नंदोई ने मुझे चोदा

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रेणु गुप्ता है और मेरी उम्र 32 साल है, मेरी शादी को पूरे दस साल हो गये है, आज में आप सभी चाहने वालों को जो कहानी बताने जा रही हूँ, वो कहानी मेरे नंदोई (पति के बहनोई) की है, जिसमें उन्होंने मुझे बहुत जमकर चोदा और में कुछ ना कर सकी और वो कहानी इस प्रकार है.

दोस्तों मेरे पति के सिर्फ़ एक बहन है और वो मेरे पति से उम्र में करीब पांच साल बड़ी है और वो दिल्ली में रहती है, वो बहुत सुंदर है, लेकिन मेरे नंदोई उनसे भी ज्यादा सुंदर है और वो अच्छे बदन के सुंदर दिखने वाले मर्द है, वो स्वाभाव से भी बहुत मजाकिया किस्म के है, मेरा रिश्ता तो वैसे भी उनके साथ हँसी मज़ाक का है, इसलिए वो सबके सामने ही मेरे साथ हँसी मज़ाक और प्यारी छेड़छाड़ किया करते, लेकिन धीरे धीरे में अब यह बात महसूस करने लगी थी कि जीजा जी यानी की मेरे नंदोई की नियत मेरे प्रति कुछ ठीक नहीं है, कई बार जब में घर पर अकेली होती तो वो कभी मेरी कमर पर चिकोटी काट लेते या कभी मेरे गालों को चूम लेते, उनकी यह ऐसी हरकतें मुझे बहुत अच्छी लगती थी, लेकिन में उनसे हमेशा बुरा मानने का नाटक किया करती थी और उनको अपने मन से मना करने का तो सवाल ही नहीं उठता था.

एक बार होली पर वो हमारे यहाँ पर आए हुए थे. दोस्तों होली तो वैसे भी मस्ती का त्योहार है और जीजा के घर की तरफ तो बहुत खुलकर होली होती है और वैसा ही माहौल ठीक मेरे ससुराल में भी था.

मेरी ननद तथा उनके पति तो थोड़ी सी देर रंग खेलकर शांत बैठ गये, लेकिन जीजा जी तो कुछ देर बाद मेरे पीछे ही पड़ गये, मुझे रंगों से बहुत डर लगता है और यह बात सभी को पता थी, इसलिए नंदोई जी मेरे ऊपर रंग डालने के लिए जैसे ही लपके वैसे ही में भागकर अपने कमरे में छुप गई और मैंने दरवाजा अंदर से भिड़ा लिया, लेकिन वो कब मानने वाले थे, वो ज़बरदस्ती दरवाजे को धक्का देकर अंदर आ गये और अब उन्होंने सही मौका देखकर मुझे अपनी बाहों में दबोच लिया और कसकर जकड़ लिया तो में उनसे बोली कि प्लीज जीजा जी, प्लीज़ रंग मत डालिए मुझे अपने ऊपर रंग नहीं लगाना प्लीज मुझे अब जाने दीजिए, छोड़ो मुझे कोई देख लेगा प्लीज.

अब वो मुझसे बोले कि अच्छा ठीक है में तुम्हें रंग नहीं डालूँगा, लेकिन तुम्हें इस तरह मुझसे भागकर छिपने की सज़ा में आज ज़रूर दूँगा और उन्होंने अपनी एक बाहं को मेरे कंधे से डालकर मुझे पकड़कर लपेट लिया और अपना दूसरा हाथ उन्होंने तुरंत मेरे ब्लाउज में डाल दिया. फिर में उनसे कहने लगी कि प्लीज जीजा जी मुझे छोड़ीए और में सिसकियाँ लेने लगी और वो अपना काम लगातार करते रहे. अब वो बोले कि पहले में तुम्हें ठीक से सज़ा तो दे दूं और अब वो मेरे बूब्स को बड़ी बेदर्दी से मसलने, निचोड़ने लगे.

