निराला हैं मस्तानी मामी चूत का मजा

मस्तानी मामी उनका असली नाम नहीं है लेकिन मैं उन्हें इसी नाम से बुलाता हूँ, वो दरअसल हमारे मोहल्ले में रहती थीं लेकिन बाद में उनके पति यानि हमारे मोहल्ले के जगत मामा जी ने कॉलोनी में बंगला बनवा लिया तो वहीँ शिफ्ट हो गए. मस्तानी मामी जिस दिन से शादी हो कर आई थी उसी दिन से मोहल्ले के लौंडों में रौनक आगई थी, क्यूंकि मस्तानी मामी सबसे हंस हंस कर बात करती और जब मामा जी बाहर जाते तो उनका ज़्यादातर वक़्त अपने घर की छत पर मोहल्ले में बैठे जवान लौंडों से नैन मटक्का करते ही बीतता था. मैं उस वक़्त छोटा था, समझ सब आता था लेकिन करने में गांड फटती थी और फिर घरवालों का डर अलग से.

वक़्त गुज़रा और मैं भी अब बड़ा हो चला था, सोचता था की बड़ा हो कर मस्तानी के चूचे दबाऊंगा, लेकिन मस्तानी मामी के मोहल्ले से जाने के बाद सब लौंडे भी अपने अपने काम में बिजी हो गए क्यूंकि टॉपिक जो चला गया था बात करने का, इधर मैं भी अपने एक्साम्स वगेरह से फ्री हो कर कॉलेज की तलाश में लगा हुआ था. कट ऑफ लिस्ट आई और मेरा शहर के एक जाने माने कॉलेज में एडमिशन हो गया, एक दिन जब मैं कॉलेज जा रहा था तो लगा की कोई मुझे पुकार रहा था. पलट कर देखा तो वो मस्तानी मामी थीं जो स्कूटी से गिर गईं थीं, मैं दौड़ा और जा कर उन्हें उठाया स्कूटी खड़ी की और पूछा मामी जी कहीं लगी तो नहीं.

मामी जी ने कहा “नहीं नहीं लगी तो नहीं बस यूँ ही फिसल गई थी” मामी के बड़े और रसीले चूचे देख कर मेरा मन खुश हो गया लेकिन फिर ध्यान गया उनकी फटी सलवार की तरफ जिस में से उनकी जाँघ साफ़ दिख रही थी. मैंने मामी का ध्यान फटी सलवार की तरफ किया तो वो शर्मा गई फिर मैंने अपना विंड शीटर उन्हें दिया जिसे उन्होंने अपनी कमर के गिर्द बांध लिया और स्कूटी स्टार्ट कर के उन्हें दी. शायद मामी को चोट लगी थी और वो स्कूटी संभाल भी नहीं पा रही थी तो मैंने कहा “मामी मैं आपको घर छोड़ देता हूँ” उन्होंने जवाब दिया “थैंक यू सोनू”.

अब मैं मामी की स्कूटी चला  रहा था और वो पीछे से मुझे कास के पकडे बैठी थी, उनके चूचे मेरी पीठ को टच कर रहे थे और स्पीड ब्रेकर के बहाने वो उन्हें मेरी पीठ से मसल भी रही थी. मैंने सोचा भेनचोद ये मामी कभी नहीं सुधरेगी, उन्होंने एक घर की तरफ इशारा किया तो पता चला यही उनका बंगला है. मैं उस बंगले को देखता ही रह गया, इतना बड़ा और आलीशान बँगला मामा ने कैसे बना लिया उस चूतिये की तो सरकारी नौकरी थी. खैर अपने को क्या ये सोच कर मैंने मामी को वहीँ उतारा और कॉलेज के लिए निकलने लगा. मामी ने मुझे बहुत रोका पर मुझे वैसे ही बहुत लेट हो गया था, हालाँकि मन में चाह तो बहुत हुई पर अब मैं उन बचकानी बातों के लिए खुद को बड़ा समझता था.

