दुल्हन की माँ की चुदाई

हैल्लो मेरे प्यारे दोस्तों, आज में आप लोगो के लिए अपनी बहुत हॉट घटना लेकर आया हूँ, जिसमें मैंने अपनी पड़ोसन आंटी को चोदा और उनके साथ वो मेरा सेक्स अनुभव बहुत यादगार रहा. दोस्तों मेरे घर के दूसरी तरफ में एक 45 साल की बहुत मस्त आंटी रहती है जिनका नाम रेणुका और उसके बूब्स का साइज़ 40, गांड 50 या 55 होगा.

में हर दिन जब भी जिम जाता हूँ तो उनसे मेरी नज़र मिलती है और हम दोनों एक दूसरे को एक हल्की सी स्माइल देते है, यह काम हमारा हर रोज़ का था और एक दिन रेणुका आंटी मेरे घर पर आई तो में उस समय बाथरूम में नहाते समय भाप ले रहा था, तो मेरी मम्मी ने दरवाजा खोला और वो अंदर आ गयी और फिर वो दोनों अंदर बैठकर बातें करने लगी.

कुछ देर बाद में नहा लिया और मुझे करीब 20 या कोई 25 मिनट लगे होंगे. अब में बाथरूम से बाहर शॉर्ट, पैंट में और अपने खुले बदन में आ गया तभी आंटी मुझे देखकर एकदम दंग रह गई और उसने मुझसे कहा कि विशाल आपका बदन तो बिल्कुल हीरो की तरह है एकदम भरा हुआ गठीला बदन.

में उनकी यह बात सुनकर उनकी तरफ हंसा और मम्मी ने मुझसे कहा कि नमस्ते करो आंटी को, तो में उनके पैर छूने आगे की तरफ गया पैर छूते ही आंटी ने मेरे सर पर अपना एक हाथ रख दिया और जब में खड़ा हुआ तो आंटी ने मुझे अपने गले से लगा लिया और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि बेटो की जगह पैरों में नहीं माँ के दिल में होती है और यह बात कहकर उन्होंने मेरी छाती से अपने बड़े आकार को छू दिया, लेकिन दोस्तों तब भी मेरा कोई ऐसा ग़लत इरादा नहीं था.

में उनकी बहुत इज्जत करता था इसलिए मैंने उनकी उस हरकत पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और फिर कुछ देर बाद आंटी ने बातों हो बातों में मुझसे कहा कि सबको शादी में आना है.

फिर मैंने उनकी बात को सुनकर तुरंत उनसे पूछ लिया कि किसकी शादी? तब उन्होंने मुझसे कहा कि मेरी बेटी की शादी है और तुम्हे भी उसमे जरुर आना होगा. दोस्तों उनके दो बच्चे है एक लड़का और एक लड़की, लड़की उम्र में बड़ी है और वो एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती है और लड़का अभी अपने कॉलेज के दूसरे साल में अपनी पढ़ाई कर रहा है. खैर फिर हम लोगो से वो यह बात कहकर चली गयी और उसके करीब एक सप्ताह के बाद हम सभी घरवाले आंटी के घर पर उनकी बेटी शादी में चले गये.

आंटी मुझे देखते ही जल्दी से मेरे पास आ गई और उन्होंने इतने मेहमानों के बीच में भी मुझे एक बार फिर से मुझे अपने गले से लगा लिया जिसकी वजह से मुझे दोबारा उनके बड़े आकार के बूब्स अपनी छाती पर महसूस हुए जिनकी गरमी को पाकर में मन ही मन बहुत खुश था. फिर उसके बाद हम सभी अंदर चले गये और हमने रात भर शादी में बहुत जमकर मज़े किये और सुबह उसकी बेटी रोती हुई बहुत दुखी होकर सभी को दुखी करके अपने पति के घर पर चली गयी.

आंटी का रो रोकर बहुत बुरा हाल था और फिर दो दिन बाद वो वापस आ गई. उसके बाद वो करीब एक महीने अपनी मम्मी के घर पर रही और फिर उसके बाद वो अपने पति के साथ उसकी नौकरी की वजह से पुणे में रहने चली गयी.

दोस्तों में फिर हर रोज की तरह उस दिन सुबह जिम जा रहा था तभी आंटी ने मुझे पीछे से आवाज़ देकर मुझे अपने घर पर आने को कहा तो में जल्दी से उनके घर पर चला गया. तब आंटी ने मुझसे मुस्कुराते हुए कहा कि आओ अंदर बैठो तुम कभी मेरे घर पर भी आ जाया करो, में अकेली पूरे दिन घर में बोर हो जाती हूँ क्योंकि हर दिन सुबह जल्दी तुम्हारे अंकल भी अपनी नौकरी पर चले गये और अंकित अपने हॉस्टल में रहता है. दोस्तों अंकल कोई सरकारी विभाग में बहुत अच्छे पद पर थे, तो मैंने उनसे कहा कि हाँ आंटी क्यों नहीं में अब से जरुर आ जाऊंगा.

