बुआ के साथ बेड पर मस्ती

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रिंकू है और में एक गोरा अच्छा दिखने वाला 22 साल का लड़का हूँ. दोस्तों आज में आप सभी लोगों के लिए अपनी एक सच्ची चुदाई की घटना और मेरा पहला वो सच्चा सेक्स अनुभव लेकर आया हूँ जिसमे मैंने बहुत मज़े लिए और में उम्मीद करूंगा कि यह कहानी आप सभी जरुर अच्छी लगेगी, क्योंकि में सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और यह सब मुझे बड़ा अच्छा लगता है.

दोस्तों मैंने अपने 12th के पेपर देने के बाद अपने पापा की सबसे छोटी बहन जिसका नाम सुमन है उनको चोदा, मतलब मेरी बुआ. में उस समय अपनी छुट्टियाँ होने की वजह से उनके घर पर अपनी छुट्टियाँ बिताने गया था. दोस्तों मेरी बुआ सुमन एक 35 साल की गोरी थोड़ी मोटी मॉर्डन दिखने वाली बड़ी सेक्सी थी. मेरी बुआ और फूफाजी की शादी को पूरे दस साल हो चुके थे, लेकिन उनको अब तक अपना कोई बच्चा नहीं था.

दोस्तों मेरे फूफाजी रेलवे में एक बहुत बड़े ऑफिसर थे और मेरी बुआ शादी में दुल्हन को तैयार और उसको सजाने संवारने का काम करती थी. उन दोनों की अपनी जिंदगी बहुत प्यार से बीत रही थी और वो दोनों बहुत खुश थे. दोस्तों में 14 मई को अपने स्कूल की गर्मियों की छुट्टियाँ लगने पर सूरत से पूना मेरी बुआ के घर पर पहुंच गया और जब में पहुंचा तो मैंने दरवाजे पर लगी घंटी को बजाया.

मेरी बुआ ने आकर अपने घर का दरवाजा खोलते ही बहुत खुश होकर मुझसे कहा क्यों रिंकू कैसे हो यह बात बोलते हुए उन्होंने मुझे धीरे से अपने गले लगा और लिया मुझे उनका यह व्यहवार हमेशा से ही बहुत अच्छा लगता इसलिए मेरी अपनी बुआ से बहुत अच्छी बनती है. दोस्तों में अपनी बुआ को करीब चार साल के बाद मिल रहा था, इसलिए वो मुझे देखकर चकित होने के साथ साथ बहुत खुश भी थी. उस समय बुआ ने जींस और एक बहुत टाईट टीशर्ट पहनी हुई थी उन कपड़ो में उनके शरीर के हर एक अंग की बनावट का ठीक आकार बाहर से ही नजर आ रहा था.

फिर मुझे अंदर बुलाकर उन्होंने मुझे मुहं हाथ धोने के बाद चाय और नाश्ता बनाकर दिया और उन्होंने भी मेरे साथ बैठकर बातें हंसी मजाक करके चाय का पूरा मज़ा लिया. फिर वो कुछ देर बाद मुझसे बोली कि रिंकू तुमने बहुत अच्छा किया जो तुम यहाँ पर आ गए, क्योंकि तुम्हारे फूफाजी चार दिन के लिए नासिक गए हुए है और मेरे पास फिलहाल अभी कोई भी काम नहीं है इसलिए में भी घर पर अकेली बोर हो रही हूँ. तुम्हारे आ जाने से मेरा भी तुम्हारे साथ मन लगा रहेगा और फिर बुआ ने मेरे बेग से कपड़े निकालकर उनको वो अलमारी में रखने लगी.

दोस्तों मेरी बुआ के बूब्स उनकी टी-शर्ट में बहुत आकर्षक आकार में थे और उनकी गांड तो बस आप पूछिए ही मत मोटी और पीछे से बाहर आकर थोड़ी सी ऊपर निकली हुई थी. दोस्तों मेरी बुआ का घर एक बेडरूम, हॉल और किचन का था. फिर में नहाने के लिए बाथरूम में चला गया और में बाथरूम में नहा रहा था कि तभी अचानक से मेरी नज़र मेरी बुआ की ब्रा और उनकी पेंटी पर पड़ गई और फिर मैंने जैसे ही उनकी पेंटी को अपने हाथ में लिया कि कुछ ही सेकिंड में मेरा लंड पूरा का पूरा तनकर खड़ा हो गया, क्योंकि मेरी बुआ की वो पेंटी बहुत आकर्षक थी, जिसको देखकर मेरा लंड अपने आप पर काबू नहीं कर सका और बुआ की वो पेंटी कमर से बहुत बड़े आकार की थी और अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया और में बिल्कुल पागल मदहोश होकर जाने क्या मन में सोचकर बुआ की पेंटी को अपने चेहरे से लगाकर दूसरे हाथ से अपने खड़े लंड को धीरे धीरे हिलाकर सहलाकर उनके नाम से मुठ मारने लगा.

