बहन की चुदाई 2015 – Part – 3

मुझे सोते हुए अभी कुछ ही देर हुई थी कि अचानक मुझे मेरे लण्ड पर किसी का हाथ महसूस हुआ।

आप सभी को तो पता ही है कि चाहे लड़का हो या लड़की ! उसके नाजुक अंग पर कोई भी हाथ लगाये तो वो जाग जाता है, इस तरह मैं भी जाग गया था।

जब मैंने महसूस किया कि कोई मेरे लण्ड को छू रहा है तो मैंने अपनी आँख धीरे से खोली तो देखा प्रिया ही मेरे लण्ड को छू रही है।

मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था इसलिए मैंने उसको कुछ नहीं कहा।

मुझे यह देखकर कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि शायद उसने, वो जो मैं देख रहा था, वही वीडियो प्रिया ने देख ली थी।

वैसे तो प्रिया जवान थी तो उसका बहकना लाजमी भी था और फिर मेरे तो मज़े ही आ गए जो बैठे बिठाये एक नई चूत का इंतजाम हो गया।

मैंने भी ऐसा कुछ नहीं किया जिससे उसको पता चल जाये कि मैं जाग रहा हूँ।

मैंने फिर से अपनी आँखें बंद कर ली और ऐसे ही लेटे हुए मज़ा लेता रहा।

प्रिया के शब्दों में:

मैंने भाई का लण्ड मुंह में लिए हुए ही अपनी सलवार और चड्डी को अपने पैरो से पूरी तरह से निकाल दिया जो कुछ देर पहले मेरे पैरों में फंसी हुई थी।

फिर अपने एक हाथ से अपनी गीली चूत को सहलाने लगी।

भाई का लण्ड अब भी मेरे मुंह में था और मैं उनके लण्ड का सुपारा चूस रही थी और एक हाथ से अपनी चूत सहला रही थी।

मदहोशी का यह आलम था कि मुझे कुछ भी याद नहीं रहा और मैं अपने भाई के लण्ड को कुछ ज्यादा ही जोर से चूस लगी।

साजन- प्रिया को लण्ड चूसना तो आता नहीं था और न ही उसने पहले कभी किसी का लण्ड चूसा था पर वो जिस तरह से भी मेरा लण्ड चूस रही थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

प्रिया के दांत मेर लण्ड को बार बार लग रहे थे, जब वो लण्ड चूस रही थी।

मुझे हल्का हल्का दर्द भी हो रहा था पर मज़ा भी बहुत आ रहा था, कई बार तो मेरे मुख से चीख निकलते निकलते रह गई क्योंकि अब प्रिया बहुत जोर से मेरा लण्ड चूस रही थी और उसके दांत मेरे लण्ड पर बहुत लग रहे थे।

पर मैं सब कुछ सहन करता रहा।
 इसलिए उसको मैंने कुछ नहीं कहा और न ही कुछ ऐसा किया जिससे उसको यह लगे कि मैं जाग रहा हूँ।

प्रिया- कुछ देर बाद ही मुझे मेरी चूत में ऐसा लगा कि जैसे मुझे पेशाब आने वाला है पर उस टाइम मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मैं भाई का लण्ड भी चूसना नहीं छोड़ सकती थी और न ही अपनी चूत को सहलाना।

कुछ देर बाद ही मुझे लगा कि मेरा पेशाब निकल रहा है और मैं जोर जोर से अपनी चूत को रगड़ने लगी और भाई का लण्ड भी जोर जोर से चूसने लगी कि तभी भाई के लण्ड से कुछ निकल कर मेरे मुंह में आ गया।

मेरी समझ में आ गया कि यह भाई का पानी है जैसे उस वीडियो में दिखाया था।

मैंने भी वैसा ही किया और मैं भाई का सारा माल पी गई।

साजन भाई के लण्ड से निकला हुआ पानी मुझे कुछ हल्का सा नमकीन और खट्टा लगा जो मुझे बहुत पसंद आया और साजन भाई के लण्ड का पानी मुझे इतना अच्छा लगा कि मन करता था कि यह लण्ड हमेशा के लिए मेरा ही हो जाए और जब जी करे उसका पानी पी लूँ।

मुझे भी लगा मेरा पेशाब निकल रहा है पर उसमें मज़ा मुझ बहुत आ रहा था, ऐसा मज़ा मुझे अपनी जिन्दगी में कभी नहीं आया।
 आनन्द के मारे मेरी आँखें बंद हो चुकी थी।

जब मेरा पूरा पानी निकल गया तो देखा वो मेरा पेशाब नहीं था।

मुझे समझ आ गया कि यह मेरा माल है जो मेरी ही अपनी चूत का है इसलिए ये इतना गाढ़ा निकला।

