बहन की इज्जत पर वार किया

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम हृदय है और में आज सभी लोगो को अपनी एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ, जो कुछ समय पहले मेरे साथ घटित हुई है. दोस्तों उस समय मेरी उम्र 21 साल थी में और मेरा छोटा चचेरा भाई पीताम्बर पढ़ाई के लिए शहर गये और वहां पर हमने एक कमरा किराया पर ले लिया और हम दोनों की पढ़ाई ठीक तरह से से चल रही थी.

मेरा भाई उस समय 10th में था और में 12th क्लास में पढ़ता था. एक दिन मेरे चचेरे भाई के मामा आए और वो उससे बोले कि तुम लोग देवकुमारी जो उनकी लड़की थी, उसको भी साथ में रख लो तो यह भी तुम्हारे साथ रहकर अपनी पढ़ाई करेगी और तुम उसकी पढ़ाई में मदद भी कर देना. दोस्तों देवकुमारी भी 10th क्लास का प्राईवेट पेपर दे रही थी और अब हम सभी लोग उस एक कमरे में ज़मीन पर ही सोते थे और मन लगाकर अपनी पढ़ाई किया करते थे और हमेशा एक दूसरे की मदद भी किया करते थे. हम तीनों बहुत खुश थे. वैसे दोस्तों देवकुमारी दिखने में अच्छी लगती थी, उसका बदन पूरा भरा हुआ एकदम सेक्सी लगता था.

वैसे मेरी उसके बारे में ऐसी सोच बिल्कुल भी नहीं थी और मैंने कभी भी उसको अपनी गंदी नजर से नहीं देखा था, लेकिन वो हमेशा मुझसे बहुत हंस हंसकर बातें किया करती थी और मेरे ज्यादा ही करीब आने की हमेशा कोशिश किया करती थी. तब तक मुझे उसके इरादों के बारे में या उसके मन में मेरे लिए क्या चल रहा है उसके बारे में बिल्कुल भी पता नहीं था, लेकिन उस घटना के बाद मुझे सब कुछ बहुत अच्छी तरह से समझ में आ गया था कि वो मुझसे क्या चाहती है?

दोस्तों हमारे कमरे के पास वाले कमरे में मेरी क्लास का एक लड़का रहता था. वो और में क्लास में साथ ही बैठते थे. उसका नाम चंदन था और एक सप्ताह गुजर जाने के बाद मुझे एक दिन पता चला कि चंदन उसे मतलब कि देवकुमारी को मन ही मन चाहने लगा था.

यह बात मुझे खुद देवकुमारी ने बताई, लेकिन मुझे बहुत बाद में पता चला कि देवकुमारी शुरू से ही मुझसे अपनी चुदाई का ख्याल अपने मन में रखती थी. फिर एक दिन हम लोग खाना खाकर उठे थे और देवकुमारी ने मुझसे पूछा कि क्या तुमने यह प्रेमपत्र रखा है? उसके मुहं से वो बात सुनकर में बहुत चकित रह गया. मैंने कहा कि नहीं मैंने तो नहीं रखा, लेकिन फिर भी उसे लगा कि में उससे मज़ाक कर रहा हूँ. दोस्तों उस दिन किस्मत से मेरा चचेरा भाई किसी काम से उसके गाँव गया हुआ था और चंदन वो खत देवकुमारी के नाम पर अपने मन की सभी बातें उसमे लिखकर उस जगह पर रखकर डर जाने की वजह से वो भी अपने गाँव चला गया, जिसको पढ़कर देवकुमारी ने सोचा कि वो पत्र मैंने उसके लिए लिखा था.

फिर उस रात को में मेरे दोस्त चंदन के कमरे में सोने चला गया और देवकुमारी हमारे कमरे में अकेली सोई हुई थी कुछ देर बाद में पढ़ने बैठ गया, तभी अचानक से देवकुमारी मेरे कमरे में आ गई और वो मुझसे पूछने कि क्यों तुमने ही वो खत रखा था ना?