मुझे यह सब करने में बड़ा मज़ा आ रहा था और में उस समय किसी दूसरी दुनिया में पहुंच चुका था वो सब अहसास में किसी भी शब्दों में आप लोगों को नहीं बता सकता कि मैंने उस समय क्या क्या महसूस किया? तभी कुछ देर बाद बुआ ने बाहर से आवाज़ लगाई और वो मुझसे पूछने लगी कि रिंकू तुम खाने में क्या खाओगे? तो मैंने उनसे कहा कि आप कुछ भी बना दो और बुआ की आवाज़ सुनते ही मेरे लंड से पानी निकल गया.

फिर मैंने अपने लंड को अच्छी तरह से धोकर साफ किया और में नहाकर कुछ देर बाद बाहर आ गया और उसके बाद मैंने और बुआ ने एक साथ में बैठकर दोपहर का खाना खा लिया. अब हम दोनों उसके बाद टीवी चालू करके फिल्म देखने लगे और ऐसे ही यहाँ वहां की बातें करते हुए दोपहर और उसके बाद शाम भी निकल गयी मुझे पता ही नहीं चला.

फिर रात के करीब 10.30 बज चुके थे और उस समय भी में टीवी देख रहा था और बुआ अपने हाथ में टावल लेकर बाथरूम की तरफ जाते हुए मुझसे बोली कि रिंकू तुम हॉल में मत सोना वहां पर बहुत गरमी है, में नहाने जा रही हूँ और तुम तब तक बेडरूम में जाकर ऐसी चालू करके सो जाना. फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है और फिर में बुआ के कहने पर उनके बेडरूम में ऐसी चालू करके शॉर्ट्स और टीशर्ट को पहनकर बुआ के उस बेड पर जाकर लेट गया और मेरे कुछ देर लेटे रहने के बाद बुआ भी बाथरूम से नहाकर सीधी बेडरूम में आ गई.

फिर मैंने अचानक से देखा कि बुआ गरमी ज्यादा होने की वजह से सिर्फ़ एक पतली सी टी-शर्ट जो सिर्फ़ उनकी पेंटी को ढक रही थी और बुआ की मोटी गोल गोरी जांघे पूरी तरह से मुझे साफ दिख रही थी. में वो सब कुछ देखकर बहुत चकित था और फिर बुआ अपने दोनों हाथों से अपने बालों को ठीक करते हुए मेरे पास में बेड पर मुझसे गुड नाइट बोलकर लेट गई, लेकिन अब यहाँ पर मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी थी और मेरी शॉर्ट्स में मेरा लंड पूरी तरह से तनकर खड़ा हो चुका था और फिर में करीब आधे घंटे तक सिर्फ़ बुआ के बारे में सोच रहा था.

फिर कुछ देर बाद मैंने बुआ की तरफ देखा तो वो अपनी कमर को मेरी तरफ करके सो चुकी थी, लेकिन मुझसे अब रहा ना गया और मैंने थोड़ी हिम्मत करके अपना एक हाथ बुआ की गांड की तरफ सरकाते हुए अपनी दो उँगलियों से मैंने बुआ की टी-शर्ट को हल्के से पकड़कर एक साईड से उनकी कमर से ऊपर तक कर दिया जिसकी वजह से अब मुझे बुआ की गोरी मोटी गांड उस सफेद रंग की सिल्की पेंटी में उस हल्की लाइट की रोशनी में साफ साफ दिख रही थी.

अब मेरी हालत कुछ ऐसी हो गई थी कि उसका परिणाम चाहे कुछ भी आए और मैंने अब पूरी तरह से जोखिम लेने की बात मन ही मन सोच ली थी. मैंने अपनी पूरी हथेली धीरे से बुआ की गांड के एक तरफ से खुले हुए पूरे हिस्से पर रख दिया और तब मैंने महसूस किया कि बुआ की गांड की चमड़ी बहुत मुलायम और चिकनी थी, वो बिल्कुल अलग अहसास था जिसको में किसी भी शब्दों में नहीं लिख सकता और अब में अपनी ऊँगली से बुआ की गांड को सहलाने लगा, लेकिन बुआ अभी भी बड़ी गहरी नींद में सोई हुई थी और उनको किसी भी बात का होश नहीं था, क्योंकि वो शुरू से ही बड़ी गहरी नींद में सोती है और यह बात मुझे पहले से ही पता थी.