अब मैं पूरी तरफ शान्त हो चुकी थी।

भाई को देखा तो वो अभी भी सो रहे थे।

मैंने भाई का लोअर सही से ऊपर कर दिया कि उनको कुछ भी पता न चल सके।

फिर मैंने अपनी सलवार भी पहन कर लेट गई भाई के साथ चिपक कर।

उसके बाद कब मुझे नींद आ गई मुझे कुछ पता नहीं।

सुबह को मैं अपने टाइम से थोड़ा लेट ही उठी थी पर मैं एकदम तरोताजा लग रही थी।

मुझे रात की बात याद आई तो मुझे अब कुछ अजीब सा लगा और सोचने लगी कि अगर भाई जाग जाते तो क्या होता?
फिर वो क्या सोचते मेरे बारे में, पर शुक्र था कि वो नहीं उठे थे।

अब तो मेरी साजन भाई के सामने जाने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी।
 जबकि वो अभी भी सो ही रहे थे।

मैं नहा धोकर रसोई में गई तो देखा कि मम्मी नाश्ता बना रही हैं।

मुझे आता देख मम्मी मुझसे बोली- क्या बात है आज तू इतना लेट उठी?

तो मैंने मम्मी से कहा- मम्मी आज रविवार है और आज कहीं जाना भी नहीं है, बस इसी वजह से लेट उठी।

मेरी बात सुनकर मम्मी चुप हो गई।

सुबह के आठ बज चुके थे, मम्मी ने नाश्ता बना लिया था तो मम्मी ने कहा- जा पहले अपने भाई को नाश्ता दे आ ! वो उठ गया होगा। जा जल्दी से दे आ ! ऐसा न हो उसको कहीं जाना हो और वो बिना नाश्ता करे बैगर ही चला जाए।

मम्मी ने एक प्लेट में नाश्ता और चाय दे दी।

मेरी साजन भाई के सामने जाने की हिम्मत तो हो ही नहीं रही थी और न ही मैं मम्मी को मना कर सकती थी !
वो पूछती तो मैं क्या जवाब देती?
इसलिए मज़बूरी में मुझे जाना पड़ा।

मैं साजन- प्रिया के जाने के बाद मेरी आँख खुली तो देखा प्रिया जा चुकी थी पर पारुल और मुकेश अभी भी सो रहे थे।
 मैंने उन दोनों को उठाया और मैं नहाने चला गया।

मैं अभी नहा धोकर मैं बाथरूम से बाहर आया और कपड़े पहने ही थे कि प्रिया मेरे लिए नाश्ता लेकर आ रही थी।
 उसने अपनी नज़र नीचे कर रखी थी।

प्रिया को देखते ही मुझे रात का वो सीन याद आ गया और मेरे चेहरे पर मुस्कान आई गई।मैं अभी नहा धोकर मैं बाथरूम से बाहर आया और कपड़े पहने ही थे कि प्रिया मेरे लिए नाश्ता लेकर आ रही थी।
 उसने अपनी नज़र नीचे कर रखी थी।

प्रिया को देखते ही मुझे रात का वो सीन याद आ गया और मेरे चेहरे पर मुस्कान आई गई।

जब प्रिया नाश्ता बेड पर रख रही थी तो मैंने प्रिया से कहा- ये दोनों भी उठ गए है इनके लिए भी नाश्ता ले आती!

पर मेरी बात का प्रिया ने कोई जवाब नहीं दिया और वो वापस जाने लगी तो मैंने उसको कहा- प्रिया क्या हो गया तुमको? तबियत तो ठीक है न।

मैं उसको यह दर्शाना चाह रहा था कि मुझे रात की घटना के बारे में कुछ नहीं पता।
 और मेरी थोड़ी सी कोशिश के बाद उसको विश्वास हो गया कि मुझे रात की बात का कुछ भी नहीं पता, तब जाकर वो नार्मल हुई।

प्रिया- जब मैं साजन भाई के सामने गई तो साजन भाई से नजर नहीं मिलाई जा रही थी। पर भाई की बात से मुझे लगा कि भाई को रात के बारे में कुछ नहीं पता… इसलिए मैं भी अब नार्मल हो गई थी।

फिर मैंने पारुल और मुकेश को भी नाश्ता करवाया, उसके बाद मैंने भाई से पूछा- आपको कहीं जाना तो नहीं है, मम्मी पूछ रही थी तो साजन भाई ने कहा नहीं आज तो मुझे कहीं नहीं जाना।

इतना सुनकर मैं वापस रसोई में मम्मी का हाथ बंटाने आ गई और मम्मी को भी बता दिया कि आज भाई को कही नहीं जाना।

कुछ देर बाद पापा भी अपने ऑफिस निकल गए।

हमें घर का काम खत्म करते करते मुझे 11 बज गए थे और 11:30 पर हमारा घर का सारा काम ख़त्म हो चुका था।

दोपहर में 12 बजे मम्मी ने मुझसे कहा- मैं पड़ोस में जा रही हूँ, 2-3 घंटे में आ जाऊँगी, खाना मैंने बना दिया है, जब भूख लगे खा लेना और अपने भाई को भी खिला देना।

मैंने कहा- ठीक है मम्मी !