घर जा कर जब सब चीज़ों से फ्री हुआ तो मामी के चूचों की याद आई उनका स्पर्श याद आया और याद आया की मेरे पास भी लंड है और फिर भी मैं चूतिया उस हसीं मोमेंट को वहीँ छोड़ आया जब मैं मामी के इतना करीब था और वो बुला भी रही थी, क्या पता फ़ोकट में चुदाई करने मिल जाता. इस बात के लिए मुझे खुद पर बे-इन्तहा  गुस्सा आया और ये गुस्सा मैंने अपने लंड को जोर जोर से हिला कर निकाला. खैर रात गई बात गई लेकिन मामी के घर के पास ही कॉलेज होने की वजह से मैं मन ही मन रोज़ सोचता की शायद कहीं दिख जाए और घर बुला ले बस चुदाई तो मैं कर ही लूँगा.

और वो दिन आया भी जब मैं कॉलेज के फेस्ट की तैयारी के लिए दौड़ भाग कर रहा था तो मामी मुझे मार्किट में ही मिल गई, ये मार्किट उनके घर के पास ही में था. मामी ने उस दिन के लिए मुझे थैंक यू कहा और घर आने के लिए भी कहा तो मैंने कहा “जी वो अभी तो कॉलेज फेस्ट की तैयारी में लगा हूँ” तो वो बोली “अरे तो शाम को आजाना फ्री हो कर मैं तो घर में ही रहती हूँ”. मैंने सोच लिया की आज तो गुरु काम किसी और को पकड़ा के जाना पड़े तो भी जाऊँगा, आखिर फ्री की चुदाई का सवाल था.

अपने दोस्त विमल को बाकी का काम संभला कर मैं आधे घंटे में ही फ्री हो गया और मामी के घर पहुँचा तो वहां गेट पर एक कुत्ते ने भौंक भौंक के मेरी गांड फाड़ दी, मामी बाहर आई और मुझे अन्दर ले गई. थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने के बाद मामी ने मुझे चाय नाश्ता दिया, मेरे घरवालों के बारे में पूछा पढ़ी वगेरह की जानकारी ली लेकिन सेक्स की कोई बात नहीं की ना ही आज अपने चुचे दिखाए और ना ही मेरी जांघ पर हाथ फेरा. तो फिर मोहल्ले भर के लड़के किस मामी की बातें करते थे, क्या ये सुधर गई थी या वो कोई और मामी थी जिसके बारे में मोहल्ले के लड़के तरह तरह की बातें करते थे.

मैंने चाय पीते पीते मामा के बारे में उनके इस बंगले के बारे में बातें की तो पता चला की मामा तो अभी दुबई गए हुए हैं और साल में एक दो बार ही आते हैं, अब मुझ से ये इधर उधर की बातें भी नहीं हो रहीं थीं क्यूंकि मुझे सेक्स नहीं मिल रहा था. बड़ी देर तक बेकार की बकचोदी से बोर हो कर मैंने अपने चूतिये दिमाग की जगह समझदार लंड से सोचना शुरू किया और सोचा कि सीधे ही पूछ लूँ “मामी सेक्स करोगी मेरे साथ”. लेकिन फिर चूतिये दिमाग ने कहा भेनचोद अगर ये भड़क गई तो, या फिर अगर इसने घर पर बता दिया तो, या कोई आ गया तो. अब मुझसे प्रेशर सहन नहीं हो रहा था तो मैं अपने लंड के आगे हार गया और मैंने चाय का कप टेबल पर रखते हुए कहा “मामी मैं आपके साथ सेक्स करना चाहता हूँ”.

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मामी हंस पड़ी और बोली “ये आईडिया कहाँ से आया तुझे” तो मैं बोला “बचपन से आपके बारे में सुनता आरहा हूँ की मस्तानी मामी जिस पर महरबान हो कर घर बुलाती हैं उसे जम कर सेक्स का मज़ा देती हैं” वो फिर  हँसी और बोली “अच्छा और क्या क्या सुनता आरहा है तू”. मैंने एक साँस में वो सब बता दिया जो उस वक़्त मोहल्ले के लौंडे कहते थे और उनकी कहानियाँ सुनाते थे और साथ में यह भी कहा की उस दिन जब आप मेरे पीछे स्कूटी पर चिपक के बैठी थी तो आपके चुचे मेरी पीठ पर आप मसल भी तो रही थी जिसकी वजह से मुझे घर जा कर मुठ मारनी पड़ी.