तब मैंने उससे कहा कि लाओ तुम मुझे भी एक बार दिखाओ तो उसमे ऐसा क्या लिखा हुआ है, लेकिन वो एक बार फिर से वही सब दोहराई बोली कि तुमने ही रखा था ना वो खत, लेकिन उसने मुझे वो खत नहीं दिखाया.

फिर मैंने जानने के लिए कह दिया कि हाँ मैंने ही रखा था वो खत और उसके बाद उसने मुझे वो खत दिखाया तो में उसको देखकर एकदम दंग रह गया, क्योंकि वो तो मेरे दोस्त की लिखावट थी और उसमें अपने प्यार का इजहार ऐसे ऐसे शब्दों में किया था कि मुझे भी उसको पढ़ना अब धीरे धीरे अच्छा लगने लगा और तब मैंने देवकुमारी से कहा कि यह खत मैंने नहीं लिखा है और तुम मेरे बारे में ऐसा कैसे सोच सकती हो? तो वो अब मुझसे पूछने लगी कि फिर किसने इसको लिखा होगा? तो मैंने जवाब दिया कि यह खत मेरे दोस्त चंदन का लिखा हुआ लगता है, वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर एकदम गुस्से से लाल हो गयी और कहने लगी कि आने दो उसको, में उसको इस हरकत का मज़ा चखाती हूँ और में अपने पापा को भी यह बात बताउंगी तो वो उसकी खाल उधेड़ देंगे.

फिर मैंने उसको शांत करते हुए कहा कि हाँ ठीक है तुम कहो तो में ही उसको सबक सीखा दूँगा, मेरे डर से ही वो भागा हुआ है कि अगर तुम उसको हाँ नहीं बोली तो में उसका भर्ता बना दूँगा. फिर वो कुछ देर मुझसे बातें करती रही और थोड़ा रोती भी रही. यह तो औरतो की आदत होती है आपको ज्यादा बताने की ज़रूरत नहीं है.

कुछ देर के बाद वो उठी और अपने कमरे में चली गयी और उसके थोड़ी देर के बाद मुझे नींद आ गई, लेकिन पता नहीं उसको नींद आई नहीं और दो घंटे बीत जाने के बाद उसने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया. मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि वो अपने बिछाने के बिस्तर और एक शाल को अपने हाथ में लेकर खड़ी हुई थी और में उसको अंदर आने के लिए कहता कि उससे पहले वो खुद ही अंदर आ गयी और वो मुझसे बोली कि मुझे अकेले सोने में डर लग रहा है. में अकेले उस कमरे में नहीं सो सकती.

फिर मैंने भी उससे कह दिया कि ठीक है तुम भी यहीं पर सो जाओ और उसके बाद हम दोनों एक फिट की दूरी में सोने लगे.

फिर कुछ देर बाद मैंने देखा कि उसे अब ठंडी लगने लगी थी, इसलिए मैंने उससे कहा कि तुम मेरे पास में आ जाओ और मैंने अपना कंबल भी उसे उढ़ाते हुए में और वो एक दूसरे के मुहं दूसरी दिशा में करके सो गये, लेकिन अब ना तो मुझे नींद आ रही थी और ना उसे, कभी में करवट बदलता तो कभी वो और कैसे नींद आ सकती है? एक जवान लड़की वो भी बहुत सेक्सी और एक जवान लड़का जब एक दूसरे से सटकर लेटे हुए तो नींद कैसे आती? अब मेरे लंड की मोटाई बढ़ने लगी और मैंने बिल्कुल अंजान बनकर उसे अपनी बाहों में भरते हुए में उससे चिपक गया और उसे ऐसा अहसास दिलाया कि जैसे में नींद में हूँ.