फिर मैंने करहाते हुए कहा कि जीजा जी प्लीज़ छोड़ दीजिए कोई देख लेगा. तभी वो बोले कि उससे क्या फ़र्क पड़ता है, इस घर में किसी की हिम्मत नहीं जो मेरे आगे बोले और वो यह बात हंसकर बोले और फिर उन्होंने मेरे एक बूब्स को बहुत बुरी तरह से निचोड़ा, जिसकी वजह से में चीख पड़ी और बोली जीजा जी में आपके आगे हाथ जोड़ती हूँ प्लीज मुझे जाने दीजिए, में उनसे प्रार्थना भरे स्वर में बोली. फिर वो बोले कि इसमें हाथ जोड़ने की ज़रूरत नहीं है, पहले एक वादा करो तो में तुम्हें जाने दूँगा. फिर मैंने उनसे पूछा कि कैसा वादा? अब वो मुझसे बोले कि आज रात को तुम छत वाले कमरे में जरुर आओगी, मुझसे वादा करो, तब में तुम्हें छोड़ दूंगा. अब मैंने उनसे कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है? अगर किसी ने मुझे देख लिया तो क्या होगा?

वो बोले कि उस बात की तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो अगर कोई जाग गया तो में झूठा बहाना बना दूँगा और कहूँगा कि मेरी तबीयत खराब थी, इसलिए मैंने तुम्हें दवा लेकर ऊपर बुलाया था और वो मुझसे बोले अब तुम जल्दी से वादा करो यह बात कहते समय जीजा जी मेरे दोनों निप्पल को अपने दोनों हाथों की उंगलीयों से इस तरह मसल रहे थे कि मेरी जान हलक में आ गई थी. अब उनसे बचने का मेरे पास बस एक ही उपाय था और वो यह था कि में उनकी बात को मान लूँ.

फिर आख़िर मजबूर होकर मुझे वही करना पड़ा. फिर वो बोले वाह बहुत अच्छा सभी लोग रोजाना खाना खाकर जल्दी सो जाते है और में रात दस बजे तुम्हारा छत पर इंतजार करूँगा, वो यह बात मेरे बूब्स को मसलते हुए बोले और मैंने अपना सर हाँ में हिला दिया और फिर में तुरंत चुपचाप कमरे से बाहर निकल गई.

फिर रात को करीब दस बजे के बाद जब सभी लोग सो गये तो में दबे पैर छत पर उस कमरे में पहुँच गई, जिसमें मेरे नंदोई लेटे थे और वो मेरा ही इंतजार कर रहे थे, जैसे ही में कमरे में पहुँची तो उन्होंने तुरंत दरवाजा अंदर से बंद कर लिए और खिड़की को भी बंद कर दिया. मुझे उस समय एक अजीब सी सिहरन हो रही थी और में समझती हूँ कि कोई भी औरत जब किसी पराये मर्द के पास जाती होगी तो उसके जिस्म में इस तरह की सिहरन ज़रूर होती होगी.

फिर कमरा बंद करने के बाद जीजा जी ने बिना समय गवाए तुरंत अपने और मेरे सारे कपड़े उतार दिए. दोस्तों में बहुत बेशर्म औरत हूँ. फिर भी मुझे अब थोड़ी सी शर्म आ रही थी और उसका कारण था कि जीजा जी के सामने नंगा होना था और वो पहला अवसर था, वैसे कमरे में एकदम अंधेरा था तो इसलिए अपने नंगेपन को लेकर मुझे ज़्यादा परेशानी नहीं हुई.

दोस्तों मेरी परेशानी तो दरअसल उस समय शुरू हुई जब जीजा जी ने मेरे गोरे गोरे अंगों को सहलाना और दबाना शुरू किया. दोस्तों उनकी हर एक हरकत इतनी मादक थी कि में अपने आपको भूल गई और उनसे कसकर लिपट गई और मेरे गले से हल्की हल्की सिसकियाँ निकलने लगी थी और में अपने दोनों हाथों से जीजा के पूरे बदन पर अपने नाख़ून गड़ा रही थी, मुझे अपने हट्टेकट्टे बदन वाले नंदोई से लिपटकर कुछ अलग ही प्रकार का परम आनंद मिल रहा था, जीजा जी के पूरे बदन पर बाल ही बाल थे और उनका खुदरा बदन मेरे चिकने बदन में एक अजीब सी उत्तेजना की लहर पैदा कर रहा था, जिसको में किसी भी शब्दों में लिखकर आप लोगों को नहीं बता सकती.

