सामूहिक चुदाई का सुख-3

अब तक आपने पढ़ा कि पंकज हालाँकि ज़न्नत को बहुत ज़ोर से चोद रहा था पर उसकी नज़र मेरी चूत पर टिकी हुई थी। नरेन का भी यही हाल था और उसकी नज़र ज़न्नत की चुदती हुई चूत पर से हट नहीं पा रही थी !
अब आगे :
मुझे पंकज के सामने अपने पति के साथ चुदाई करने में बहुत मज़ा आ रहा था और अब मैं भी गर्म होकर अपनी कमर उचका-उचका कर नरेन का लंड अपनी चूत में डलवा रही थी। मेरे बगल में ज़न्नत भी अपनी टाँगों को उठा करके पंकज का लंड अपनी चूत से खा रही थी।
पलंग पर चार लोगों के लिए जगह कम थी और हमारे जिस्म एक-दूसरे से टकरा रहे थे। ज़न्नत का पैर मेरे पैर से और नरेन की जाँघ पंकज के जाँघ से छू रही थी।
थोड़ी देर तक मैं अपनी चूत चुदवाते हुए ज़न्नत को देख रही थी और थोड़ी देर के बाद मैंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर ज़न्नत का हाथ पकड़ लिया।
ज़न्नत ने खुशी का इज़हार करते हुए मेरे हाथ को दबाया और अपनी कमर उचकाते हुए मेरी तरफ देख कर मुस्कुराई।
यह देख पंकज ने अपना हाथ बढ़ा कर मेरे पेट, पर मेरी चूत से थोड़ा ऊपर रख दिया। मुझे पंकज का हाथ अपने पेट पर बहुत अच्छा लगा और मैंने पंकज से कुछ नहीं कहा।
पंकज की हरकत देख कर नरेन ने भी अपना हाथ ज़न्नत की जाँघ पर उसकी चूत के पास रख दिया और ज़न्नत की जाँघों को हल्के-हल्के से सहलाना और दबाने लगा। पंकज और नरेन की इन हरकतों से हम सब में एक नई तरह की चुदास भर गई और दोनों मर्द हम दोनों औरतों को ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया।
अचानक नरेन को हमारा वो वार्तालाप याद आया जिसमे हम किसी दूसरे जोड़े के साथ चुदाई की कल्पना करते थे, नरेन ने मुझसे पूछा- विभा क्या तुम आज किसी नई चीज़ का आनन्द उठाना चाहोगी?
मैंने नरेन से पूछा- तुम्हारा क्या मतलब है नरेन? तुम और किस नए आनन्द की बात कर हो? अभी तो मुझे ज़न्नत के साथ उसके पलंग पर लेट कर तुमसे अपनी चूत चुदवाने में बहुत आनन्द मिल रहा है।
तब नरेन मुस्कुराते हुए मेरी चूचियों को अपने हाथों से मसलते हुए बोला- आज पंकज से चुदवाने का मज़ा लेने के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है?
मैं और नरेन कल्पना में पंकज और ज़न्नत के साथ इतनी बार एक-दूसरे को चोद चुके थे कि ये सब बातें मेरे लिए नई नहीं थीं।
इसलिए मैं नरेन से बोली, “नरेन, आज मेरी चूत इतनी गर्म हो चुकी है कि मुझे इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आज मुझे कौन चोदता है, तुम या पंकज.. बस मुझे अपनी चूत में कोई ना कोई लंड की ठोकर चाहिए और वो लंड इतनी ठोकर मारे कि मैं जल्दी से झड़ जाऊँ। इस समय मैं अपनी चूत की खुजली से बहुत परेशान हूँ।
यह सुनते ही नरेन ने पंकज की ओर मुड़ कर कहा- पंकज, क्या तुम आज एक नए आनन्द के लिए विभा की चूत में अपना लंड डालना चाहोगे? क्या तुम आज विभा को चोदना चाहोगे?
नरेन की बात सुन कर पंकज झटपट ज़न्नत की चूत में चार-पाँच कस-कस कर धक्के मारे और ख़ुशी से बोला, “ज़रूर नरेन, पर अगर ज़न्नत भी एक नए आनन्द के लिए तुम से अपनी चूत चुदवाना कहती है तो !
