बेटे से चुदवाकर चूत जवान हो गई

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम गीता जायसवाल है और में नेपाल से हूँ. में विधवा हूँ, मेरी उम्र 40 साल है और में पिछले 4 सालो से लंड के लिए तरस रही हूँ. मेरा बेटा रशु जो बाहर पढ़ता है, जिसकी उम्र 19 साल है. में काफ़ी सेक्सी, लंबी, गोरी, खूबसूरत हूँ. एक बार मेरा बेटा रशु मेरे घर गर्मीयों की छुट्टियों में रहने आया हुआ था, वो दिखने में सेक्सी है, उसकी बॉडी अच्छी है. जब भी में उसे देखती थी तो पता नहीं क्यों मेरी चूत में सरसराहट होती थी? में बहुत ही कामुक 40 साल की औरत हूँ.

में हर समय संभोग के लिए बेचैन रहती हूँ, लेकिन विधवा होने से कई साल तक मैंने चुदाई का मज़ा नहीं लिया था और में हर समय अपनी चूत चुदवाने के तरीके सोचती रहती हूँ. में रोज नहाते समय हस्त मैथुन भी करती हूँ, लेकिन इससे भी मेरे बदन की भूख लगातार बढ़ ही रही थी. में जब भी रशु की छाती के बालों को देखती हूँ, तो में उत्तेजित हो जाती थी.

अब रात के 12 बज रहे थे, अब में और रशु पास-पास के रूम में सो रहे थे, उसके रूम की खिड़की खुली हुई थी और अंदर नाईट बल्ब जल रहा था. अब मुझे नींद नहीं आ रही थी, में पूरी तरह से उत्तेजित थी और मेरी चूत का कोना-कोना जल रहा था. तभी मैंने सोचा कि टॉयलेट के बाद मेरी चूत की गर्मी कुछ शांत हो जाएगी, तो में टॉयलेट करने को उठी. तो तभी मैंने देखा कि रशु के रूम का नाईट बल्ब जल रहा है. फिर में टॉयलेट करके लौटकर आई तो मैंने सोचा कि क्यों ना रशु को सोते हुए देखते हुए में उत्तेजित होकर हस्तमैथुन कर लूँ? लेकिन जैसे ही मैंने अंदर देखा तो मेरी पूरी चूत में सरसराहट दौड़ गई. अब मेरा बेटा रशु अपना मोटा लंड अपने हाथ में लिए सहला रहा था और उसे तेज़ी से झटके दे रहा था.

अब ये सब देखते ही मेरी चूत सुलगने लगी थी तो में उसे लगातार देखती रही. फिर तभी मैंने देखा कि रशु के हाथ में मेरी पेंटी थी, अब वो उसे पागलों की तरह सूँघे जा रहा था, उसने वो अलमारी में से निकाल ली होगी. अब वो मेरी पेंटी को चाट रहा था, फिर मुझसे संभोग की प्यास बर्दाश्त नहीं हो पाई तो मैंने धक्का देकर उसके रूम का दरवाजा खोल दिया और उसके रूम में घुस गई. अब मुझे देखते ही रशु ने अपने लंड को अपने हाथ में दबा लिया था. फिर में मुस्कुराते हुए बोली कि ये क्या कर रहे हो बेटा? तो वो कुछ नहीं बोला.

फिर में उसके पास चली गई और उसके लंड की तरफ देखती हुई बोली कि उसे क्यों ऐसे छुपा रहे हो? मैंने तो सब देख लिया ही है. तो वो बोला कि आप मेरी मम्मी है, आप अपने रूम में जाइए ना, ये सब ठीक नहीं है.

फिर मैंने अपनी साड़ी को ऊपर करके उठा दिया, तो वो बोला कि ये क्या कर रही है मम्मी? यहाँ से जाइए ना, लेकिन वो मेरी और देख रहा था, इससे मुझे लगा कि वो थोड़ा झिझक रहा है. फिर मैंने अपनी चूंची को पूरी तरह से नंगा कर दिया और उससे कहा कि रशु तुम्हें मेरी कसम, मेरी प्यास बुझा दो बेटा, में कब से आग में जल रही हूँ. फिर तब उसने हल्के से मेरी चूंची को सहलाया और रूम लॉक कर दिया.

तब मैंने रशु के लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी. फिर उसने मेरी साड़ी को उतार दिया और इसके बाद उसने एक-एक करके मेरा ब्लाउज, पेटीकोट भी खोल दिया. अब में ब्लेक पेंटी पहने थी, अब मेरी पेंटी पूरी गीली हो रही थी. फिर उसने मेरी पेंटी में अपना हाथ डाल दिया तो में सिसकने लगी और फिर उसने मेरी पेंटी नीचे सरकाकर मेरी चूत को उजागर कर दिया और बहुत ध्यान से मेरी चूत को देखने लगा. फिर मैंने उसका हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख लिया और कहा कि मेरी चूत को चाटो रशु. तो वो बोला कि मम्मी अपनी टाँगे फैला लो, अब मेरी चूत जमकर अपना पानी छोड़ रही थी.

