”
चाचा मुझे चूमते हुए बोले “ अरे पगली, यह लंड है. जब इसे पास मे तुम्हारी चुत की खुश्बू आएगी तो यह झट से फिर खड़ा हो जाएगा. मुझे अल्टिमेट्ली तो आपना लंड तुम्हारी चुत के छेद मे डालना ही पड़ेगा, तभी तुम मेरी गोद मे बैठ कर केक खा सकोगी. इसलिए आयो मैं तुम्हारी चुत को आपने मूह से थोड़ा चूस कर गीला कर ही देता हूँ, ताकि तुम्हे दिक्कत ना हो.”
मान तो मेरा भी बहुत कर रहा था, पर ऐसे ही थोड़ा नखरा और आक्टिंग कर रही थी. चाचा तो मेरे मूह मे आपना पानी निकल कर मज़ा ले भी लिए थे, पर मैं तो वासना की आग मे जैल जा रही थी. इसलिए चाचा की बात को झट से पकड़ते हुए बोली” आप तीएक कह रहे हैं चाचा. बताइए आप मेरी चुत को आपने मूह से कैसे गीला करेंगे”.
चाचा ने कहा “ नीता बिटिया , आओ और मेरी गोद मे बैठने के लिए आओ. “ मैं चाचा के गोद मे उनके मूह की ओर से खड़ी हुई. मैं बैठने वाली ही थी की चाचा ने मुझे खड़ा ही रहने को कहा. अब मैं चाचा के मूह के सामने खड़ी थी. मेरी दोनो टाँगे चाचा के कमर के दोनो तरफ थी. मेरा मूह चाचा की ओर था , और इस तरहा खड़े होने से मेरी चुत सीधी चाचा के मूह के सामने आ गयी. चाचा ने मेरे दोनो हाथ आपने कंधों पर रख कर मुझे झुक जाने को कहा. अब हालत यह थी की मेरी चुत बिल्कुल चाचा के मूह के सामने थी. चाचा बेड पर बैठे थे और मैं चाचा की आयेज खड़ी थी. चाचा ने केक का एक टुकड़ा निकाल कर मेरी चुत के उपर चुपर दिया . मेरी चुत मे केक के करीम की ठंडी लगने से सिहरन जैसे हुई. मेरी चुत केक से पूरी वाइट हो गयी थी. चाचा ने आपनी जीब थोड़ी से बाहर निकली, और मेरी चुत को दोनो हाथों से थोड़ा खोल कर , चुत की फांकोन के बीच लगाया. चुत के अंदर चाचा की जीब का स्पर्श होते हे जैसे मेरे पुर बदन मे बिजली की एक लेहायर दौड़ने लगी. यह एक अजीब सा एहसास था. मेरी चुत मे आज पहली बार किसी ने जीब से टच किया था. मैं तो आनंद से पूरा गंज्ना गयी. चाचा ने पूरी जीब बाहर निकल कर मेरी चुत के अंदर फेरना शुरू कर दिया, साथ ही चाचा केक भी खाते / चाट ते जा रहे थे. चाचा ने दोनो हाथों से मेरी चुत का मूह खोल दिया , जिस से मेरी चुत का अंदर का लाल लाल हिस्सा सॉफ नज़र आने लगा. मेरी चुत से ताप ताप मदन रस ( चुत का अमृत) तपाक रहा था, जिसे चाचा चाट चेट की आवाज़ के साथ चाट रहे थे. माझे की अधिकता से मेरी आँखें बंद होने लगी. ऐसा लग रहा था की जैसे मैं आपने रूम मे नही बल्कि स्वराग मे खड़ी हूँ. शायद स्वराग मे भी इतना मज़ा नही होगा जितना इस टाइम मुझे मिल रहा था. चाचा ज़ोर ज़ोर से मेरी चुत को चाट रहे थे , और मेरी चुत से बहता हुआ मदन रस पे रहे थे.
चाचा ने चुत को चूस्टे चूस्टे , आपनी जीभ को गोल किया और मेरी चुत के चीड़ के उंड़दर डाल दिया. मैं तो मज़ेह के मारे उच्छल ही पड़ी. चाचा के जीभ मेरी चुत मे गुस गयी थी, और चाचा आपने मूह को अंदर बाहर कर रहे थे , जिस से मेरी चुत मे जीब अंदर बाहर हो रही थी. चाचा मुझे जीभ से ही चोद रहे थे. यह एक ऐसा माझा था की जिसे मैं बयान नही कर सकती.
मैने दोनो हाथों से चाचा का सर कस कर पकड़ लिए, और चाचा का सिर को आपनी चुत की तरफ खींचने लगी जिस से मेरी चुत मे खूब अंदर तक चाचा की जीभ जा सके. चाचा को साँस लेने मे दिक्कत हो रही थी, पर वो उंसकी परवाह ना कर के ज़ोर ज़ोर से मेरी चुत चूस रहे थे और जीभ से चोद रहे थे. मेरे मूह से आन्नंद भारी आह आह आह निकल रही थी. मुझे इतना मज़ा आ रहा था की मैं बयान नही कर सकती. अचानक चाचा ने मेरी चुत मे से जीभ बाहर निकली और मेरे चुत के दाने ( क्लिट) को आपने होठों मे ले लिया और चुत के दाने को चूसने लगे.