और फिर मम्मी तैयार होकर पड़ोस में चली गई।

साजन भाई, पारुल और मुकेश टी वी देख रहे थे।
 मुझे रात की बात याद आई और मैं सोचने लगी कि यह अच्छा हुआ, मम्मी पड़ोस में चली गई। आज मैं कोशिश करती हूँ कि किसी तरह से मैं भाई को अपने साथ सेक्स करने के लिए तैयार कर सकूँ। क्योंकि रात को भाई का चूसने के बाद मेरे अन्दर चुदाई का कीड़ा जोर मार रहा था और मैं अभी चाहती थी कि भाई भी मेरी योनि को चूसे, खा जाए और जम कर मेरी चुदाई करे, जब तक भाई यहाँ रहे तब तक हम मौज मस्ती कर सकें।

बस फिर क्या था भाई को रिझाने के लिए मैंने अपने कपड़े चेंज कर लिए।

दिन में इतनी ठंड तो थी नहीं, क्योंकि ठंड अभी रात को ही होती थी, दिन में मौसम नोर्मल ही था अभी, इसलिए मैंने शर्ट और स्कर्ट पहन ली पर शर्ट के नीचे ब्रा नहीं पहनी और स्कर्ट के नीचे गुलाबी रंग की पेंटी जरूर पहन ली थी।
 जो स्कर्ट मैंने पहनी थी वो बहुत ही शार्ट थी जिसमें मेरी गोरी टाँगें और आधी से ज्यादा मेरी जांघें दिखाई दे रही थी, और स्कर्ट ने तो बस मेरी पेंटी ही छुपा रखी थी बाकी सब तो ओपन ही था।
 ब्रा न पहनने के कारण शर्ट में मेरे बूब्स का आकर सही से नजर आ रहा था।

जब मैं तैयार होकर आईने के सामने आई तो आज मैं खुद को ही बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही थी।
 आईने में देखते हुए मैंने अपनी शर्ट के ऊपर के दो बटन भी खोल दिए, शर्ट के दो बटन खुलते ही मेरे बूब्स दिखाई देने लगे।

अब मैं और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी, अब मुझे पूरा यकींन हो गया था कि साजन भाई मेरी मस्त मस्त, गोल गोल चूचियों को देखकर मुझ पर जरूर फ़िदा हो जायेंगे।

शर्ट के नीचे ब्रा तो थी नहीं और ऊपर के दो बटन भी खुले हुए थे, तो मुझे ऐसा लग रहा था कि हवा भी मेरी चूचियों को छेड़ती हुई महसूस हो रही थी।

मैं अपने कपड़े बदल कर भाई के पास पहुँची, जिस कमरे में साजन भाई और मेरे भाई बहन तीनों टी वी देख रहे थे। मैं भी वहीं साजन भाई के सामने कुर्सी पर बैठ गई।

मुकेश और पारुल टी वी के नजदीक आगे की तरफ बैठे थे, अगर मैं कोई भी हरकत करती तो उन दोनों को पता नहीं चल पाता।

मुकेश और पारुल दोनों ही बड़े ध्यान से टी वी देख रहे थे, पर जैसे ही मैं कुर्सी पर बैठी तो साजन भाई का ध्यान मेरी तरफ गया और वो मुझे एकटक देखने लगे और बस देखते ही जा रहे थे।

मेरे इस बदले हुए रूप को शायद ही उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।

कभी वो मेरे चेहरे को देखते तो कभी वो मेरे बूब्स देख रहे थे जो कि दो बटन खुले होने के कारण कुछ ही ज्यादा बाहर को आ गए थे।
 भाई का ध्यान अब मेरे बूब्स में ही अटका हुआ था इसलिए मैंने अपनी सोची समझी हुई दूसरी चाल भी चल दी मतलब यह कि मैंने अपने दोनों पैरो इस तरफ से खोले कि उनको यह महसूस ही न हो कि मैं ये सब जान बूझकर कर रही हूँ।

जैसे ही मैंने अपने दोनों पैर खोले तो साजन भाई की नज़र मेरे बूब्स से होते हुए मेरी टांगों के बीच गई। वहाँ पर उनकी नजर गुलाबी पेंटी से ढकी हुई मेरी अनछुई चूत पर गई।

मेरी गुलाबी पेंटी में मेरी चूत का उभरा हुआ भाग साफ़ साफ़ साजन भाई को दिखाई दे रहा था।

