चुदक्कर भाग – ५

मैंने रागिनी से कहा-“आँख खोल और देख न कौन चोद रहा है तुझे। मुझसे आँख मिला, कुछ बात कर ना। रन्डी हो तो थोड़ा रन्डीपना दिखा।” उसे मेरी बात से ठेस पहुँची शायद, पर वो आँख खोल कर बोली-“हाँ साले बेटीचोद, लुटो मजा मेरे चूत का साले। मेरे बाप की उमर के हो और साले मुझे चोद रहे हो।” मुझे उसकी गालियों से जोश आ गया-“चुप साली फाड़ दुँगा तेरी चूत आज। साली कुतिया। मुझे बेटी-चोद बोलती है। बाप से चुदा-चुदा के जवान हुई हो साली और मुझे बोल रही है बेटी चोद…ले साली चुद, और चुद, और चुद, रन्डी साली।’ और मैंने कई जोरदार धक्के लगा दिए। ८-१० मिनट चोदने के बाद मैं थोड़ा थक गया तो लन्ड बाहर निकाल लिया और बोला-“अब बेटा तुम मेरे उपर बैठ कर चोदो, मुझे थोड़ा आराम से लेटने दो, फ़िर मैं चोदुँगा”। उसने कहा-“ठीक हैं अंकल” और मेरे उपर चढ़ कर बैठ गई। सानिया बार-बार अपने पैर सिकोड़ रही थी, उसकी चूत भी गीली थी, पर उसमें गजब का धैर्य था।
खड़े-खड़े ही वो हुम दोनों की चुदाई देख रही थी चुप चाप। रागिनी के मुँह से हुम्म्म हुम्म्म की अवाज निकल रही थी पर वो मेरे लन्ड पर उछल उछल कर खुद ही अपनी बुर चुदा रही थी। मैं ऐसी मस्त लौन्डिया को पा कर धन्य हो गया। कुछ देर बाद मैंने कहा-“चल साली, अब घोड़ी बन। घुड़सवारी करने का मन है।” वो बोली-“जरुर अंकल, आपके लिए तो आप जो बोलो करुँगी। आपने मुझे सच्ची मजा दिया है और मुझे पहली बार रन्डीपन का मजा मिल रहा है।” और वो बड़े प्यार मेरे उपर से उठी और फिर बेड से उतर कर जमीन पर हाथ-घुटनों के सहारे झुक गई। वो अब सानिया के बिल्कुल पास झुकी हुई थी। उसकी खुली हुई बुर अपने भीतर की गुलाबी कली के दर्शन करा रही थी।
मैं भी बेड से उतर कर पास आ गया और सानिया से पूछा-“मस्ती तो आ रही होगी, कम से कम अपनी ऊँगली से ही कर लो मेरी बच्ची”, मैंने प्यार से उसके गाल सहला दिए। फिर रागिनी पर सवार हो गया। मेरा लन्ड अब मजे से उसकी गीली चूत के भीतर की दुनिया का मजा ले रहा था। करीब ४० मिनट हो गया था, हम दोनों को खेलते हुए। रागिनी को एक और और्गैज्म हो चुका था। मेरा भी अब झड़ने वाला था तो मंने उससे पूछा-“कहाँ निकालूँ रागिनी?” वो तपाक से बोली-“मेरे मुँह में, मेरे मुँह में अंकल। आपका एक बुँद भी बेकार नहीं करुँगी।” मैंने अपना लन्ड बाहर निकाल और उसके मुँह की तरफ़ आया। उसने अपना मुँह खोला और मैं उसके मुँह को अब चोदने लगा। १०-१२ धक्के के बाद मेरे लन्ड से पिचकारी निकलने लगी, जिसे रागिनी अपना होठ बन्द करके पुरा का पुरा माल मुँह में ली और फ़िर मैंने लन्ड बाहर खींच लिया तब उसने मुँह खोल कर मेरे माल को अपने मुँह में दिखाया और फिर मुँह बन्द करके निगल गई।
