वो हरामी चाची की चूत बहोत मारता हैं.

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18 का ही था जब मेरी जिन्दगी में यह घटना बनी. घर में कामवाली आती थी जिसके साथ मुझे प्यार हो गया था. प्यार कहो या सेक्स, सब सेम हैं. कामवाली को मैं एक शॉट के 100 रूपये देता था और बदले में वो मुझे लंड चूस देती थी और पिचकारी अंदर ना मारने की शर्त पे चूत में भी डालने देती थी. लेकिन कहते हैं ना की प्यार को दुनिया की नजर लग ही जाती हैं. ऐसा ही कुछ हुआ मेरे किचन में जन्मे और किचन में ही मरे हुए प्यार के साथ. एक दिन मैं कामवाली को किचन में अपने बटवे से पैसे दे रहा था तब पता नहीं कहाँ से कंचन चाची वहां आ गई. उसने मुझे पूछा की किस चीज के पैसे दे रहे हो. मैंने तो छुट्टे दे रहा था कह के बात को टाल दिया और वहाँ से खिसक लिया.

लेकिन मेरी हरामी चाची ने कामवाली को डांट के उस से सब बात उगलवा ली. कामवाली ने उसे कह दिया की मैं उसे चोदता हूँ और वो मुझे ओरल सेक्स भी देती हैं. मैं किचन के सामने के कमरे के दरवाजे के पीछे छिप के देख रहा था की चाची ने कामवाली को पकड के रखा हैं और वो उस से बातें उगलवा रही हैं. मुझे अपने माँ बाप का उतना डर नहीं था लेकिन मेरे चाचा बहुत खराब हैं. चाचा चाची को भी लकड़ी से मारते हैं फिर हमें तो वो छोड़ेंगे ही नहीं ना. मैं मनोमन प्रार्थना करने लगा की चाचा को कहीं बता ना दे चाची जी. कंचन चाची चाचा के मुकाबले ज्यादा पढ़ी लिखी हैं और खुबसूरत भी. सच जानें अभी तक मेरे दिल में चाची के लिए कोई बुरा ख्याल नहीं था.

चाची तभी किचन से बहार आई और वो मेरी माँ के कमरे में गई. मुझे लगा की गई भेंस पानी में; चाची सब माई को बोल देंगी. चूत में लंड नहीं अब मेरी गांड में डंडे पड़ेंगे. चाची 5 मिनिट में बहार आई और उसने आवाज लगाईं, “कुनाल, कहा हों तुम? बहार आओ मुझे कुछ काम हैं?”

मैं सहमी निगाहों से बहार आया. चाची ने मुझे देखा और वो हंस के बोली, आओ मेरे कमरे में. मैंने तुम्हारी माई को बताया हैं की तुम्हारा कुछ काम हैं इसलिए तुम ऊपर रहोंगे आधी घंटा.

मैं डरते डरते चाची के पीछे चल पड़ा. चाचा जी तो प्रात काल: ही दूकान को चले गए थे बाबु जी के साथ. घर में अब मेरे अलावा कोई मर्द नहीं था. चाची ने कमरे में घुसते ही दरवाजा बंध किया और सक्कल लगा दी. फिर उसे मेरी और देख के कहा, तो तुझे चूत में देने का बड़ा सौख हैं कुनाल. कामवाली अनीता ने मुझे सब बताया हैं की तू पॉकेटमनी का क्या सही यूज़ कर रहा हैं. अब बता मैं चाचा जी को बताऊँ या तेरे बाबु जी को. माई तो तेरी कुछ करेंगी नहीं.

मैंने चाची जी के सामने हाथ जोड़े और कहा, नहीं चाची जी मैं आप जो कहेंगी वो करूँगा लेकिन कृपया किसी को मत कहना.

सोच ले, फिर मैं जो कहूँगी वही करना पड़ेंगा, कोई सवाल किये बिना.

जरुर चाची जी मैं आप जो कहेंगी वही करूँगा बिना कोई सवाल किये.

पक्का…?

एकदम पक्का चाची जी.!

फिर अपनी पतलून उतार और अपनी लूल्ली दिखा मुझे!

बाप रे चाची जी यह क्या कह रही थी. मैं सहम गया. चाची कही मेरी परीक्षा तो नहीं ले रही थी. मैंने पेंट नहीं खोली.