एक पल को तो साजन भाई पलके झपकाना ही भूल गए थे।

मैं साजन- पारुल, मुकेश और मैं कमरे में बैठ हुए टी वी पर फ़िल्म देख रहे थे तभी मेरी नज़र कमरे में आती हुई प्रिया पर पड़ी।
 तो उससे देखता का देखता ही रह गया… क्या मस्त और सेक्सी लगी रही थी और उसने आज कपड़े भी बहुत सेक्सी ही पहने थे।
 उसने शर्ट और मिनी स्कर्ट पहनी हुई थी।
 जब प्रिया कमरे में चलती हुई आई तो उसके बूब्स हवा में उछल रहे थे और प्रिया के शर्ट के दो बटन भी खुले हुए थे जिससे चलते हुए उसके बूब्स बाहर को आ जाते थे।
 जो स्कर्ट प्रिया ने पहनी हुई थी वो बस उसके चूतड़ और योनि को ही छुपाये हुई थी।
 उसकी चिकनी जाँघ देखकर मेरा लिंग अंगड़ाई लेने लगा था। मुझे उसका यह रूप देखकर अंदाजा हो गया था कि यह क्या चाह रही है।

मुझे तो अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कि रात प्रिया ने मेरा लण्ड चूसा और अब ये सब देखने को मिल रहा है।

आज मुझे लगा कि प्रिया की चूत का मेरे लण्ड से संगम होकर ही रहेगा।

प्रिया कमरे में आकर साइड में रखी हुई कुर्सी पर मेरे सामने बैठ गई, फ़िल्म पारुल और मुकेश की पसंद की आ रही थी कि पारुल और मुकेश ने प्रिया की तरफ ध्यान ही नहीं दिया पर मेरा ध्यान अब टी वी में कहाँ था, अब तो बस मुझे प्रिया ही नजर आ रही थी।

कुर्सी पर बैठ कर वो टी वी देखने लगी और मैं उसके बूब्स को देख रहा था। शर्ट के ऊपर प्रिया के बूब्स की निप्पल मुझे साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी, कुछ देर बाद प्रिया ने अपने पैरों को खोल कर चौड़ा कर लिया।
 जैसे ही प्रिया ने अपने पैरों को खोला तो उसकी गुलाबी रंग की कच्छी नजर आने लगी और उस कच्छी से झांकती हुई उसकी चूत के भी दर्शन हो रहे थे जिसे देखकर मेरा लण्ड अंगड़ाई लेने लगा।
 कुछ देर बाद ही मेरा लण्ड पूरी तरफ तन कर खड़ा हो गया।

मुझे तो लग रहा था कि प्रिया ये सब जान बूझकर कर रही है।

मैं अपना लण्ड अपने एक हाथ से मसल रहा था और उसकी चूत को अपनी आँखों से ही चोदने की भरपूर कोशिश कर रहा था।
 प्रिया मुझे चोर निगाहों से देख रही थी, मेरे लण्ड का तो बहुत बुरा हाल हो गया था।
 मैं अपना लण्ड मसलते हुए प्रिया को देख रहा था तो वो थोड़ा सा नीचे की तरफ कुछ इस तरफ से झुकी की उसकी पूरी चूची मुझे साफ़ साफ़ दिखाई दे गई और जब वो ऊपर की तरफ उठी तो मेरी और प्रिया की नजरें आपस में मिली।
 मुझसे नजरें मिलते ही वो मुस्कुरा दी और बदले में, मैं भी अपना लण्ड मसलते हुए मुस्कुरा दिया।