मैंने उसको जमीन से उठाया और फ़िर अपने गले लगा लिया और कहा-“तुम बहुत अच्छी हो रागिनी, मैंने जो गालियाँ तुम्हें दी, उसके लिए माफ़ करना। चोदते समय ये सब तो होता ही हैं।” वो भावुक हो गई, उसकी आँखों में आँसू तैर गए। भरी आवाज में बोली-“नहीं सर, आप बहुत अच्छे हैं। मैं रन्डी हूँ, पर आपने इतना इज्ज्त दिया, वर्ना बाकी लोग तो मेरे बदन से सिर्फ़ पैसा वसूल करते हैं। थैंक्यू सर।” उसकी यह बात दिल से निकली थी, मैंने उसकी पीठ थपथपायी-“सर नहीं अंकल। अब मैं तुम्हारा अंकल हीं हूँ। जब भी परेशानी में रहो, मुझे बताना। मैं पुरी मदद करुँगा।” एक-एक बूँद आँसू उसकी गालों पर बह गए। उसने अपने हाथों से अपना चेहरा ढ़क लिया। ५-६ सेकेण्ड बाद मुस्कुराते हुए हाथ हटाए और बोली-“बेटीचोद” और मेरे गले से लिपट गयी। सानिया की आँख भी गीली हो गई। उसकी नजरों में भी मेरे लिए अब प्यार दिख रहा था। वो बोली-“मैं आप दोनों के लिए पानी लाती हूँ” और वो बाहर चली गई।
जब वो पानी का ट्रे ले कर आई तब मैं कुर्सी पर बैठा था और रागिनी बिस्तर ठीक कर रही थी। हम दोनों अभी भी नंगे ही थी। मेरा लन्ड एक दम शांत और भोला बच्चा बन गया था। पानी आगे करते हुए सानिया बोली-“चाचु अब आप दोनों सो जाएँ, ११.३० से ज्यादा हो रहा है। अब कल सुबह मैं चाय लाऊँगी आप दोनों के लिए।” फ़िर हँसते हुए रुम में से भाग गयी।
अगली सुबह सानिया ही रुम में आ कर मुझे और रागिनी को जगाई। मैने देखा कि सानिया के हाथ की ट्रे में दो गिलास पानी और पेपर है। मैं और रागिनी अभी भी नंगे थे जैसे कि हम रात को सो गए थे। रागिनी पानी पी कर बाथरुम की तरफ़ चल दी, और मैंने उसका तकिया उठा कर अपने गोद में रख लिया जिससे मेरे लन्ड को सानिया नहीं देखे। सानिया यह सब देख बड़े कातिलाना अंदाज में मुस्कुराई, फ़िर चाय लाने चली गई। मैं पेपर खोल लिया। जब सानिया चाय ले कर आई, तब तक रागिनी भी बाहर आ गई थी और अपने कपड़े जमीन पर से समेट रही थी। सानिया सिर्फ़ एक कप चाय लाई थी, जिसे उसने रागिनी की तरफ़ बढ़ा दिया। रागिनी ने चाय लिया बाकी चाय के बारे में पुछा। अब जो सानिया ने कहा उसे सुन कर मेरी नसें गर्म हो गई। बड़ी सेक्सी आवाज में हल्के से फ़ुस्फ़ुसा कर सानिया बोली-“तुम पीयो चाय, चाचू को आज मैं अपना दूध पिलाऊँगी”, और उसने अपने टौप को नीचे से पकड़ कर उठाते हुए एक ही लय में अपने सर के उपर से निकाल दिया। मेरे मुँह से निकल गया-“जीयो जान, क्या मस्त चुची निकली है तेरी।” सच उसकी संतरे जैसी गोल-गोल गोरी-गोरी चुची गजब का नजारा पेश कर रही थी, और उस पर गुलाबी-गुलाबी लगभग आधे आकार को घेरे हुए चुचक बेमिसाल लग रहे थे। सानिया के बदन के गोरेपन का जवाब न था। वो इसके बाद मेरे बदन पर ही चढ़ आई।