क्यूँ रे अभी तो कह रहा था की सब करूँगा, इतने में ही गांड फट गई तेरी. चल पेंट खोल वरना अभी तेरे चाचू को मोबाइल लगाती हूँ.

मैं समझ गया की चाची सच में यह चाहती थी की मैं पेंट खोलूं. क्या वो भी अपनी चूत में लेना चाहती थी मेरा लंड?

मैं पतलून खोल के निचे फेंकी. चाची मेरे लंड से चड्डी के ऊपर बनता हुआ आकार देख के चौंक पड़ी.

मैं तो समझती थी की तेरी लूल्ली होंगी लेकिन तेरा तो लंड बना हुआ हौं. कितनी बार अनीता की चूत में डाला हैं तूने?

एक दो बार ही चाची जी.

सट्टाक…..चाची का एक लाफा मेरे गाल पे आ गया.

जूठा बेन्चोद, अनीता ने कहा की तू उसे डेढ़ महीने से चोद रहा हैं हर चौथे दिन और तेरी गणित कुछ और ही कहती हैं.

नहीं चाची जी, ऐसा नहीं हैं…! मैं पहले सिर्फ उसे टच करता था, फिर सब करने लगा.

अच्छा तो चूत में कितनी बार डाला हैं उसकी तूने?

10-11 बार से ज्यादा नहीं.

ठीक हैं, मुझे मजे देंगा आज?

क्या, मैं समझा नहीं चाची जी?

सट्टाक, फिर से एक तमाचा गाल पे आ पड़ा. चाची ने अपनी ब्लाउज को साइड में किया और अपनी ब्रा को मेरे सामने ही खोलने लगी.

ये ले चूस इसे मादरचोद.

मैं चाची के पास गया और उसके चुंचे चूसने लगा. चाची ने मेरी अंडरवेर पकड के निचे सरका दी. मेरा लंड चाची के सामने था जिसे वो पकड के चेक कर रही थी. मैंने चाची की ब्रा जो बिच में अड़चन दे रही थी उसे हटा दिया और चाची के बूब्स को सही तरह चूसने लगा. चाची ने मेरे कान पकडे और वो उसे बड़े ही निर्दय तरीके से खींचने लगी. मुझे दर्द हो रहा था लेकिन उसे तो जैसे इसकी परवाह ही नहीं थी. चाची ने अब कहा चल चुंचे बहुत चुसे अब चूत में मुहं डाल अपना.

चूत में मुहं डाल मादरचोद

18 का ही था जब मेरी जिन्दगी में यह घटना बनी. घर में कामवाली आती थी जिसके साथ मुझे प्यार हो गया था. प्यार कहो या सेक्स, सब सेम हैं. कामवाली को मैं एक शॉट के 100 रूपये देता था और बदले में वो मुझे लंड चूस देती थी और पिचकारी अंदर ना मारने की शर्त पे चूत में भी डालने देती थी. लेकिन कहते हैं ना की प्यार को दुनिया की नजर लग ही जाती हैं. ऐसा ही कुछ हुआ मेरे किचन में जन्मे और किचन में ही मरे हुए प्यार के साथ. एक दिन मैं कामवाली को किचन में अपने बटवे से पैसे दे रहा था तब पता नहीं कहाँ से कंचन चाची वहां आ गई. उसने मुझे पूछा की किस चीज के पैसे दे रहे हो. मैंने तो छुट्टे दे रहा था कह के बात को टाल दिया और वहाँ से खिसक लिया.

लेकिन मेरी हरामी चाची ने कामवाली को डांट के उस से सब बात उगलवा ली. कामवाली ने उसे कह दिया की मैं उसे चोदता हूँ और वो मुझे ओरल सेक्स भी देती हैं. मैं किचन के सामने के कमरे के दरवाजे के पीछे छिप के देख रहा था की चाची ने कामवाली को पकड के रखा हैं और वो उस से बातें उगलवा रही हैं. मुझे अपने माँ बाप का उतना डर नहीं था लेकिन मेरे चाचा बहुत खराब हैं. चाचा चाची को भी लकड़ी से मारते हैं फिर हमें तो वो छोड़ेंगे ही नहीं ना. मैं मनोमन प्रार्थना करने लगा की चाचा को कहीं बता ना दे चाची जी. कंचन चाची चाचा के मुकाबले ज्यादा पढ़ी लिखी हैं और खुबसूरत भी. सच जानें अभी तक मेरे दिल में चाची के लिए कोई बुरा ख्याल नहीं था.