अब 4 साल के बाद पहली बार मेरे लड़के ने मेरी चूत को सहलाया था. फिर वो मेरी चूत को चूसने लगा तो में ज़ोर से बोली कि चूसो मेरी चूत को, चाट लो पूरा. अब वो भी पूरा उत्तेजित हो गया था और तेज़ी से मेरी चूत को चूसने लगा था. अब मेरा भी मन उसका लंड चूसने का कर रहा था, तो जब मैंने उसका लंड चूसने की कोशिश की तो वो आनाकानी करने लगा. लेकिन में नहीं मानी और उसके लंड को अपने मुँह में डालकर मुख मैथुन करने लगी. अब में अपने बेटे के लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी थी.

अब उसकी खुशबू मुझे पागल कर रही थी, फिर धीरे-धीरे रशु अपनी कमर हिलाने लगा, तो में समझ गई कि अब उसका मन भी चुदाई के लिए मचल रहा है. तो मैंने उसी समय रशु का लंड अपने मुँह से निकाल दिया और अपनी चूत फैलाकर बोली कि रशु अब घुसा दो अपने लंड को अपनी माँ की चूत में, चोद लो जी भरकर अपनी माँ की चूत को, मेरी सालों की प्यास बुझा दो बेटा. फिर रशु ने मेरी चूत की तरफ देखा और अपने लंड को आगे बढ़ाकर अपना लंड मेरी चूत के मुहाने पर रख दिया और उसे अंदर धकेलने लगा, अब में तो जैसे स्वर्ग में थी.

फिर मैंने उससे धक्का लगाने को कहा तो उसने धक्का मारा, तो उसका लंड मेरी चूत के अंदर चला गया, तो उसी पल मैंने ज़ोर से सिसकारी ली. अब वो बहुत खुश हो गया था और ये सोचकर कि मुझे मज़ा आ गया, उसका लंड वैसे ही मोटा था इसलिए मुझे दर्द ज्यादा ही महसूस हो रहा था, लेकिन थोड़ी ही देर में मेरा दर्द मज़े में बदल गया.

फिर में बोली कि वाह बेटा और कसकर चोदो मेरे सैय्या और कसकर पैलो मेरे राजा, फाड़ दो मेरी चूत को रशु और कसकर, क्या मस्त पेल रहे हो रशु? मज़ा आ गया, मेरी जान चोदो चोदते जाओ. फिर वो रुकने लगा तो मैंने मना कर दिया और कहा कि चुदाई कर दे मेरी चूत की, में कब से चुदने को तरस रही हूँ.

फिर उसके बाद वो तेज़ी से अपने लंड से मेरी चूत में धक्के लगाने लगा. अब में मज़े की वजह से सिसकने लगी थी और अब थोड़ी देर के बाद मुझे भी बहुत ही ज़्यादा मज़ा आने लगा था. अब मैंने अपनी पूरी बॉडी को टाईट कर लिया और तेज़ी से साँसे लेने लगी थी. अब मैंने रशु की पीठ को पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी थी. अब मैंने जोश में आकर उसकी पूरी पीठ पर जगह-जगह अपने नाख़ून चुभा दिए थे.

अब में पूरी तरह से जानवर बन गई थी, अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. अब वो अपने हाथों से मेरे निपल्स दबा रहा था और ज़ोर-जोर से धक्के लगा रहा था. अब मेरी चूत से लगातार पानी निकल रहा था, जो बाहर निकलकर नीचे मेरी जांघो पर जा रहा था. फिर अचानक से मेरे शरीर में झटका सा लगा. अब में अपनी अंतिम सीमा पर पहुँचने ही वाली थी तो में जोर से चिल्लाई रशु मेरा हो रहा है और ज़ोर से चोद बेटा और ज़ोर से चोद. तभी वो बोला कि मम्मी मेरा भी होने वाला है और धक्के लगाते-लगाते वो मुझसे चिपक गया और उसने मेरे हिप्स पकड़ लिए और फिर में भी उसके साथ ही झड़ गई.

अब मुझे झड़ते टाईम बहुत अच्छा लगा था, फिर वो झड़ने के बाद भी 1 मिनट तक मेरी चूत में अपना लंड रगड़ता रहा. अब मुझे ये बहुत अच्छा लग रहा था, फिर में उसके लंड को अपनी चूत में से बाहर निकालकर अपने मुँह में डालकर चूसने लगी. फिर थोड़ी देर के बाद हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े पहन लिए और में अपने रूम में आ गई. फिर उस दिन के बाद से जब भी मेरा मन करता है, तो में अपने बेटे से जी भरकर चुदवाती हूँ. रशु के चोदने से मेरी चूत पूरी तरह से जवान हो गई है.

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