फिर में उनकी तरफ हल्का सा हंसा और बाहर आकर में अपने जिम चला गया और उसी शाम को में करीब 6 बजे आंटी के घर पर चला गया. मैंने दरवाजे पर लगी घंटी को दो तीन बार बजाई, लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला में कुछ देर बाहर खड़ा होकर इंतजार करके दोबारा अपने घर पर चला गया.

फिर करीब 8 बजे वो आंटी खुद मेरे घर पर आ गई और फिर वो मेरी मम्मी से कहने लगी कि अगर आप बुरा ना मानो तो क्या में आपसे एक बात बोल सकती हूँ?

मम्मी ने उनसे कहा कि हाँ बोलिए ना, तब आंटी ने कहा कि देखिए आज अंकित अपने दोस्त के बड़े भाई की शादी में कहीं बाहर गया हुआ है और वो कल दिन तक वापस आएगा और अब में घर पर एकदम अकेली हूँ और मुझे रात को अकेले में बहुत डर लगता है तो क्या आप विशाल को मेरे घर पर सोने के लिए भेज सकती है? तभी मम्मी ने उनसे कहा कि हाँ ठीक है, क्यों नहीं, इसमे बुरा मानने वाली क्या बात है? आप उसको अपने साथ जरुर ले जा सकती है और फिर मम्मी ने मुझे अपने पास बुलाकर मुझसे पूछा कि तुम्हे घर पर कोई काम तो नहीं है? तो मैंने उनसे कहा कि नहीं, फिर में करीब रात को दस बजे आंटी के घर पर पहुंच गया.

दोस्तों जब में उनके घर पर पहुंचा तो मैंने देखा कि आंटी ने एक काले कलर की मेक्सी पहन रखी थी और शायद रात को वो अंदर कुछ भी नहीं पहनती. अब आंटी ने मुझसे पूछा कि विशाल क्या तुम्हे कुछ खाना है? तो मैंने उनसे कहा कि नहीं आंटी मेरा पेट भरा हुआ है, क्योंकि में अपने घर से अभी कुछ देर पहले खाना खाकर ही आपके पास आया हूँ.

वो मेरा यह जवाब सुनकर तुरंत किचन के अंदर चली गई और फिर में उनसे बात करने के बाद सोफे पर बैठकर अपने मोबाइल पर कुछ देखने लगा. तब आंटी कुछ देर बाद मेरे पास आई और उन्होंने मुझसे कहा कि चलो अब तुम्हे सोना नहीं है क्या? तो मैंने उनसे कहा कि हाँ उसके बाद मैंने आंटी से कहा कि आंटी में अंकित के रूम जाकर वहीं पर में सो जाता हूँ, लेकिन तभी आंटी ने मुझसे कहा कि तुम मेरे साथ सो जाओ क्या तुम्हे मेरे साथ सोने में कोई दिक्कत है? तो मैंने उनसे कहा कि नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, आप मुझसे जहाँ पर कहोगे में वहीं पर सो जाऊंगा और अब हम दोनों एक ही बेड पर सोने चले गये, तब तक करीब 11 बज चुके थे.

कुछ देर बाद आंटी सो गई, लेकिन मुझे अब बिल्कुल भी नींद नहीं आ रही थी इसलिए में अपने मोबाइल पर गेम खेल रहा था. तभी अचानक से नींद में आंटी का एक पैर मेरे पैर के ऊपर आ गया और आंटी एकदम सीधी होकर सोई हुई थी. फिर मैंने अपने मोबाइल की धीमी रौशनी से आंटी को देखा तो उस समय आंटी गहरी नींद में थी और मैंने देखा कि आंटी के बूब्स का निप्पल ऊपर से एकदम तनकर खड़ा था जिसको देखकर मेरी नियत अब धीरे धीरे खराब होने लगी थी और मेरा लंड धीरे धीरे वो सब देखकर खड़ा होने लगा था.

अब मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके अपने एक हाथ को आंटी की छाती के ऊपर रख दिया, वाह क्या मज़ा आया मुझे, में उनके बिना ब्रा के बूब्स को बहुत अच्छी तरह से महसूस करने लगा था और में बहुत खुश था. फिर में मौका देखकर उनसे और भी ज्यादा चिपक गया और में इस बार थोड़ा सा रुककर अपने खड़े लंड को आंटी की जांघ पर रगड़ने लगा. वो बहुत टाईट हो चुका था और उसके साथ साथ में उनके बूब्स ज़ोर ज़ोर से दबाने भी लगा था. तभी आंटी उठ गई और वो मुझसे बोली कि तुम यह क्या कर रहे हो? यह गंदी बात है.