जब मैंने देखा कि पंकज और नरेन अपनी-अपनी बीवियों को एक-दूसरे से चुदवाना चाहते हैं, तो फिर मैंने हिम्मत करके ज़न्नत से पूछा- ज़न्नत, क्या तुम भी एक नया आनन्द लेना चाहती हो, नरेन का लंड अपनी चूत में डलवा करके उससे चुदवाना चाहती हो?
ज़न्नत थोड़ी देर तक सोचने के बाद पंकज के गले में अपनी बाँहों को डाल कर और उसके सीने से अपनी चूचियों को रगड़ते हुए बोली- क्यूँ नहीं..! अगर दूसरे मर्द के साथ विभा अपनी चूत चुदवा सकती है और यह विभा के लिए ठीक है तो मुझे क्यों फ़र्क पड़ना चाहिए? मैं भी नरेन के लंड से अपनी चूत चुदवाना चाहती हूँ और यह भी देखना चाहती हूँ कि पंकज का लंड कैसे विभा की चूत में घुसता है और निकलता है और कैसे विभा अपनी चूत पंकज से चुदवाती है। आज मैं भी विभा की तरह छिनाल बनना चाहती हूँ और किसी दूसरे मर्द का लंड अपनी चूत में पिलवाना चाहती हूँ।
और यही हम लोगों की अदला-बदली चुदाई का आगाज़ था।
ज़न्नत की बातों को सुनकर पंकज ने अपना लंड ज़न्नत की चूत से बाहर खींच लिया और नरेन से बोला- चल अब हम अपनी-अपनी बीवियाँ बदल कर उनकी चूत को चोद-चोद कर उनका भोसड़ा बनाते हैं।
पंकज की बात सुनकर नरेन ने भी अपना लंड मेरी चूत में से निकाला और ज़न्नत की ओर बढ़ गया।
पंकज भी अपने हाथ से अपना लंड पकड़ कर मेरे पास आया, मेरे पास आकर मेरी जांघों के बीच झुकते हुए उसने पहले मेरी चूत पर एक जोरदार चुम्मा दिया और फिर अपना लंड मेरी कुलबुलाती हुई चूत में लगाया और एक धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत के अन्दर घुसेड़ दिया।
मैंने भी अपनी कमर उचका कर पंकज का पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में डलवा लिया। फिर मैं अपनी चूत में पंकज का लंड लेती हुई और नरेन को भी ज़न्नत की चूत में अपना लंड घुसा कर ज़न्नत की चुदाई शुरू करते हुए देखने लगी।
नरेन और ज़न्नत दोनों बड़े जोश के साथ एक-दूसरे को चोद रहे थे।
जितना तेज़ी से नरेन अपना लंड ज़न्नत की चूत में घुसेड़ता उतनी ही तेज़ी से ज़न्नत भी अपनी कमर उचका कर नरेन का लंड अपनी चूत में ले रही थी। मैं एक नया लंड अपनी चूत में डलवा कर बहुत खुश थी और खूब मज़े से पंकज का लंड अपनी चूत में पिलवा रही थी।
पंकज का लम्बा लंड मेरी चूत के खूब अन्दर तक जा रहा था और मुझे पंकज की चुदाई से बहुत मज़ा मिल रहा था। पंकज भी मेरी चूचियों को अपने दोनों हाथों से मसलते हुए मुझे चोद रहा था।
मैं बार-बार नरेन के मोटे लंड को ज़न्नत की चूत में जाता हुआ देख रही थी। नरेन भी मेरी चूत को पंकज के लंड से चुदते हुए बिना परेशानी के देख रहा था।
ज़न्नत भी नरेन के लंड को मेरी चूत मैं अन्दर-बाहर होते देख रही थी और पंकज सिर्फ़ मेरी बिना झांटों वाली चिकनी चूत को देख कर उसे चोदने में पूरा ध्यान लगाए हुए था।
इस समय मुझे लगा कि दुनिया में अपने पति को अपनी सबसे चहेती सहेली को चोदते हुए देखने का सुख अपरम्पार है और तब जबकि मैं खुद भी उसी बिस्तर पर उस सहेली के पति से अपने पति के सामने खुल्ल्म-खुल्ला चुदवा रही होऊँ।
कमरे में सिर्फ हमारी चुदाई की आवाज़ गूँज रही थी।
ज़न्नत अपनी चूत में नरेन का लंड पिलवाते हुए हर धक्के के साथ ‘श.. श.. आ.. आ..’ कर रही थी और बोल रही थी- हाय नरेन क्या मस्त चोद रहे हो… और ज़ोर-ज़ोर से चोदो मुझे, बहुत दिनों के बाद आज मेरी कायदे से चुद रही है… हाय क्या मस्त लौड़ा है तुम्हारा… मेरी चूत… लग रही है आज फट ही जाएगी… तुम रुकना मत.. मुझे आज खूब चोदो… चोद-चोद कर मेरी चूत का भोसड़ा बना दो।
नरेन भी ज़न्नत की चूची दबाते हुए अपनी कमर उठा-उठा कर हचक-हचक कर ज़न्नत को चोद रहा था और बोल रहा था- हाय मेरी चुदक्कड़ रानी… आज तक तूने पंकज का लंड खाया है, आज तुझे मैं अपने लंड से चोद-चोद कर तेरी चूत का बाजा बजा दूँगा… आज तेरी चूत की खैर नहीं…!