अब अचानक से जीजा जी ने मेरा एक हाथ पकड़ा और अपनी जांघों के बीच में रख दिया, ऐसा करते ही उनका मोटा लंड मेरी मुट्ठी में आ गया और में उनके लंड की मोटाई और मजबूती महसूस करके कांप उठी. इसे कहते है कि असली मर्द का लंड में मन ही मन यह बात सोचने लगी, दरअसल मेरे पति का लंड एकदम मरीयल सा छोटे आकार का है, सुहागरात वाले दिन जब मैंने उनका लंड पहली बार देखा तो मुझे उनसे बहुत निराशा हुई और अपने पति का पतला लंड देखकर मेरा मन बुझ सा गया था, लेकिन आज अपने नंदोई के तगड़े लंड को अपने सामने देखकर मेरे बुझे दिल में अब एक नई रोशनी झिलमिला उठी और मेरे सोए अरमान जाग उठे थे, में उस दिन का बहुत बेताबी से इंतजार करने लगी.

जब जीजा जी अपने लंड को मेरी चूत के भीतर प्रवेश करवाएंगे. अब जीजा जी बार बार मेरी चूत के आसपास अपना हाथ लगा रहे थे, शायद वो चूत की स्थिती का जायज़ा लेने की फिराक में थे, क्योंकि अंधेरे की वजह से आँखों से कुछ देख पाना बिल्कुल भी सम्भव नहीं था और कुछ देर मेरी चूत का ठीक से अंदाज़ लगा लेने के बाद जीजा जी ने अपने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के दरवाजे पर टिका दिया.

उस समय तक मेरी उत्तेजना हिमालय की उँचाईयों पर पहुंच चुकी थी. जीजा जी ने जब अपना लंड मेरी चूत के खुले मुहं पर रखा और कुछ देर के लिए रुके और उसी वक़्त मैंने अपनी कमर को एक ऐसा झटका दिया कि वो स्टील रोड जैसा मोटा लंड मेरी चूत की कोमलता में घुस गया. फिर उन्होंने मुझसे कहा कि वाह शाबास और जीजा जी खुशी से उछल पड़े और वो बोले कि तुम तो इस खेल की अच्छी खिलाड़ी लगती हो. दोस्तों उनकी बात सुनकर में शरमा गई और अब में उनकी छाती पर अपना सर छुपाकर लेट गई.

फिर तो जीजा जी ने अपना मोर्चा संभाल लिया और अपने दोनों हाथों से उन्होंने मेरे बूब्स को दबोच लिया और वो अपनी कमर को आगे पीछे चलाने लगे, में भी धीरे धीरे अपनी गांड को उछालने लगी और अपने एक बूब्स को मैंने जीजा जी के मुंह से लगा दिया था और जिस तरह से वो बूब्स को चूस रहे थे, उससे मुझे जबरदस्त उत्तेजना हो रही थी और में उस उत्तेजना में बिल्कुल पागल होकर बड़बड़ा रही थी आह्ह्हहह उफ्फ्फफ्फ्फ़ हाँ जीजा जी अब मेरी आग बुरी तरह से भड़क चुकी है आप अपने लंड को पूरा अंदर घुसा दो, आईईईइ और ज़ोर से हाँ बुउुउउस्स्स आईसस्स्स्सि जीजा जी और ज़ोर से प्लीज और ज़ोर से चोदो आईईईईए मुझसे अब रुका नहीं जा रहा है, अब मेरी मंज़िल आने वाली है आआहइईईईन्न्न में झड़ने वाली हूँ, कहीं ऐसा ना हो कि आप प्यासे रह जाएँ. दोस्तों जब अपनी हालत मैंने उन्हें बताई तो वो मेरी गांड मसलते हुए बोले तुम उस बात की बिल्कुल भी फ़िक्र मत करो रानी, हम दोनों एक साथ ही स्टेशन पर पहुँचेंगे.