मैं बोले जा रहा था और मामी हँसे जा रही थी, मैंने कहा “अब इस में हँसने की क्या बात है, जब आपके जैसी माल चुचे मसले तो लंड खड़ा हो ही जाता है”. मामी मेरे पास आ कर बैठी और मेरे चेहरे को पकड़ कर बोली “ऐसा है सोनू बेटा, मैंने मोहल्ले भर में किसी को अपनी चूत नहीं दी. मैंने बस लोगों से यूँही हंस बोल लेती थी और लौंडे खुद ही मेरे घर आ कर थोड़ी देर बकचोदी  कर के चले जाते थे और शायद उसी को वो बाहर जा कर नमक मिर्च लगाकर सुनाते होंगे”. मैं हैरान सा सुन रहा था और वो बोले जा रही थी “हाँ मैं शादी के बाद नहीं बदली और सबसे हंस बोल लेती थी लेकिन इसका मतलब ये नहीं की मैं सबसे मरवाती फिरती हूँ, मेरे पति का लंड मेरे लिए काफी था और वो मुझे अच्छी तरह से चोदते थे इसीलिए मैं इतनी खुश मिजाज़ थी”.

उन्होंने बोलना जारी रखा “मोहल्ले वाले अपनी सोच से कभी ऊपर नहीं उठेंगे लेकिन तू तो समझदार बच्चा है कॉलेज जाता है, तुझे तो अक्ल होनी चाहिए और वैसे तेरी उम्र ही क्या है, बेटा मुझे देने के लिए लंड है भी तेरे पास” बस इतना बोल कर वो जब हँसी तो मुझे लगा मेरी इन्सुल्ट हो गई है सो मैं खड़ा हुआ और वहां से जाने लगा लेकिन एक आखिर जवाब था मेरे पास जो मैंने उन्हें अपनी पेंट खोल कर दिखा दिया और कहा “मुझे नहीं पता की आपकी बातें सच हैं या मोहल्ले वालों की लेकिन मेरे लंड पर शक मत करना है मेरे पास लंड और ये रहा, देख ले और बस अब मैं जा रहा हूँ”.

मेरा लंड देख कर मामी की आँखें फट गई क्यूंकि मेरा लंड नोर्मल्ली ही काफी बड़ा और मोटा था तो खड़ा होने के बाद तो ये कहर ही ढा देगा, मामी ने मुझे रोका अपने पास बिठाया और कहा “देख ये सच है की मैं पूरे मोहल्ले से नहीं चुदी लेकिन मोहल्ले के एक आदमी ने मुझे चोद चोद कर चमन बना दिया था और वो आदमी तेरा बाप था. और आज देख रही हूँ की तेरे बाप की तरह ही तेरा भी लंड एक दम पहलवान लंड है”. अब हैरान होने की बारी मेरी थी क्यूंकि मेरे पापा मामा जी के अच्छे दोस्त थे और उन्हें इस मोहल्ले में लाए भी वही थे, फिर मामी ने बताया की उनकी और मामा जी की शादी भी मेरे पापा ने ही करवाई थी और शादी से पहले भी मेरे पापा मामी को चोदते थे लेकिन फिर किसी कारणवश उन्होंने ये रिश्ता तोड़ लिया.