वो भी मुझसे वैसे ही पेश आई और फिर हम दोनों के मुहं आमने सामने हो गए और हम दोनों की साँसे एक दूसरे से टकराने लगी और हम दोनों के धड़कने धीरे धीरे अब बहुत तेज़ हो रही थी. फिर में तुरंत समझ गया कि इसकी चूत में भी अब खुजली होना शुरू हो गई है और फिर मैंने अपना मुहं उसके गाल से चिपका दिया. उसने ऐसा व्यवहार किया कि जैसे वो गहरी नींद में है और में बहुत डर भी रहा था कि जिसकी इज़्ज़त का जिम्मा मैंने लिया था, उसी की इज़्ज़त पर में आज वार कर रहा हूँ.

फिर मैंने उसके होंठो को अपने होंठो से छू दिए तो उसने भी मेरे और नज़दीक आकर मेरी हिम्मत और ज्यादा बढ़ा दी तो मैंने उसको जमकर एक चुम्मा ले लिया. अब उसने जागने का बहाना किया और वो भी मुझे चूमने लगी.

मैंने उसके मुहं में अपनी जीभ को अंदर डाल दिया तो वो मेरी जीभ को चूसने लगी, लेकिन कुछ देर बाद उसने मेरे मुहं में अपनी जीभ को अंदर डाल दिया और तब मैंने उसकी जीभ को चूसना शुरू किया तब मुझे एहसास हुआ कि क्या किसी की जीभ भी इतनी मीठी हो सकती है? फिर मैंने उसके दोनों बड़े बड़े बूब्स को एक एक करके दबाना शुरू किया, वाह क्या बड़े मुलायम थे? आज से पहले मैंने किसी के बूब्स को नहीं दबाया था और उसके बूब्स दबाते मेरा लंड इतना खड़ा हो गया था कि कोई उसमे झूल जाता तो भी नीचे नहीं झुकते. फिर मैंने हिम्मत बढाई और अब मैंने उसके कपड़ो के अंदर से हाथ डालकर उसके बूब्स को दबाना शुरू किया उसके बाद मैंने थोड़ी सी और हिम्मत जुटाई और अब मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोलना चाहा, लेकिन उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, लेकिन थोड़ी देर के बाद उसने ना जाने क्या सोचकर झट से छोड़ दिया.

मैंने नाड़ा ना खोलकर उसकी सलवार में सीधा ही अपना हाथ अंदर डाल दिया, तब मैंने छूकर महसूस किया कि उसकी पेंटी गीली हो गयी थी. वैसे मुझे मालूम था कि वो क्या चीज़ है, क्योंकि मैंने ब्लूफिल्म में कई बार देखा था. अब में पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा और तभी उसने एक बार फिर से मेरा हाथ पकड़ लिया मैंने अपने दूसरे हाथ से उसके हाथ को हटा दिया और फिर उसकी पेंटी के अंदर अपना हाथ डाल दिया और जब मैंने कुछ देर बाद उसकी चूत के छेद में अपनी एक उंगली डाली तो वो चीख पड़ी.

उसने कहा कि प्लीज ऐसा मत करो, नहीं तो में बदनाम हो जाउंगी प्लीज. फिर मैंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं होगा, तुम्हे सम्भालने के लिए में हूँ ना और इतना कहकर मैंने एक बार ज़ोर से उसको किस किया और उसने भी मेरे किस का जवाब किस करके दिया. अब मैंने उससे पूछा कि क्यों पेंटी को उतरना है? उसने कहा कि तुम जो चाहे वो कर लो, में तो आई हूँ तब से रोज रात को तुम्हारे ही सपने देखती हूँ.

फिर मैंने भी कहा कि हाँ जब से मैंने तुम्हे देखा है, मुझे भी कहाँ चैन है मेरी रानी? फिर इतना कहकर मैंने उसकी सलवार को पूरी तरह से उतार दिया और में भी अब पूरी तरह से नंगा हो गया उसके बाद मैंने उसको पैरों को ऊपर उठाने के लिए कहा तो वो शरमा सी गयी और बोली कि नहीं मुझे शरम आ रही है. मैंने कहा कि अब क्या शरमाना?