फिर मैंने कुछ देर बाद अपनी कमर को सरकाते हुए बुआ की गांड के पीछे हल्के से अपना तनकर खड़ा लंड चिपका दिया और तब मैंने महसूस किया कि बुआ की गांड इतनी मुलायम थी कि मेरे लंड का टोपा उनकी गांड के बीच की मुलायम दरार में फंसा हुआ था.

उनकी गांड की गरमी को पाकर मेरे अंदर एक अजीब सा जोश आ गया और मैंने जल्दी से अपना शॉर्ट्स नीचे करके अपना लंड बाहर निकाल लिया और अब मैंने अपनी ऊँगली से बुआ की गांड के ऊपर से पेंटी को थोड़ा सा साइड में कर दिया और उसके बाद मैंने अपना लंड बुआ की गांड की दरार के बीच में दबा दिया जिसकी वजह से अचानक से बुआ ने अपनी सांसे रोक ली और वो अपने मुहं से शीईईईइई करके दर्द भरी आवाज़ करने लगी. मैंने उस आवाज को सुनकर डरकर तुरंत अपने आप को वहीं उसी जगह पर रोक दिया, लेकिन मुझे बिल्कुल भी पता नहीं चला कि यह किस तरह की आवाज़ थी.

फिर एक मिनट के बाद मैंने महसूस किया कि सब कुछ वापस पहले जैसा हो गया है और अब मेरा लंड पूरी तरह से बुआ की गांड की मुलायम चमड़ी से चिपका हुआ था और कुछ देर थोड़ा सा इंतजार करने के बाद मैंने अपने एक हाथ की ऊँगली से बुआ के एक कूल्हे को ऊपर करके मैंने अपना लंड गांड के बीच में ले जाकर पेंटी को किनारे से हटाते हुए बुआ की जांघो में ज़ोर से धक्का देते हुए अपने लंड को चूत के अंदर डाल दिया जिसकी वजह से बुआ ने एक बार फिर से शीईईईई अईईईईई करके दर्द भारी आवाज़ निकाली, लेकिन अब मेरी हालत ऐसी थी कि वो अगर जाग भी रही हो या सो रही हो मुझे उस बात से कोई भी फर्क नहीं पड़ने वाला था और में अब रुकने वाला नहीं था. मुझे कैसे भी करके अब अपने खड़े लंड को शांत करना था और उनकी चूत में अपना वीर्य निकालकर अपने लंड का काम खत्म करना था.

फिर चाहे उसके लिए मुझे अब कुछ भी करना पड़े, मुझे उस बात से कोई मतलब नहीं था और में उस समय बहुत जोश में था.

दोस्तों अब मेरा मोटा, लंबा लंड पूरा का पूरा बुआ की गरम खुली हुई चूत की मुलायम चमड़ी में अपनी जगह बना था और कुछ देर बिना किसी हलचल के पड़े रहने के बाद में अब सही मौका देखकर अपनी कमर को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा. मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था और मेरा लंड बुआ की गीली चिकनी चूत में फिसलता हुआ अंदर बाहर हो रहा था और में अपने काम में लगातार लगा रहा और अचानक से करीब दस मिनट के बाद मेरे शरीर में बड़ा अजीब सा हुआ और मेरे लंड से बहुत सारा गरम गरम वीर्य बाहर निकाला जो मेरे लंड के चूत बाहर होने की वजह से वो थोड़ा सा बुआ की चूत में जा गिरा और थोड़ा सा बुआ की पेंटी और उनकी गोरी जांघो पर गिर गया और मैंने महसूस किया कि वीर्य के बाहर निकलते ही मेरा लंड कुछ ही देर बाद मुरझाने लगा और उसका आकार अब धीरे धीरे छोटा होने लगा.

फिर मैंने बुआ की पेंटी और टी-शर्ट को पहले की तरह ठीक करने के बाद में अपने कपड़ो को भी ठीक करके बुआ से थोड़ा दूर सरकते हुए लेट गया. तभी तुरंत बुआ बेड से उठ खड़ी हुई और वो बाथरूम में होकर आई और वो दोबारा मेरे पीछे आकर सो गयी और फिर में भी गहरी नींद में चला गया.

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