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चाची तभी किचन से बहार आई और वो मेरी माँ के कमरे में गई. मुझे लगा की गई भेंस पानी में; चाची सब माई को बोल देंगी. चूत में लंड नहीं अब मेरी गांड में डंडे पड़ेंगे. चाची 5 मिनिट में बहार आई और उसने आवाज लगाईं, “कुनाल, कहा हों तुम? बहार आओ मुझे कुछ काम हैं?”

मैं सहमी निगाहों से बहार आया. चाची ने मुझे देखा और वो हंस के बोली, आओ मेरे कमरे में. मैंने तुम्हारी माई को बताया हैं की तुम्हारा कुछ काम हैं इसलिए तुम ऊपर रहोंगे आधी घंटा.

मैं डरते डरते चाची के पीछे चल पड़ा. चाचा जी तो प्रात काल: ही दूकान को चले गए थे बाबु जी के साथ. घर में अब मेरे अलावा कोई मर्द नहीं था. चाची ने कमरे में घुसते ही दरवाजा बंध किया और सक्कल लगा दी. फिर उसे मेरी और देख के कहा, तो तुझे चूत में देने का बड़ा सौख हैं कुनाल. कामवाली अनीता ने मुझे सब बताया हैं की तू पॉकेटमनी का क्या सही यूज़ कर रहा हैं. अब बता मैं चाचा जी को बताऊँ या तेरे बाबु जी को. माई तो तेरी कुछ करेंगी नहीं.

मैंने चाची जी के सामने हाथ जोड़े और कहा, नहीं चाची जी मैं आप जो कहेंगी वो करूँगा लेकिन कृपया किसी को मत कहना.

सोच ले, फिर मैं जो कहूँगी वही करना पड़ेंगा, कोई सवाल किये बिना.

जरुर चाची जी मैं आप जो कहेंगी वही करूँगा बिना कोई सवाल किये.

पक्का…?

एकदम पक्का चाची जी.!

फिर अपनी पतलून उतार और अपनी लूल्ली दिखा मुझे!

बाप रे चाची जी यह क्या कह रही थी. मैं सहम गया. चाची कही मेरी परीक्षा तो नहीं ले रही थी. मैंने पेंट नहीं खोली.

क्यूँ रे अभी तो कह रहा था की सब करूँगा, इतने में ही गांड फट गई तेरी. चल पेंट खोल वरना अभी तेरे चाचू को मोबाइल लगाती हूँ.

मैं समझ गया की चाची सच में यह चाहती थी की मैं पेंट खोलूं. क्या वो भी अपनी चूत में लेना चाहती थी मेरा लंड?

मैं पतलून खोल के निचे फेंकी. चाची मेरे लंड से चड्डी के ऊपर बनता हुआ आकार देख के चौंक पड़ी.

मैं तो समझती थी की तेरी लूल्ली होंगी लेकिन तेरा तो लंड बना हुआ हौं. कितनी बार अनीता की चूत में डाला हैं तूने?

एक दो बार ही चाची जी.

सट्टाक…..चाची का एक लाफा मेरे गाल पे आ गया.

जूठा बेन्चोद, अनीता ने कहा की तू उसे डेढ़ महीने से चोद रहा हैं हर चौथे दिन और तेरी गणित कुछ और ही कहती हैं.

नहीं चाची जी, ऐसा नहीं हैं…! मैं पहले सिर्फ उसे टच करता था, फिर सब करने लगा.

अच्छा तो चूत में कितनी बार डाला हैं उसकी तूने?

10-11 बार से ज्यादा नहीं.

ठीक हैं, मुझे मजे देंगा आज?

क्या, मैं समझा नहीं चाची जी?

सट्टाक, फिर से एक तमाचा गाल पे आ पड़ा. चाची ने अपनी ब्लाउज को साइड में किया और अपनी ब्रा को मेरे सामने ही खोलने लगी.

ये ले चूस इसे मादरचोद.