इधर पंकज मेरी चूत चोदते हुए बोल रहा था- हाय मेरी जान.. तुम इतने दिन क्यों नहीं मुझसे चुदवाई… आज तेरी चूत देख.. मैं कैसे चोदता हूँ… तेरी चूत मेरे लंड के लिए ही बनी हुई है… आज के बाद तू सिर्फ़ मुझसे चुदवाएगी… ले ले मेरे लंड की रानी.. ले.. मेरे लंड की ठोकर खा.. अपनी चूत के अन्दर… मज़ा आ रहा कि नहीं.. मेरी जान.. बोल ना..! बोल.. कुछ तो बोल…!
पूरे कमरे में बस पक… पक.. पका.. पक.. की आवाज़ गूँज रही थी।
तभी अचानक पंकज ने मुझे चोदते-चोदते अचानक चोदना बंद कर दिया और अपना लंड मेरी चूत से निकाल कर के मुझे पलंग पर से उठने के लिए बोला। जैसे ही मैं पलंग पर से उठी तो पंकज झट मेरी जगह पर लेट गया और मुझे अपने ऊपर खींच करके मुझसे उस पर चढ़ कर के चोदने के लिए बोला।
मैं तो गर्म थी ही और इसलिए मैं पंकज की कमर के दोनों तरफ अपने हाथों को रख कर के पंकज के लंड को अपने हाथों से पकड़ के उसके सुपारे पर एक चुम्मा दिया और पंकज के ऊपर चढ़ गई, अपने हाथों से पंकज का लंड पकड़ के अपनी चूत के छेद से भिड़ा दिया।
पंकज ने भी नीचे से मेरी दोनों चूचियों को अपने हाथों से पकड़ कर उनको दबाते हुए नीचे अपना कमर उठा कर के अपना लंड मेरी चूत के अन्दर पेल दिया।
मैं पंकज के ऊपर बैठ कर उसके लंड को अपने चूत में लेती हुई मुड़ कर देखने लगी कि नरेन ने भी ज़न्नत की चूत मारने का आसान बदल लिया है और वो अब ज़न्नत को घोड़ी बना करके उकडूँ होने के लिए कह रहा था। उसके बाद नरेन ने ज़न्नत के बड़े चूतड़ों को पकड़ कर उसे पीछे से चोदना शुरू कर दिया।
ज़न्नत घोड़ी बन कर नरेन के धक्कों का जवाब देने लगी और मैं भी पंकज को ऊपर से तेज़ी से पंकज को चोदने लगी। थोड़ी ही देर में हम चारों एक साथ झड़ गए।
झड़ते समय पंकज ने मुझे अपने से चिपका लिया और अपना लंड जड़ तक मेरी चूत में घुसेड़ कर अपना पूरा का पूरा माल मेरी चूत की गहराई में छोड़ दिया।
उधर नरेन भी ज़न्नत को अपने चिपका कर ज़न्नत की चूत अपने लंड के पानी से भर दिया। झड़ते वक़्त मैं और ज़न्नत ने अपने हाथों से पंकज और नरेन को अपने से सटा लिया था और जैसे ही चूत के अन्दर लंड का फुव्वारा छूटा.. चूत ने भी अपनी अपना रस छोड़ दिया।स
कहानी जारी रहेगी।
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