मैंने देखा भाई के लण्ड पर अभी भी कुछ बूंदें माल की उनके लण्ड पर रह गई थी। इसलिए मैंने अपनी जीभ निकली और भाई का लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया क्योंकि मैं अपने भाई का माल बर्बाद नहीं होने दे सकती थी।
मैं साजन- उसके बाद मैंने अपना लोअर ठीक किया और प्रिया से बोला– अब ऊपर चलते है क्योंकि हमें बहुत देर हो गई है।
प्रिया- हाँ भाई, ऊपर चलते हैं बहुत देर हो गई हैं। पर एक बात तो बताओ आप मेरी मसाज कब करोगे?
और मैं हँसते हुए- प्रिया, पहली बात तो यह है कि मुझे मसाज करनी नहीं आती, वो मैंने तुमसे झूठ बोला था।
प्रिया- कोई बात नहीं भाई, आप कोशिश करके देखना, मैं आपसे मसाज करवाना चाहती हूँ… चाहे आपको आती हो या न आती हो और मुझे वो मसाज वाली मूवी भी देखनी है, वो कब दिखाओगे आप?
मैं- ठीक है जब घर में कोई नहीं होगा तब मैं मूवी भी दिखा दूँगा और मसाज भी कर दूँगा क्योंकि तुमको पता है इन सब में टाइम ज्यादा ही लगता है।
प्रिया- भाई आप मुझे वो वीडियो दिखा दो ! मैं यही इसी कमरे में देख लेती हूँ। बाकी का काम जब कर देना जब घर पर कोई न हो और आप पारुल और मुकेश के साथ ऊपर ही बैठ जाओ तो उन दोनों को लगेगा मैं नीचे कुछ काम कर रही हूँ।
मेरी बात सुनकर भाई ने अपना मोबाईल फ़ोन निकला और मुझे वही फ़ोल्डर खोल कर मेरे हाथ में मोबाईल पकड़ते हुए कहा कि इसमें बहुत सारी वीडियो हैं, जो तुमको अच्छी लगेगी।
मैंने फ़ोन हाथ में पकड़ा और उसमें मसाज वाली मूवी खोजने लगी।
तब तक भाई ऊपर पारुल और मुकेश के पास जा चुके थे।
मैं बहुत खुश थी जो मैंने सोचा था बिलकुल वैसे ही हो रहा था।
मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था भाई इतनी जल्दी मान जायेंगे और जो अभी हमने किया तो मुझे बहुत अच्छा लगा।
 सच में भाई का लण्ड बहुत ही दमदार है।
फिर मैं मसाज वाली मूवी देखने लगी।
अब आगे की स्टोरी जो कुछ भी हमारे बीच हुआ वो साजन भाई आपको बतायेंगे।
मैं- प्रिया को नीचे छोड़ने के बाद मैं ऊपर उस रूम में गया जहाँ पारूल और मुकेश टी वी देख रहे थे, जैसे ही में रूम के पास पहुँचा तो मुझे पारुल की आवाज सुनाई दी।
वो कह रही थी कि मैं अभी कुछ देर में आ रही हूँ जब तक मैं रूम के अन्दर पहुँच गया था वो किसी से फ़ोन पर बात कर रही थी।
मैंने पारुल से पूछा तो उसने बताया कि उसकी सहली का फ़ोन है और उसको मुझसे कुछ हेल्प चाहिए, इसलिए वो मुझे बुला रही है और इतना कह कर वो तैयार होने लगी।
जब वो तैयार हो गई तो पारुल ने मुझसे पूछा- भाई प्रिया दीदी कहाँ है?
तो मैंने उसको बता दिया कि वो नीचे कमरे में है, शायद कोई काम कर रही है।
मेरी बात सुनकर पारुल ने उसी कमरे से आवाज लगाई- दीदी… प्रिया दीदी !
कई बार पुकारने पर प्रिया ने नीचे से आवाज दी- एक मिनट… अभी आ रही हूँ।
और कुछ देर बाद ही प्रिया ऊपर रूम में आ गई। 
प्रिया के आते ही पारुल ने प्रिया को बताया की उसकी सहेली ने उसको बुलाया है तो वो वहाँ पर जा रही है और मम्मी के आने से पहले वापस आ जाएगी।
प्रिया ने कहा- ठीक है, अभी 12:40 हुए हैं, मम्मी दोपहर 3 बजे तक आ जाएगी तो तुम 2:30 बजे तक वापस आ जाना, और हाँ एक काम ओर करना ! मुकेश को भी अपने साथ ले जाना। अगर यह यहाँ रहा तो भाई को परेशान करेगा और मुझे अभी बहुत सारा घर का काम करना है।
पारुल ने कहा- ठीक है दीदी, मैं मुकेश को साथ ले जाती हूँ !
और फिर पारुल ने मुकेश को अपने साथ चलने के लिए कहा तो वो भी तैयार होने लगा।
प्रिया ने मेरे करीब आकर मेरी आँखों में झांकते हुए कहा- मैंने ठीक किया न भाई !
इतना कह कर वो मुस्कुरा दी और मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गई।
प्रिया की आँखों में एक अजीब सी चमक दिखाई दे रही थी। उसकी आँखें वासना के कारण और भी नशीली हो गई थी।