मैं चाची के पास गया और उसके चुंचे चूसने लगा. चाची ने मेरी अंडरवेर पकड के निचे सरका दी. मेरा लंड चाची के सामने था जिसे वो पकड के चेक कर रही थी. मैंने चाची की ब्रा जो बिच में अड़चन दे रही थी उसे हटा दिया और चाची के बूब्स को सही तरह चूसने लगा. चाची ने मेरे कान पकडे और वो उसे बड़े ही निर्दय तरीके से खींचने लगी. मुझे दर्द हो रहा था लेकिन उसे तो जैसे इसकी परवाह ही नहीं थी. चाची ने अब कहा चल चुंचे बहुत चुसे अब चूत में मुहं डाल अपना.

चाची ने अपनी पेटीकोट को हटाया और अंदर की पेंटी मुझे हटाने को कही. बाप रे चाची की चूत तो जैसे किसी चिड़िया का घोंसला थी. उसकी चूत के सभी तरफ सिर्फ बाल ही बाल थे. मुझे ऐसी चूत देख के गले में वोमिट जैसे फिल होने लगा. लेकिन चाची ने धक्का दे के मेरे मुहं चूत में धर दिया. फिर वो पलंग के ऊपर टाँगे चौड़ी कर के बैठ गई. उसने मुझे कहा, चाट मेरी चूत को, चूत में से मुहं निकाला तो चाचा को कह दूंगी तेरे.

मैं चूत में अपनी जबान डाल के जोर जोर से चाटने लगा और चाची मुझे कंधे के ऊपर जोर जोर से मार के चूत को और भी जोर से चाटने को कहने लगी. मैंने अपनी जबान चाची की चूत के छेद में डाली हुई थी और मैं उसे बड़े सटीक तरीके से चाट रहा था. फिर भी चाची मुझे कंधे के ऊपर मारती ही जा रही थी. चाची की चूत में से अलग ही स्मेल आ रही लेकिन मैं अपनी नाक को बंध रख के उसे चूसता ही रहा. चाची ने अब एक हाथ से अपनी चूत को फाड़ी और अंदर की चमड़ी को बहार निकाल के बोली, इसे अपनी जबान से खिंच और ऊपर के दाने को दांतों के बिच में दबा जोर से.

मैंने जैसा चाची ने कहा वैसे ही किया, चाची अब मुझे मार नहीं रही थी क्यूंकि चूत की चटाई से उसकी बस हुई पड़ी थी. वो खुद अपने हाथ से अपने बूब्स दबा रही थी और मुझे चूत में और अंदर तक जबान डालने को कह रही थी. उसका बदन हिलने लगा था और वो चूत को मेरे मुहं के ऊपर रगड़ने लगी थी. चाची के बदन में जैसे की झटके लग रहे थे. और ऐसे ही झटको के बिच में उसकी चूत में से पानी निकल पड़ा. चाची मेरे मुहं के ऊपर ही झड़ गई. उसने मेरे बाल पकडे और बोली, चूत में से निकली हुई एक एक बूंद को पी ले. मैंने मुहं खोल के उस खारे पानी को पूरा के पूरा पी डाला. दो मिनिट में ही चाची शांत हो गई और उसने मुझे धक्का दे दिया.

मुझे लगा की अब चाची कहेंगी की मेरी चूत में डाल.

लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं हुआ. ऊपर से चाची ने कहा, तू मूठ मार ले, चूत में लेना मुझे पसंद नहीं हैं. मैं एक लेस्बियन हूँ लेकिन समाज के दबाव में तेरे चाचा से शादी की हैं. वो हरामी मेरी चूत बहोत मारता हैं. मैं ऐसे फिल करती हूँ जैसे की मुझ [पे रेप हो रहा हो. लेकिन क्या करूं वो हरामी बड़ा निर्दयी हैं इसलिए उसे चूत देनी पड़ती हैं. तू मुठ मार के चुपचाप निकल ले और जब मैं कहूँ मेरी चूत में जबान डालने आ जाया कर.

मैं वही बैठ के लंड को हिलाने लगा. दो मिनिट के बाद जब मेरा माल बहार आया तो चाची उसे देखती ही रह गई. फिर वो उठी और उसने एक टांग उठाई. उसकी चूत में से पेशाब की धार निकली जो मेरे बदन पे गिरने लगी. मैं उठ भी नहीं सकता था. उसने पेशाब खत्म कर के कहा, क्यूँ तुम लोग ऐसे ही पेशाब करते हो ना…ही ही ही ही….! चाची का यह रूप देख के मैं दंग रह गया था. और उसका एक रूप और भी हैं जो मैं आप को फिर कभी किसी कहानी में बताऊंगा, यह कहानी चाची ने मेरी गांड डिलडो से मारी थी उसकी हैं……!