फिर वो चुप हो गयी और मैंने ही उसके दोनों पैरों को पकड़कर ऊपर की तरफ उठा दिया, जिसकी वजह से उसकी चूत मेरे सामने पूरी खुल गई और फिर मैंने अपने लंड का टोपा उसकी खुली हुई गीली चूत के मुहं पर रख दिया और धीरे से धक्का दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर जाने लगा.

दोस्तों उसकी सील अब तक टूटी नहीं थी, इसलिए चूत बहुत ही ज्यादा टाइट थी और लंड को अंदर डालने में मुझे बहुत ज़ोर लगाना पड़ा. फिर मैंने एक बार फिर से ज़ोर का धक्का दिया तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया और उसके मुहं से एक बहुत ज़ोर की चीखने की आवाज़ आई ऊईईईइ माँ में मर गई, वो दर्द की वजह से एकदम तड़पने लगी और में उसको देखकर तुरंत समझ गया कि यह उसकी सील टूटने की वजह से था, जो अभी तक नहीं टूटी थी. सील टूटने से तो मानो वो मर ही गयी ऐसे ज़ोर से चिल्लाई आईईईईई मुझे बहुत दर्द हो रहा है उफफ्फ्फ्फ़ स्सीईईईईई बाहर निकालो इसको प्लीज.

फिर मैंने उसको समझाते हुए कहा कि रात का समय है ज़ोर से मत चिल्लाओ वर्ना बाहर कोई सुन लेगा, तब उसने कहा कि तुम्हारा लंड बहुत मोटा है, जिसकी वजह से मुझे बहुत दर्द हो रहा है आह्ह्ह्ह में मर जाउंगी प्लीज बाहर निकालो इसको, तो मैंने उससे कहा कि अभी थोड़ी देर के बाद तुम्हे ज्यादा दर्द नहीं होगा, तुम थोड़ा सा सब्र करो और थोड़ी सी शांत जो जाओ.

फिर में उसके ऊपर लेट गया और मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में आधा अंदर और आधा बाहर निकला हुआ था और मैंने एक बार फिर से उसको किस करना शुरू किया. उसके पूरे बदन को सहलाने लगा तो उसको अच्छा लगने लगा वो शांत होकर पहले जैसी होने लगी और तभी थोड़ी देर बाद जब उसका दर्द बहुत कम हो गया और फिर उसने मुझसे कहा कि अब तुम मुझे हल्के धक्के देकर चोदो, मेरा दर्द अब कम हो गया है, तो फिर क्या था?

दोस्तों में धक्के देने के काम में शुरू हो गया और में अपने लंड को उसकी चूत में आगे पीछे करने लगा और वो भी अपनी गांड को अब ऊपर उठा उठाकर हल्के से धक्के देकर मेरा साथ देने लगी और मुझे चोदने का मज़ा दे रही थी. फिर कुछ देर लगातार धक्के देने के बाद जब में झड़ने वाला था तब मैंने अपना लंड चूत से बाहर निकालकर उसके मुहं में डाल दिया और वो लंड को चूसने लगी और में हल्के धक्के देने लगा. फिर कुछ देर बाद मैंने अपना वीर्य उसके मुहं में निकाल दिया, जिसकी वजह से उसका पूरा मुहं भर गया जिसको वो पी गई और उसने चाट चाटकर मेरा लंड चमका दिया और दोबारा से चुदाई के लिए खड़ा कर दिया, वो अपनी उस चुदाई से मुझे बहुत खुश और संतुष्ट नजर आ रही थी. दोस्तों यह थी मेरी चुदाई की कहानी जिसमे मैंने उसके साथ बहुत मज़े लिए और उसके बाद भी हमने बहुत बार जब भी मौका मिलता चुदाई के मज़े लिए और हम दोनों बहुत खुश थे.

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