यह सब उन मूवी का कमाल था जो अभी वो देखकर आई थी।
कुछ देर के बाद ही पारुल और मुकेश चले गए अब हम दोनों को छोड़कर यहाँ और कोई भी नहीं था।
मैं बेड पर बैठा टी वी देख रहा था।
पारुल और मुकेश के जाने के बाद प्रिया घर का मुख्य दरवाजा बंद करके मेरे पास बेड पर मेरे बहुत करीब ही बैठ गई।
वो लगातार मुझे ही देखे जा रही थी।
जब मुझे उसका आभास हुआ तो मैंने उसकी तरफ देखा।
वो मुझे देख कर मुस्कुरा दी, बदले में मैं भी उसको देखकर मुस्कुरा दिया।
फिर मैंने प्रिया से कहा- तुमने वो वीडियो देख लिए जो तुम देखने के लिए कह रही थी?
प्रिया ने कहा- हाँ भाई, वो मैंने देख ली पर वो खाली मसाज की वीडियो नहीं थी उसमें तो वो और भी कुछ कर रहे थे।
मैंने उससे कहा- तुमको कैसी लगी?
तो उसने कहा- बहुत अच्छी लगी पर उसको देखकर मुझे भी कुछ अजीब-अजीब सा हो रहा था। आपके मोबाईल में और भी वीडियो हैं पर पारुल ने बुला लिया नहीं तो वो सभी वीडियो में देख लेती।
मैंने प्रिया से कहा- अब देख लो… अब तो यहाँ कोई नहीं है तेरे और मेरे सिवा।
उसी वक़्त जैसे प्रिया को कुछ याद आया और वो बोली- भाई, अब तो घर में कोई नहीं है, आप मेरी मसाज कर दो न जैसे उस वीडियो में वो लड़का कर रहा था !
मैं प्रिया से बोला- प्रिया बस मसाज ही करनी है न या वो सब भी करवाओगी जो वो लड़का उस लड़की के साथ कर रहा था?
तो वो बोली- हाँ भाई, पूरी मसाज करनी है !
और वो कुछ शरमा कर बोली- जो वो सब कर रहा था, वो भी।
मैंने उससे कहा- वो तो मुझे दिखाई दे रहा है, ख़ैर छोड़ो इस बात को, अब तो वो सब ही करेंगे जो उस मूवी में वो लड़का और लड़की कर रहे थे।
फिर मैंने प्रिया से कहा- उसके लिए तुमको सारे कपड़े उतारने पड़ेंगे, क्या तुम ऐसा कर लोगी?
इस बार प्रिया ने अपने मुंह से बस इतना ही कहा- इतना सब होने के बाद भी आप पूछ रहे हो?
प्रिया की बात सुनकर इधर मेरा लण्ड फिर से अंगड़ाई लेने लगा था और वो धीरे धीरे खड़ा हो रहा था।
प्रिया मेरे लण्ड को अंगड़ाई लेता हुआ बड़े ही गौर से देख रही थी।
मैंने प्रिया को कहा- तुम कोई पुराने चादर ले आओ इस बेड पर बिछाने के लिए क्योंकि तेल के कारण यह साफ़ चादर खराब न हो जाए।
प्रिया कुछ ही पलों में एक पुरानी सी चादर ले आई, वो मैंने बेड के एक कोने में बिछा दी।
मैं ये सब कर तो रहा था पर मेरे मन में एक शंका हो रही थी !
कहीं मामी न आ जाये और हमारा प्रोग्राम अधूरा न रह जाए।
मैंने प्रिया को यह बात बताई- कहीं तेरी मम्मी आ गई तो बहुत बुरा होगा।
मेरी बात सुनकर प्रिया बोली- भाई, मैं एक मिनट में आई !
और इतना कह कर वो नीचे गई, कमरे से मेरा फ़ोन ले आई और वो बोली- मुझे मम्मी का नम्बर मिला कर दो।
तो मैंने उसको उसकी मम्मी का फ़ोन नम्बर मिला कर दे दिया।
कुछ देर बाद मामी ने फ़ोन उठाया तो प्रिया ने कहा- मम्मी आप कितनी देर में आओगी? क्योंकि भाई को खाना दिया था तो वो बोल रहे है जब मामी आ जाएगी तभी खा लूँगा।
प्रिया की बात सुनकर मामी ने दूसरी तरफ से कहा- तू अपने भाई को खाना खिला दे, मुझे यहाँ पर टाईम लग जाएगा। मैं तो 4 बजे तक ही आ पाऊँगी।
प्रिया ने कहा- ठीक है, मैं भाई को खाना खिला दूंगी।
और यह कह कर प्रिया ने फ़ोन काट दिया।
और फिर उसके बाद मुझे सारी बात बताते हुए प्रिया बोली- मम्मी 4 बजे से पहले नहीं आने वाली ! और पारुल और मुकेश भी 2:30 तक ही आयेंगे।
प्रिया की बात सुनकर अब पूरी तरफ पक्का हो गया कि आज प्रिया की चुदाई पक्की है।मैंने देखा भाई के लण्ड पर अभी भी कुछ बूंदें माल की उनके लण्ड पर रह गई थी। इसलिए मैंने अपनी जीभ निकली और भाई का लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया क्योंकि मैं अपने भाई का माल बर्बाद नहीं होने दे सकती थी।