अपने पापा के इन कारनामों को सुनकर मेरा लंड और उसके अरमान सो गए, मैं चुपचाप वहां से उठ कर जाने लगा लेकिन मामी ने मेरा हाथ पकड़ कर बिठाया और पूछा “क्या हुआ क्या सोचा रहा है तू” मैंने कहा “मैं आपको मामी बुलाऊं या मम्मी” तो वो जोर से हँसी और बोली “मेरा नाम सुमन है तू मुझे सुमन भी बुला सकता है और मामी भी, लेकिन मम्मी नहीं क्यूंकि जिस लम्हा मैंने तेरा लंड देखा तभी से तू मेरा हो गया और अब तू मुझे चोदने की जो इच्छा ले कर आया था वो पूरी कर”. “लेकिन आप तो मेरे पापा की गर्ल फ्रेंड थी” मैंने कहा तो उन्होंने बोला “काहे की गर्ल फ्रेंड सोनू, अगर वो आदमी चाहता तो आज तेरे बराबर बेटा होता मेरा लेकिन उस ने तेरी माँ की कसम खाई थी की मुझसे रिश्ता तोड़ लेगा”. ये कह कर मामी ने मेरे लंड पर हाथ रखा और मेरा हाथ अपने कुर्ती में डाल कर कहा “बोल तू तो नहीं तोड़ेगा ना ये रिश्ता”, मेरे मुंह से कुछ निकल ही नहीं पाया लेकिन मामी के मुंह में मेरे लंड का टोपा ज़रूर चला गया.

मामी मेरे लंड को चूस रही थी मैंने कहा “पहले पेंट तो उतारने दो” तो बोली वो सब मैं ही उतार लुंगी” और फिर से चूसने में बिजी हो गई. मामी की गरमा गरम जीभ मेरे लंड को ऐसे सहला रही थी मानो मामी कुल्फी खाने के मूड में थी, फिर मामी ने मेरी पेंट – अंडर वियर दोनों उतारी और मेरी जाँघों को मेरे गोटों को भी चाटने लगी और चाटते चाटते कहती रही “उफ़ मेरे बच्चे तेरा लंड बिलकुल तेरे बाप पर गया है, उसका भी ऐसा ही मोटा तगड़ा और लंबा था”. मैंने कहा “प्लीज़ आप बार बार मेरे पापा के बारे में मत बोलो ना” तो वो बोली “अच्छा बुरा लग रहा है, मुझे भी बुरा लगा था जब उसने अपना लंड सिर्फ तेरी माँ के लिए बचा लिया था”.

मामी के चूसने का अंदाज़ निराला था मैंने इस से पहले किसी को चुसवाया नहीं था तो मेरे लिए तो ये भी बहुत था, वो चूसती रही और मैंने गहरी सांसें ले कर “उफ्फ्फ मामी आह्ह्ह्ह सुमन और अच्छे से चूसो” इतना ही कह पा रहा था. थोड़ी ही देर में मेरे लंड से निकले गाढे गाढे राबड़ी के लच्छों ने मामी का मुंह भर दिया जिसको उस ने मुझे मुंह खोल कर दिखाया और गटक गई, मैंने कहा “अरे मामी वो पीने का थोड़ी होता है” तो बोली “सोनू बेटा ये तो मर्द का मक्खन है और तेरा तो अभी जवान मक्खन है इसे पीने में तो मेरा सौभाग्य है”. मैंने अपने लंड पर फख्र करते हुए मामी को कहा “तो आपको कैसा लगा मेरा लंड” वो बोली “ये लंड मुझे मिल रहा है और वो भी इस उम्र में यही क्या कम है, और बता क्या चाहता है तू”.

ये सुनते ही मैंने मामी के बड़े और रसीले चूचे पकड़ लिए और कहा “बचपन से इन्हें पकड़ना चाहता था” तो वो बोली “अब तू इन्हें पकड़ भी सकता है, चूस भी सकता है, पी और काट भी सकता है. खेल ले मेरे हीरो ये दोनों तेरे लिए ही हैं”. मामी की उम्र होने के बावजूद भी उनके चुचे अब तक अच्छी कंडीशन में थे ये मामा के दुबई जाने के कारण होगा, मैं ये सोच ही रहा था की मामी बोली “तुझे पता है जब से मेरे चुचे उगे थे तब से तेरे पापा इन पर मेहनत करते थे और उन्होंने ही इन्हें इस तरह बड़ा बनाया है. अब तेरी बारी है जम के मज़ा लेना और देना भी”.