मैंने पहले उसके चेहरे को पकड़ा और फ़िर उसके गुलाबी होठों का रस पीने लगा। उसका बदन हल्का सा गर्म हो रहा था, जैसे बुखार सा चढ रहा हो। बन्द आँखों के साथ वो हसीना अब टौपलेस मेरे बाहों में थी। मैंने रागिनी की तरफ़ देखा। वो मुझे देख मुस्कुरा रही थी, और चाय की चुस्की ले रही थी, जब मैंने सानिया को अपने बदन से थोड़ा हटाया और फ़िर उसकी दाहिनी चुची की निप्पल मुँह में ले उसे चुभलाने लगा। सानिया आँख बंद करके सिसकी भर रही थी, और मैं मस्त हो कर उसके चुचियों से खेल रहा था, चुस रहा था। वो भी मस्त हो रही थी। मैंने अपने हाथ थोड़ा आगे कर उसके कैप्री के बटन खोले और फ़िर उसको अपने सामने बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। भीतर काली पैन्टी की झलक मुझे मिल रही थी। प्यार से पहले मैंने कैप्री उत्तार दी। फ़िर मक्खन जैसी जाँघों को सहलाते हुए भीतर की तरफ़ जाँघ पर २-४ चुम्बन लिया। उसका बदन अब हल्के से काँप गया था। और जब मैं उसकी पैन्टी नीचे कर रहा था तब उसने शर्म से अपना चेहरा अपने हाथों से ढ़क लिया।
इस तरह से उसका शर्माना गजब ढ़ा गया। चूत को उसने एक दिन पहले ही साफ़ किया था, सो उसकी गोरी चूत बग-बग चमक रही थी। मैंने उसके चूत को पुरा अपने मुट्ठी में पकड़ कर हल्के से दबा दिया, तो वो आआह्ह्ह्ह कर दी। मैंने अपना मुँह उसकी चूत से लगा दिया और वो चुसाई की, वो चुसाई की गोरी-गोरी चूत की कि वो एक दम लाल हो गई जैसे अब खून उतर जाएगा। वो अब चुदास से भर कर कसमसा रही थी, कराह रही थी। उसकी हालत देख मैंने रागिनी की तरफ़ आँख मारी और कहा-“सानिया बेटा, अब जरा तुम भी मेरा चुसो, अच्छा लगेगा”। वो काँपते आवाज में बोली-“नहीं चाचु, अब कुछ नहीं अब बस आप घुसा दो मेरे भीतर अब बर्दास्त नहीं होगा, प्लीज…”
मैंने उसको छेड़ा-“क्या घुसा दूँ, जरा ठीक से बोलो ना।” रागिनी मेरे बदमाशी पर हँस दी, बोली-“अंकल, क्यों दीदी को तड़पा रहे हो, कर दो जल्दी।” सानिया लगातार प्लीज घुसाओ प्लीज कर रही थी। मैंने फ़िर कहा-“बोलो भी अब क्या घुसा दूँ, कहाँ घुसा दूँ, मुझे समझाओ भी जरा।” सानिया सच अब गिड़गिराने लगी, बोली-“चाचा, प्लीज…” वो अपने हाथ से अपना चूत सहला रही थी। मैंने भी कहा-“एक बार कह दो साफ़ साफ़ डार्लिंग, उसके बाद देखो, जन्न्त की सैर करा दुँगा, बस तुम्हारे मुँह से एक बार सुनना चाहता हूँ पहले।” अब सानिया बोल दी-“मेरे अच्छे चाचु, प्लीज अपने लन्ड को मेरे चूत में दाल कर मुझे चोद दो एक बार, अब रहा नहीं जा रहा।” मेरा लन्ड जैसे फ़टने को तैयार हो गया था ये सब सुन कर। वषों से यही सोच सोच कर मैंने मुठ मारी थी सैकड़ों बार। मैं जोश में भर कह उठा-“ओके, मेरे से चुदाना चाहती हो, ठीक है खोलो जाँघ”। और मैं उसके जाँघों के बीच बैठ कर लन्ड को उसकी लाल भभुका चूत की छेद से भिरा दिया। मैंने कहा-“डालूँ अब भीतर?” सानिया चिढ़ गई-“ओह, अब चोद साले बात मत कर आह”। इस तरह जब वो बोल पड़ी तो मैं समझ गया कि अब साली को रन्डी बन जाने में देर ना लगेगी।