मैं साजन- उसके बाद मैंने अपना लोअर ठीक किया और प्रिया से बोला– अब ऊपर चलते है क्योंकि हमें बहुत देर हो गई है।
प्रिया- हाँ भाई, ऊपर चलते हैं बहुत देर हो गई हैं। पर एक बात तो बताओ आप मेरी मसाज कब करोगे?
प्रिया ने कहा- वैसे भाई खाने का भी टाइम हो गया है आप कहो तो पहले खाना लगा दूँ?
मैंने कहा- अभी नहीं, भूख भी नहीं लग रही और फिर पहले यह काम ख़त्म कर लेते हैं, कहीं कोई आ गया तो यह भी अधूरा रह जाएगा।
प्रिया ने कहा- सही कह रहे हो भाई आप !
फिर मैंने प्रिया को तेल लाने को कहा तो प्रिया सरसों के तेल की शीशी ले आई।
मैंने प्रिया को कहा- अब तुम अपने कपड़े उतार कर इस चादर पर लेट जाओ।
मेरी बात सुन कर प्रिया अपने कपड़े उतारने लगी पर उससे कपड़े उतर नहीं रहे थे, अब उसको मेरे सामने शर्म आ रही थी उसे अपने कपड़े उतारते हुए।
मैं प्रिया की उलझन को समझ रहा था, और वैसे भी जब लड़की गर्म होती है और सेक्स के अधीन होती है तो उसकी शर्म गायब हो जाती है पर अब प्रिया को फिर से गर्म करना पड़ेगा तभी यह खुल कर मज़े दे पाएगी, इसलिए मैंने उससे कहा- एक काम करो, तुम मेरे मोबाईल में कोई मूवी देखो, तब तक मैं अपने कपड़े चेंज कर लेता हूँ, नहीं तो ये भी तेल में हो जायेंगे।