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मैंने जम कर मामी के चुचों को चूसा और दबाया, उनके बड़े बड़े चुचों को चूसने में मुझे स्वर्ग सा अनुभव होने लगा उन चुचों पर काली काली निप्प्ल्स बिलकुल काटे अंगूर के जैसी थीं और मैं उन मतीरों और अंगूरों का रस ले रहा था. मामी मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं उन्हें खींच रही थी और बोल रही थी “शाबास सोनू बहुत अच्छे बेटा, आज सारा रस निचोड़ ले मेरे चुचों का” मैंने उनकी बात मानी और उनके चुचों पर पिल पड़ा मैंने उनकी चूत में ऊँगली डालने की सोची तो मेरा हाथ उनकी मूत्री पर चला गया तो वो चिल्ला पड़ी “पहले एक काम कर ले, हर कहीं ऊँगली मत कर”.

मैंने पूरी शिद्धत के साथ मामी के चुचों को चूसा और पूछा “अब तो चूत में ऊँगली कर लूँ” तो वो हंस पड़ी और बोली “सिर्फ ऊँगली ही करेगा और कुछ नहीं” मैंने कहा “और क्या करना है” तो इशारा कर के बोली “इसे चाटेगा नहीं” मैंने बिना मन से उनकी चूत पर मुंह तो लगा लिया लेकिन उसे चाटने का सुख एक दम अलग सा था. मामी ने कहा “तू अच्छे से चाट रहा है लेकिन अब ये उतनी जवान नहीं रही तो तू एक काम कर अब बिना देर किए मेरी चूत में अपना भूचाल पेल दे”. मैंने मामी की चूत पर लंड रख तो दिया लेकिन चूत को प्रेक्टिकली कभी इस्तेमाल नहीं किया था तो अंदाज़ा नहीं था इसलिए मामी ने मेरा लंड खुद चूत के छेद  पर रखा और बोला “अब धक्का लगा”

मैंने ख़ुशी ख़ुशी में धक्का थोडा जोर से मार दिया तो मामी चीख पड़ी ‘सोनू बेटा हालाँकि ये बड़ी हो गई है लेकिन ये है तो चूत ही ना तू इसे इंजन मत समझ हौले से लगा” ये सुनकर मेरी हँसी नहीं रुक रही थी और वो भी साथ में हँस पड़ी. मैं धक्के लगता रहा और मामी चीखती रही, मामी ने मुझे सोफे पर बिठाया और खुद टांगें चौड़ी कर के मेरे ऊपर बैठ गई और अपनी चूत में मेरा लंड अंदर बाहर करने लगी. ये पोजीशन काफी कम्फ़र्टेबल थी क्यूंकि इस तरह न तो मामी का बोझ मेरे ऊपर न मेरा मामी के उपर, दोनों ही इस पोजीशन को एन्जॉय करने लगे और मामी ने मेरे लंड पर उठ बैठ तेज़ कर दी.

बस इसके बाद तो जैसे मेरे लंड में भूचाल सा आगया था और मामी भी जोर जोर से “आह्ह्ह सोनू वाह्ह्ह सोनू तेज़ कर और तेज़” चिल्लाने लगी, मैं भी “मामी ऊऊऊह्ह्ह्ह” बोल कर झड़ गया और मामी भी झड़ गई. हम दोनों थके पचे वहीँ सोफे पर लेट गए और मामी ने मुझे खूब चूमा, मेरे लटके हुए लंड को मसला और कहने लगी “एक बार और चूसूंगी मैं तेरा जवान लौड़ा” मैंने भी कहा “मैं भी आपकी चूत का रस दुबारा लूँगा और इस बार डबल मेहनत से चोदुंगा”. वो हँसकर मेरे गले लग गई और बोली “बस तू इसी तरह मुझे चोदता रहना”. इसके बाद मामी और मैं रेगुलरली चुदाई मचाते, मामा भी दो महीने की छुट्टियों पर आया था तो उस वक़्त तो मामी ने चुदवाया नहीं लेकिन उसके जाते ही हमने चुदाई का सिलसिला फिर शुरू कर दिया और आज तक चालु हैं.

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