चाची ने अपनी पेटीकोट को हटाया और अंदर की पेंटी मुझे हटाने को कही. बाप रे चाची की चूत तो जैसे किसी चिड़िया का घोंसला थी. उसकी चूत के सभी तरफ सिर्फ बाल ही बाल थे. मुझे ऐसी चूत देख के गले में वोमिट जैसे फिल होने लगा. लेकिन चाची ने धक्का दे के मेरे मुहं चूत में धर दिया. फिर वो पलंग के ऊपर टाँगे चौड़ी कर के बैठ गई. उसने मुझे कहा, चाट मेरी चूत को, चूत में से मुहं निकाला तो चाचा को कह दूंगी तेरे.

मैं चूत में अपनी जबान डाल के जोर जोर से चाटने लगा और चाची मुझे कंधे के ऊपर जोर जोर से मार के चूत को और भी जोर से चाटने को कहने लगी. मैंने अपनी जबान चाची की चूत के छेद में डाली हुई थी और मैं उसे बड़े सटीक तरीके से चाट रहा था. फिर भी चाची मुझे कंधे के ऊपर मारती ही जा रही थी. चाची की चूत में से अलग ही स्मेल आ रही लेकिन मैं अपनी नाक को बंध रख के उसे चूसता ही रहा. चाची ने अब एक हाथ से अपनी चूत को फाड़ी और अंदर की चमड़ी को बहार निकाल के बोली, इसे अपनी जबान से खिंच और ऊपर के दाने को दांतों के बिच में दबा जोर से.

मैंने जैसा चाची ने कहा वैसे ही किया, चाची अब मुझे मार नहीं रही थी क्यूंकि चूत की चटाई से उसकी बस हुई पड़ी थी. वो खुद अपने हाथ से अपने बूब्स दबा रही थी और मुझे चूत में और अंदर तक जबान डालने को कह रही थी. उसका बदन हिलने लगा था और वो चूत को मेरे मुहं के ऊपर रगड़ने लगी थी. चाची के बदन में जैसे की झटके लग रहे थे. और ऐसे ही झटको के बिच में उसकी चूत में से पानी निकल पड़ा. चाची मेरे मुहं के ऊपर ही झड़ गई. उसने मेरे बाल पकडे और बोली, चूत में से निकली हुई एक एक बूंद को पी ले. मैंने मुहं खोल के उस खारे पानी को पूरा के पूरा पी डाला. दो मिनिट में ही चाची शांत हो गई और उसने मुझे धक्का दे दिया.

मुझे लगा की अब चाची कहेंगी की मेरी चूत में डाल.

लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं हुआ. ऊपर से चाची ने कहा, तू मूठ मार ले, चूत में लेना मुझे पसंद नहीं हैं. मैं एक लेस्बियन हूँ लेकिन समाज के दबाव में तेरे चाचा से शादी की हैं. वो हरामी मेरी चूत बहोत मारता हैं. मैं ऐसे फिल करती हूँ जैसे की मुझ पे रेप हो रहा हो. लेकिन क्या करूं वो हरामी बड़ा निर्दयी हैं इसलिए उसे चूत देनी पड़ती हैं. तू मुठ मार के चुपचाप निकल ले और जब मैं कहूँ मेरी चूत में जबान डालने आ जाया कर.

मैं वही बैठ के लंड को हिलाने लगा. दो मिनिट के बाद जब मेरा माल बहार आया तो चाची उसे देखती ही रह गई. फिर वो उठी और उसने एक टांग उठाई. उसकी चूत में से पेशाब की धार निकली जो मेरे बदन पे गिरने लगी. मैं उठ भी नहीं सकता था. उसने पेशाब खत्म कर के कहा, क्यूँ तुम लोग ऐसे ही पेशाब करते हो ना…ही ही ही ही….! चाची का यह रूप देख के मैं दंग रह गया था. और उसका एक रूप और भी हैं जो मैं आप को फिर कभी किसी कहानी में बताऊंगा, !

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