“ है चाचा मार गयी.” मेरे मूह से निकल पड़ा. कूट के दाने को चूसने मे तो इतना माझा था की चुत की जीभ से चुदाई और चुत की चूसैई भी उंसके सामने कुछ ना थी. मेरी तो जैसे शेयरर की जान ही निकल गयी, ऐसा लग रहा था की माझे की अधिकता से मैं तो मार ही जाऊंगी.
मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे मेरी चुत से कुछ निकल ना चाहता है. मेरा ऑर्गॅज़म पास आ रहा था. मैने जिंदगी मे कभी , ऑर्गॅज़म का अनुभव नही लिया था तो समाज नही आ रहा था की मुझे क्या हो रहा है. मैं चाचा से बोली “ है चाचा बहुत मज़ा आ रहा है, मैं मार जौऊनगी. मुझे छोड़ दो. मेरी चुत से कुछ निकालने वाला है. है चाचा शायद मुझे पेशाब आ रहा है, मुझे छोड़ दो वरना आपके मूह पर ही पेशाब निकल जाएगा.” चाचा तो पुर अनुभवी खिलादे थे वो समाज गये की मेरा पानी छूटने वाला है. चाचा ने चुत के दाने की चूसा और भी तेज कर दी.
अच्चानक मुझे लगा की जैसे मेरे अंदर से कोई , तूफान सारे बंधन तोड़ कर निकल रहा हो. “ है चाचा , मैं मार गयी. मुझे कुछ हो रहा है.” यह कह कर मैं इक दम से चाचा के सर को ज़ोर से कस लिया और मेरी चुत ने जिंदगी मे पहली बार पानी चोद दिया. मेरा ऑर्गॅज़म इतना तेज था की मेरे शरीर से जैसे जान ही निकल गयी. मुझे खड़ा रहना मुश्किल हो गया. मैने दोनो हाथ चाचा के कंधे पर रख कर आपने शरीर को संभाला. मेरी चुत से मदन रस निकल रहा था , जिसे चाचा ज़ोर ज़ोर से चाट रहे थे, और मैं मस्ती के सागर मे हिलोरे ले रही थी.
थोड़ी देर के बाद मेरा मज़ा कुछ कन हुआ , तो मैने आपनी आँखें खोली. और प्यार से चाचा के और देखा. चाचा मेरी नज़रों मे नज़रें डाल के मुझे देख रहे थे और मुस्कुराते हुए बोले” नीत बेटा ! कैसा लगा. कुछ मज़ा भी आया के नहीं,” मैं शर्मा गयी और झट से चाचा के गोद मे बैठ कर आपना सर चाचा के सीने मे छुपा लिया. चाचा ने प्यार से मेरा चेहरा उपर को उठाया और मेरे होठ चूम कर बोले “ क्या बात है जवाब नही दिया. अच्छा नही लगा क्या. वैसे बेटी तेरा चुत रस तो मुझे बहुत ही स्वादिष्ट लगा. मुझे तो बहुत अच्छा लगा. तू आपनी तो बता?”. मैं चाचा से कस कर लिपट गयी और शरमाते हुए चाचा के कान के पास आपना मूह ले जा कर बोली “ है चाचा आपने तो आज मुझे मार ही दिया था. इतना मज़ा तो मुझे जिंदगी मे कभी नही आया. मुझे इतना अच्छा लग रहा था की मैं बयान नही कर सकती. थॅंक यू सो मच चाचा.”
चाचा कुश हो गये और बोले “ चल अब केक खाते है.” मैं केक की प्लेट की तरफ हाथ बदाया तो चाचा बोले. “ बेटी मैने पहले ही बताया था की गोद मे बैतोगी तो लंड तुम्हारे पेट मे लगता है, इस लिए पहले लंड को आपनी चुत के अंदर थोड़ा गुस्वा लो ताकि तुम मुझसे आराम से चिपक सको.”
मई बोली “ चाचा आप का लंड तो पानी चोदने के बाद , सिकुड कर छोटा सा हो गया था. अब वो हमारे हग करने मे क्या दिक्कत देगा.” चाचा ने मेरा हाथ पाकर कर आपने लंड पर रख दिया, तो मैं यह देख कर हैरान हो गयी की चाचा का लंड तो पहले की तरह अकड़ कर खड़ा था, और पहले से भी ज़्यादा टाइट था. चाचा मुझे चूमते हुए बोले “ बेटी, तुम्हारी चुत चूस्टे चूस्टे, मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया है. चलो अब मैं इसे तुम्हारी चुत मे गुसा देता हू ताकि तुम मेरे गोद मे आराम से मुज से चिपक कर बैईः सको.”
मई तो त्यआर ही थी. चाचा ने कहा “ नीता बिटिया, गोद मे बिठा कर लंड डालूँगा तो आसानी से नही जाएगा. तुम बेड पर लेट जाओ, मैं तुम्हारी चुत को थोड़ा और गीला कर देता हूँ, क्योंकि तुम्हारा यह पहली बार है. तुम्हे अच्छा लगेगा.”
मई चाहती तो थी की जल्दी से चाचा आपना लंड मेरी चुत मे डाल दे, पर आक्टिंग करते हुए बोली “ है चाचा आपका लंड तो बहुत ही मोटा और लंबा है. दर्द तो नही होगा? कहीं मैं मार तो ना जाऊंगी?”
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