मैंने अपने फ़ोन में फिर वही फ़ोल्डर ओपन कर के प्रिया को दे दिया फिर मैं उसके सामने ही अपने कपड़े चेंज करने लगा।
मैंने पहले अपनी टी शर्ट उतारी, फिर मैंने अपना बनियान ऊपर दिया, फिर उसके बाद मैंने अपने लोअर भी उतार भी उतार दिया।
मैं प्रिया के सामने बिल्कुल नंगा खड़ा था और प्रिया मुझे एकटक देखे जा रही थी।
मैंने प्रिया से कहा- ऐसे क्या देख रही हो? वो जो तौलिया रखा है वो दे दो।
प्रिया मेरे खड़े होते हुए लण्ड को अपनी प्यासी निगाहों से देखते हुए अपने होठों पर अपनी जीभ फिरा रही थी।
जब प्रिया ने मुझे तौलिया नहीं दिया तो मैं नंगा ही उसके सामने पहुँच गया जैसे ही में उसके करीब पहुँचा तो प्रिया ने मेरा लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया।
मैंने अपने लण्ड को उसके हाथों से छुड़ाते हुए कहा- इसको बाद में पकड़ लेना, पहले मुझे वो तौलिया दो।
तो प्रिया बोली- भाई, आप ऐसे ही अच्छे लग रहे हो, और फिर तौलिया तो आपको उतरना ही पड़ेगा। तो उसे रहने ही दो।
मुझे उसकी बात ठीक लगी।
मैंने प्रिया को देखा, उसकी शर्ट के बटन सारे खुले हुए थे, उसके दोनों बूब्स सही से दिखाई दे रहे थे।
प्रिया के जिस्म पर अभी उसकी शर्ट मौजूद थी और उसका एक पैर दूसरे पैर पर रखा था जिससे उसकी योनि का क्या हाल है यह मुझे नजर नहीं आ रहा था।
प्रिया की गोदी में मेरा फ़ोन रखा हुआ था, मैंने देखा, फ़ोन में उस वक़्त चुदाई का सीन चल रहा था और प्रिया भी अब तक गर्म हो चुकी थी, वो मेरे लण्ड को ऊपर के नीचे अपने हाथ से कर रही थी।
मैंने प्रिया के कंधे पर अपना एक हाथ रखा तो उसका शरीर कांपने लगा।
अब मैं भी ज्यादा देर न करते हुए प्रिया की शर्ट उतारने लगा जिसमें प्रिया ने मेरी मदद की।
जब मैं प्रिया की शर्ट उतार रहा था तो उसने मोबाईल फ़ोन बंद करके एक तरफ रख दिया और फिर उसने अपनी आँखें बंद कर ली थी।
अब प्रिया ऊपर से पूर्ण रूप से नग्न हो चुकी थी, प्रिया के बूब्स मुझे साफ साफ दिखाई दे रहे थे।
उसके बूब्स तो पहले से ही सख्त थे पर वो अब और भी सख्त दिखाई दे रहे थे, उसके बूब्स की गुलाबी निप्पल तन चुकी थी।
मैंने अपने दोनों हाथ प्रिया के दोनों बूब्स पर रखते ही प्रिया के मुंह से स्स्स्सीईईईइ की आवाज आई।
उसके बाद मैं उसके बूब्स को सहलाने लगा और उनको हल्का हल्का दबाने भी लगा।
कमरे में प्रिया की आवाज ‘ऊउअन्न्हाह्ह्ह’ और भी ज्यादा होने लगी थी।
प्रिया की चूची पर मेरा हाथ लगते ही मेरा लण्ड भी सलामी देने लगा था और काफी हद तक तन गया था जो प्रिया अभी भी प्रिया के हाथों में था।
कुछ देर ऐसे ही प्रिया के बूब्स दबाता रहा, फिर मैंने प्रिया को उस चादर पर चलने के लिए कहा जो कुछ देर पहले ही प्रिया ने बिछाई थी।
अब प्रिया मेरी हर बात को सहजता से मान रही थी उसने अपनी आँखें खोली और उठ कर उस चादर पर जाकर खड़ी हो गई और मेरी तरफ़ देखने लगी जैसे मुझसे पूछ रही हो की उसको कैसे लेटना है।
मैं प्रिया की मौन भाषा को समझ गया और उसको बोला- रुको, पहले तुम्हारे बचे हुए कपड़े निकाल देता हूँ।
प्रिया मेरी बात सुनकर हल्की सी मुस्कुराई और फिर उसने अपनी आँखें बंद कर ली।
दोस्तो, मैंने उसकी एक बात नोटिस की वो यह कि अब प्रिया मुझसे बात नहीं कर पा रही थी जैसा वो पहले कर रही थी, बस अपनी आँखों के इशारे से ही मुझे बता देती थी।
मैं भी प्रिया के पास पहुँच गया, उसके चेहरे को देखा तो उसकी आँखें बंद थी।
मैंने अपने दोनों हाथ उसकी कमर पर रखे तो उसकी सांसें थोड़ी ओर जोर से चलने लगी।
फिर मैंने प्रिया के स्कर्ट के हुक को खोल दिया और आहिस्ता आहिस्ता उसकी स्कर्ट को नीचे की ओर सरकने लगा।
जैसे जैसे मैं उसकी स्कर्ट को नीचे कर रहा था वैसे वैसे प्रिया की चूत बेपर्दा हो रही थी।
मुझे यह देखकर हैरानी हुई कि अभी कुछ देर पहले तो उसने पेंटी पहनी हुई थी पर अब उसके जिस्म पर पेंटी नहीं थी।
मैंने प्रिया से पूछा- तुमने पेंटी कब उतार दी?
तो प्रिया शर्माते हुए बोली- भाई, जब नीचे मैं मूवी देख रही थी वो मैंने तभी उतार दी थी।
इतना कह कर वो फिर चुप हो गई और मैं उसकी नंगी चूत देख रहा था।
बड़ा ही मस्त नजारा था उस वक़्त, जब उसकी स्कर्ट पूरी नीचे हो गई तो मैंने प्रिया को कहा- अपना पैर उठाओ, स्कर्ट निकालनी है।
जैसे प्रिया ने मेरी आवाज सुनी तो वो जैसे होश में आई हो, उसने मेरी तरफ देखा और फिर अपनी तरफ देखा और जैसे ही उसने अपने आपको देखा तो उसको अहसास हुआ कि वो पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी है।
तुरन्त ही उसने अपने एक हाथ से अपने वक्ष को ढक लिया और दूसरे हाथ से अपनी योनि को छुपा लिया जबकि एक एक हाथ से बूब्स और योनि को छुपा पाने में असमर्थ हो रही थी।
उसकी आँखें मुझे ही देख रही थी और मैं तो प्रिया के यौवन को निहार रहा था।
मैंने अब बिना कुछ कहे उसके पैर को अपने एक हाथ से पकड़ा और उसको थोड़ा सा ऊपर उठाने लगा।
अब की बार प्रिया ने अपना पैर थोड़ा सा ऊपर किया तो मैंने उसकी स्कर्ट एक पैर से निकाल दी, फिर वैसा ही मैंने उसके दूसरे पैर को ऊपर किया और पूरी स्कर्ट उसके जिस्म से अलग करके एक तरफ रख दी।
अब वो सम्पूर्ण रूप से मेरे सामने नंगी खड़ी थी अपने यौवन के खजाने को छुपाये हुए।
मेरा लण्ड उतेजना के मारे ऊपर नीचे हो रहा था जोकि उसे साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था क्योंकि मैं तो पहले से ही नंगा हो चुका था।फिर हम ने चुदाई का पूरा मज़ा लिया।  अब हम दोनों बहुत कुश है।

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