फिर मुझसे इतना कहकर उन्होंने अपने लंड से चार पांच जोरदार झटके मेरी चूत पर मारे और उसके साथ ही उनके लंड से एक फुहार मेरी चूत के अंदर पड़ी और ठीक उसी समय मेरी चूत भी ज्वालामुखी की तरह लावा उगलने लगी. मुझे झड़ने का ऐसा जबरदस्त आनंद पहले कभी नहीं मिला था, शायद यह सब मेरे नंदोई के मोटे और मजबूत लंड का ही कमाल था, जिसकी मदद से उन्होंने मेरी चूत को बुरी तरह से मसल डाला था और मुझे उस सुख की असीम उँचाइयों पर पहुँचा दिया था और जिसके लिए में इतने सालों से तरस रही थी.

अब जीजा जी मुझसे चिपकते हुए पूछने लगे, अब तुम मुझे खुलकर सच सच बताओ कि तुम्हें मज़ा आया या नहीं, लेकिन में अब उन्हें इस बात का क्या जवाब देती? क्योंकि सच्चाई तो यह थी कि पहली बार मुझे सेक्स का आनंद मिला था, लेकिन में अपने नंदोई से अपने मुंह से कैसे यह बात कहती कि उनसे चुदवाने में मुझे अपने पति से भी ज़्यादा मज़ा आया? शायद अब जीजा जी मेरी इस स्थिती को समझ गये.

फिर वो कुछ देर के बाद बोले में यह बात भी बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ कि तुम अपने मुंह से हाँ या ना नहीं कह पाओगी तुम ऐसा करो कि अगर तुम्हारा जवाब ना है तो मेरी छाती पर एक चुम्मा ले लो और अगर तुम्हारा जवाब हाँ है तो तुम मेरे लंड को एक बार अपने होंठों से चूम लो. दोस्तों जीजा जी के इस सुझाव से मेरा काम अब बहुत आसान हो गया था. मुझे अपने मुहं से एक भी शब्द बाहर निकाले बिना ही अपनी हाँ या ना का जवाब उनको देना था. फिर में तुरंत उठी और उनकी कमर पर झुककर उनके तनकर खड़े लंड को में अब चूमने लगी थी. तभी उन्होंने मुझसे कहा कि शाबाश और अब उन्होंने मुझे खींचकर अपनी छाती से लगा लिया और फिर वो मुझसे बोले कि मुझे भी आज कई सालों बाद किसी की चुदाई में ऐसा मज़ा और आनंद हासिल हुआ है, तुम्हारा जिस्म बहुत लाजवाब है और ख़ासकर तुम्हारी गांड बूब्स और जांघे बहुत लाजवाब है.

अब अपने नंदोई से सेक्सी बदन की अपनी तारीफ़ सुनकर में मन ही मन गदगद हो गई. फिर कपड़े पहनकर में नीचे आई और सभी को सोता हुआ देखकर मुझे बहुत तसल्ली हुई और में चुपचाप जाकर अपने पति के पास में लेट गई. फिर दो दिन के बाद मेरी ननद और नंदोई दिल्ली वापस चले गये और में अपने घर के कामो में मगन हो गई, लेकिन करीब एक महीने के बाद मेरे नंदोई ने मेरे पति के पास फोन करके उनको बताया कि मेरी ननद की तबीयत बहुत खराब है और डॉक्टर ने उनका ऑपरेशन बताया है.

उन्होंने मेरे पति से मुझे कुछ दिनों के लिए दिल्ली पहुँचाने का अनुरोध किया, शाम को मेरे पति ने घर पर आकर मुझे वो सब कुछ बताया और फिर हमने यही निर्णय लिया कि मेरे पति मुझे दिल्ली पहुंचा आएँ, ताकि जब तक दीदी पूरी तरह से ठीक ना हो जाए, जीजा जी को खाने पीने में किसी तरह की कोई भी परेशानी ना आए, में उनके घर के सभी कामो को कर दिया करूं और मेरे यह सब करने से उनकी मदद भी होगी. फिर अगले ही दिन मेरे पति ने मुझे अपनी बहन के घर पर पहुंचा दिया और वो खुद वापस उसी शाम को लौट आए, जीजा जी की आँखों में मुझे देखकर जो चमक उभरी थी, उसका मतलब में फ़ौरन समझ गई थी कि वो मन ही मन मेरे लिए क्या क्या बातें सोच रहे थे? मेरी ननद अस्पताल में भर्ती थी और पाँच दिनों के बाद उनका ऑपरेशन होना था और उसके एक हफ्ते बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलनी थी.