मैंने एक जोर के धक्के के साथ आधा लन्ड भीतर पेल दिया। उसके चेहरे पर दर्द की रेखा उभरी, पर उसने होंठ भींच लिए। अगला धक्का और जोर का मारा और पुरा ८” जड़ तक सानिया की चूत में घुसेड़ दिया। वो चीख पड़ी-“हाय माँ, मर गई रे….।” उसका आँख बन्द था, और उस जोरदार धक्के के बाद मैं थोड़ा एक क्षण के लिए रुका कि रागिनी की आवाज सुनाई दी-“ओह माँ”। मैंने आँख खोली, देखा सानिया के दोनों आँखों से एक-एक बूँद आँसू निकल कर गाल पर बह रहे थे, रागिनी साँस रोके अपने हाथों से मुँह ढ़के बिस्तर देख रही थी। और तब मुझे अहसास हुआ कि सानिया कुँवारी कली थी, और मैंने उसका सील तोड़ा था अभी-अभी। बिस्तर पर उसकी कुँवारी चूत की गवाही के निशान बन गए थे, बल्कि अभी और बन रहे थे।
मैं समझ गया कि कितनी तकलीफ़ हुई है सानिया को, सो अब मैंने उसको पुचकारा-“हो गया बेटा हो गया सब, अब कुछ दर्द ना होगा कभी”। रागिनी भी उसके बाल सहला रही थी-“सच दीदी, अब सब ठीक है, इतना तो सब लड़की को सहना होता है…”। सानिया भी अब थोड़ा सम्भली और होंठ भींचे भींचे सर को हिलाया कि सब ठीक है। और तब मैंने अपना लन्ड बाहर-भीतर करना शुरु किया। ४-६ बार बाद लन्ड ने अपना रास्ता बना लिया और फ़िर हौले-हौले मैं भी अब सही स्पीड से सानिया की चुदाई करने लगा। वो भी अब साथ दे रही थी। ८-१० मिनट बाद मैंने अपना सारा माल चुत के उपर पेट की तरफ़ निकाल दिया। वो निढ़ाल सी बेड पर पड़ी थी। रागिनी ने बेडशीट से ही उसकी चूत पोंछ दी, और फ़िर उसको सब दिखाया। सानिया बोली-“अब तो पका हुआ ना कि मैंने रेहान के साथ कुछ नहीं किया था, पर ये सब अम्मी-अब्बू कैसे जान पाएँगें?” उसके आँखों में आँसू आ गए।
मैंने उसे अपनी बाँहों में समेट लिया-“छोड़ो ये सब बात, आज तो सिर्फ़ अपनी जवानी का जश्न मनाओ।” मुझे अब पेशाब लग रही थी, सो मैं बिस्तर से उठ गया। अब दोनों लड़कियाँ भी उठ कर कपड़े पहनने लगीं। आधे घन्टे बाद चाय-बिस्कुट के साथ सानिया अपने पहले चुदाई के अनुभव बता रही थी। रागिनी ने उसे समझाया कि “अभी एक-दो बार और दर्द महसुस होगा पर ऐसा नहीं मीठा दर्द लगेगा, उसके बाद जब बूर का मुँह पुरा खुल जायेगा तब बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा, चाहे जैसा भी लन्ड भीतर डलवा लो। मुझे अब बिल्कुल भी दर्द नहीं होता”।

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