इस बारह दिनों के समय में जीजा जी की सारी गर्मी और सारा जोश मुझे अकेली को ही झेलना था और फिर शाम की ट्रेन से मेरे पति मुझे वहां पर छोड़कर वापस चले गये और जीजा जी दीदी का खाना लेकर अस्पताल चले गये, वो रात के 9 बजे वापस आए और हम दोनों ने साथ में बैठकर खाना खाया और खाना खा लेने के बाद जीजा जी मुझसे बोले कि तुम सफ़र में बहुत थक गई होगी जाकर बेडरूम में आराम कर लो.

फिर मैंने उनसे पूछा कि जीजा जी आप कहाँ सोएंगे? अब वो थोड़ा सा शरारती अंदाज में मुस्कुराकर बोले कि तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो में भी तुम्हारे पास ही सोऊंगा और में तुम्हे आज से चुदाई का भी भरपूर आनंद दूँगा, लेकिन अभी मुझे अपने ऑफिस का थोड़ा सा काम खत्म करना है. दोस्तों उनके जवाब ने मुझे खुश कर दिया था और में जाकर उनके बेडरूम में लेट गई. सफर में ज्यादा थकी होने की वजह से मुझे जल्दी से नींद आ गई, लेकिन कुछ ही देर बाद मेरी आँख यह सब देखकर खुल गई कि मेरे नंदोई पूरी तरह नंगी हालत में मेरे पास बैठे थे.

उन्होंने ना जाने कब मेरे कपड़े भी उतार दिए थे और उस समय वो बड़े ध्यान से मेरी चूत को निहार रहे थे और जैसे ही उन्होंने मुझे आँखे खोलते हुए देखा तो उन्होंने मेरी चूत को सहलाते हुए मुझसे बोला कि अच्छा हुआ तुम जाग गई चुदाई का असली मज़ा तभी आता है जब दोनों जने अपने पूरे होश में और जोश में हो. अब जीजा जी ने सबसे पहले उठकर लाइट को बंद कर दिया, लेकिन दोबारा चालू कर दिया. फिर मैंने अपनी जांघे मोड़कर अपनी चूत को छुपाते हुए शरमाने लगी और मैंने उनसे कहा कि प्लीज बंद करो इसको.

फिर वो बोले कि नहीं आज तो पूरी रात लाईट ऐसे ही जलती ही रहेगी, क्योंकि उस रात को मैंने तुम्हारे ससुराल में तुम्हारे बदन को सिर्फ़ छूकर ही महसूस किया था, लेकिन आज में तुम्हारी सुन्दरता को अपनी आँखो से देखना चाहता हूँ, लेकिन मुझे अब उनसे बहुत शर्म आ रही है और मैंने दोबारा बंद करने के लिए और कहा कि मुझे शर्म आती है. तो वो बोले कि यह शर्म तो कुछ देर की है अभी कुछ देर में तुम्हे जैसे ही गरमी और जोश आएगा वैसे ही यह शर्म मुंह छुपाकर कहीं दूर भाग जाएगी, मेरी एक बात हमेशा याद रखो चुदाई का पूरा मज़ा तभी लिया जा सकता है जब इंसान अपनी शर्म का चोला उतार फेंके और पूरा बेशर्म बन जाए.

फिर मैंने उनसे कहा कि में ऐसा कभी नहीं कर सकती, तभी वो बोले कि प्लीज ऐसा मत कहो मेरे पास एक ऐसी तरकीब है जिससे एक दो मिनट में तुम्हारी सारी शर्म दूर भाग जाएगी तुम ज़रा अपनी जांघे तो फैलाओ. दोस्तों अब मैंने उनके कहने पर अपनी दोनों जांघो को खोल दिया, लेकिन शर्म से मेरी आँखें अपने आप बंद हो गई और अगले ही पल मुझे अपनी गरम चिकनी चूत पर किसी खुरदरी वस्तु का स्पर्श पाकर में चौंक पड़ी मैंने आँखे खोली तो देखा कि जीजा जी ने मेरी जांघों के बीचों बीच अपना मुंह लगा रखा है और उनकी सख़्त मूँछे मेरी चूत की मुलायम त्वचा से रगड़ खा रही है.

फिर मेरे मुहं से निकला कि हाए जीजा जी आप यह सब क्या कर रहे है? तभी मेरे प्यार जीजा जी एक पल को अपना चेहरा ऊपर उठाकर मुस्कुराकर बोले और फिर झुककर मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगे. उनके ऐसा करते ही मेरे बदन में एक अजीब सी लहर उठने लगी और मुझे ऐसा लगने लगा था कि जैसे मेरी चूत फूलकर अब मोटी होती जा रही है तभी जीजा जी मेरी चूत की कोमल फांकों को अपने होंठों के बीच में रखकर मेरी चूत की गुलाबी पंखुड़ियों को चूसने लगे और अब तो में बुरी तरह से तड़प उठी और मेरी चूत इस तरह से मचल उठी कि जैसे कि में अब झड़ने वाली हूँ.

मैंने जीजा जी का चेहरा अब अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपनी चूत से पूरी तरह से सटा दिया और में अपनी गांड को धीरे से हिला हिलाकर अपनी चूत उनके पूरे चेहरे पर रगड़ने लगी थी जिसकी वजह से मेरी चूत का वो चिपचिपा पानी उनके चेहरे से लगने लगा था.

दोस्तों जीजा जी को शायद चूत को चूसने का बहुत अच्छा अनुभव था क्योंकि वो बार बार मेरी चूत को बीच में रुककर चूम रहे थे और कभी उसे दांतों से काट भी लेते तो कभी उंगलीयों से मसल देते उनकी जीभ लप लप करती हुई कई बार मेरी चूत के ऊपर घूम चुकी थी और उसकी लार से मेरी पूरी चूत गीली हो गई थी और अब मुझे लंड की जबरदस्त तलब महसूस हो रही थी मेरा मन हो रहा था कि में जीजा जी का लंड पकड़कर अपनी चूत में खुद ही घुसेड़ लूँ और तब में ताबड़तोड़ उछल कूद करूँ, जिसके कि मेरी जलती हुई चूत को ठंडक मिल जाए.

दोस्तों में अभी यह बातें सोच ही रही थी कि तभी जीजा जी ने अचानक से अपनी जीभ को मेरी चूत में अंदर सरका दिया और उसे जल्दी जल्दी चलाने लगे में पूरी तरह से उत्तेजना में तो थी ही और जीभ की रगड़ लगते ही मेरी चूत खुलकर फफक पड़ी और में ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेकर अपने नंदोई से लिपट पड़ी.

जीजा जी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और फिर वो मेरे गालों को चूमने लगे थोड़ी देर बाद मेरी गांड को मसलते हुए वो मुझसे पूछने लगे कि तुम मुझे सच सच बताना क्या ऐसा मज़ा तुम्हारे पति ने तुम्हे कभी दिया है? अब मुझे मजबूर होकर सच सच उनसे कहना पड़ा कि नहीं कभी नहीं और फिर वो अपना लंड मेरी जांघो पर रगड़ते हुए मुझसे कहने लगे कि मैंने तुम्हारी आग तो शांत कर दिया है और अब तुम भी मेरी प्यास को बुझाओ. दोस्तों में समझी कि अब वो मुझे चोदना चाहते है इसलिए मैंने अपने हाथों से उनका लंड पकड़कर अपनी चूत के अंदर घुसेड़ लिया.

तभी जीजा जी ने अपना लंड तुम यह क्या कर रही हो कहते हुए तुरंत बाहर निकाल लिया और वो मुझसे बोले कि मैंने तुम्हे होठों से मज़ा दिया है तुम भी मेरे लंड को अपने होंठों से प्यार करो. अब में समझ गई थी कि जीजा जी मुझसे अपना लंड चुसवाना चाहते है, क्योंकि वो अभी कुछ देर पहले मेरी चूत को चाटकर मेरी प्यास को बुझा चुके थे इसलिए में भी उनकी उस मन की इच्छा को पूरा करने के लिए बहुत विवश थी. फिर मैंने झुककर जीजा जी का लंड अपने मुंह में डाल लिया और अब में उसको चूसने लगी थी.

फिर जीजा जी ने मेरे सर को अपने दोनों हाथों से थाम लिया और अपनी कमर आगे पीछे करने लगे. उसके साथ ही उनका लंड मेरे मुंह में अंदर बाहर होने लगा था और कुछ ही देर हुई होगी कि अचानक से जीजा जी का पूरा बदन ज़ोर से हिलने लगा जब तक में कुछ समझ पाती तब तक उनके लंड ने ढेर सारा सफेद लावा मेरे चेहरे पर उगल दिया. अब मैंने उठकर जीजा जी का लंड और अपना मुंह दोनों को साफ किया और में उसी हालत में सो गई.

फिर रात को जीजा जी ने मेरी चूत और गांड का बहुत मज़ा लिया और मैंने भी उनका पूरा पूरा साथ दिया. मैंने अपनी गांड पहले कभी नहीं मरवाई थी इसलिए शुरू में लंड डालते समय मुझे बहुत दर्द का सामना करना पड़ा और उन्होंने थूक लगाकर मेरी गांड मारी कुछ देर बाद में रास्ता खुल जाने से मुझे बहुत मज़ा आया और हम लोग सुबह 9 बजे उठे जीजा जी को दीदी का नाश्ता लेकर अस्पताल जाना था, लेकिन उठने से पहले भी एक बार उन्होंने मुझे चोदा फिर वो हॉस्पिटल चले गये और अस्पताल से लौटने के बाद वो फिर से मुझ पर आते ही चड़ गये हालाँकि मुझे भी उनके साथ जमकर चुदाई का भरपूर आनंद मिल रहा था इसलिए मैंने भी उनसे कभी भी इंकार नहीं किया और मैंने खुलकर उनके मस्ताने लंड का पूरा मज़ा लिया.

दोस्तों जितने दिन में दिल्ली में रही जीजा जी के साथ मैंने जमकर जवानी का पूरा पूरा मज़ा लिया उन्होंने मुझे हर कभी जब भी उनको याद आती मेरी चुदाई कि मेरी चूत को अपने मोटे तगड़े लंड से चोद चोदकर अब तक पूरी तरह से भोसड़ा बना दिया था मुझे अब उनके लंड की एक आदत सी हो गई थी बिना चुदाई के मेरी चूत फड़कने लगी थी, लेकिन अपनी ननद के ठीक होकर घर पर आ जाने के बाद मुझे अपने ससुराल वापस आना पड़ा और उसके बाद से में अपने पति के साथ ही रह रही हूँ, लेकिन जिस तरह एक बार जीभ का चटपटा स्वाद जाग जाने के बाद इंसान को सादा खाना पसंद नहीं आता ठीक उसी प्रकार अपने नंदोई के साथ खुलकर सेक्स कर लेने के बाद अब मुझे अपने पति के सीधे सरल प्यार में वो वैसा मज़ा नहीं आता. हर वक़्त मुझे अपने नंदोई के साथ चुदाई की याद आती है और ख़ासकर जिस समय मेरे पति मेरी चुदाई करते है उस वक़्त में नंदोई जी के साथ बिताए वो सुखद पलों की यादों में खो जाती हूँ.

अब में अपने ससुराल में कोई नंदोई जैसा चुदक्कड़ चूत का दीवाना खोज रही हूँ जो मेरी और मेरी चूत की बहुत अच्छी तरह से चुदाई करे और मेरी भड़कती आग को शांत कर दे. दोस्तों यह थी मेरी चुदाई अपने नंदोई के साथ, में उम्मीद करती हूँ कि यह मेरी चुदाई और उनका मुझे चोदने का तरीका आप सभी पढ़ने वालों को जरुर पसंद आया होगा.

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