फिर मैंने उनसे कहा कि मुझे माफ़ करना आंटी, लेकिन मैंने आपको जब से देखा है में तब से आपको अपनी बीवी बनाना चाहता हूँ दोस्तों मेरे मुहं से यह बात सुनते ही आंटी ने थोड़ा सा जोश में आकर मेरी तरफ अपना मुहं किया और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि मेरी तो अब उम्र हो गयी है और अब तुझे मुझमें वैसा मज़ा नहीं आएगा जैसा तू सोच रहा है, लेकिन तू चाहता है तो ले कर ले अपने मन की इच्छा पूरी. दोस्तों उनके मुहं से यह बात सुनकर मैंने झट से कहा कि आंटी में हर रात को आपके बारे में सोचकर अपना माल निकालता हूँ, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो. तो मेरे मुहं से यह बात सुनते ही आंटी ने मुझसे कहा कि तुम मुझे अपनी बीवी बनाना चाहते हो तो हाँ ठीक है, लेकिन यह रिश्ता हम दोनों के अलावा किसी को भी मालूम नहीं पड़ना चाहिए.

फिर मैंने कहा कि में आपसे पक्का वादा करता हूँ आंटी और वो मुझसे कहने लगी कि तुम रुको में अभी आती हूँ और करीब आधे घंटे के बाद आंटी आई अफफफ़फ़ वाह में क्या बताऊँ दोस्तों? अब मेरे ठीक सामने आंटी का पूरा नंगा बदन था और वो लिपस्टिक लगाकर आई थी उनको देखते ही मैंने उनको अपनी बाहों में लेकर बेड पर लेटा दिया और उसके बाद मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए, मैंने देखा कि उनकी चूत पूरी साफ और आकार में लंबी थी उसको देखकर में बेकाबू हो गया और मैंने अब बिना कुछ सोचे समझे तुरंत उनकी चूत को चाटना शुरू किया करीब 15 से 20 मिनट चूत को चाटने के बाद आंटी मेरे मुहं में झड़ गई ऊऊऊअफ वाह क्या मज़ा आया पूरा चूत रस मेरे मुहं के अंदर था.

अब मैंने वो पूरा रस उनकी चूत के ऊपर थूक दिया मेरा लंड पूरा जोश में गरम था इसलिए मैंने जोश में आकर अपना लंड आंटी के मुहं में जबरदस्ती डाल दिया. फिर उसके बाद मैंने हल्के झटके से आंटी के मुहं में लंड को पूरा अंदर डालकर उनको चूसवाना शुरू किया वो अहहहा उफ्फ्फफ्फ्फ़ करके सिसकियाँ लेती रही और मुझे वाह दोस्तों मज़ा आ गया वो क्या मज़े से मेरे लंड को चूस रही थी करीब दस मिनट चूसने के बाद मैंने उनके मुहं में अपना पूरा माल डाल दिया और वो उसको पी गई.

फिर हमने दस मिनट तक बहुत अच्छी तरह से एक दूसरे के होंठो को चूसा और इतनी देर में मेरा लंड एक बार फिर से तनकर खड़ा हो गया. फिर मैंने आंटी को नीचे लेटा दिया और अब मैंने अपना लंड आंटी की चूत के मुहं पर रखकर एक ज़ोर से धक्का मार दिया जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड एक ही बार में उनकी बड़े आकार की चूत में अंदर चला गया और आंटी मुझसे कहने लगी हाँ विशाल उफफ्फ्फ्फ़ हाँ मुझे आज तुम अच्छे से चोदो आईईईईई में बहुत दिनों से अच्छी चुदाई के लिए तरस रही हूँ ऊईईईईई माँ में मर गई, हाँ ज़ोर से चोद मुझे, वाह मज़ा आ गया. दोस्तों मैंने उनकी जोश भरी बातें सुनकर अपने धक्कों की स्पीड को बढ़ा दिया और में लगातार अपने लंड को उस खोखली बड़े आकार की चूत में अंदर बाहर करता रहा, जिसका मुझे बिल्कुल भी पता नहीं चल रहा था, लेकिन लंड के अंदर बाहर होने की वजह से गॅप गॅप गॅप की आवाज जरुर हो रही थी. में धक्के देता रहा और मुझे धक्के देते हुए करीब आधा घंटा हुआ.

फिर मैंने महसूस किया कि आंटी तब तक दो बार अपना माल गिरा चुकी थी. मेरा लंड जोश के साथ साथ अपनी पूरी रफ़्तार में था क्योंकि में भी अब झड़ने वाला था और करीब दस मिनट बाद मैंने अपना पूरा माल आंटी की चूत में डाल दिया. फिर कुछ देर बाद आंटी की चूत के अंदर से हम दोनों का गरम गरम लावा एक साथ बाहर गिरने लगा था. फिर मैंने कुछ देर बाद अपने लंड को उनकी चूत से बाहर निकालकर आंटी के बूब्स पर रगड़ने लगा था और उसके कुछ देर बाद हम दोनों एक दूसरे से चिपककर ना जाने कब सो गये.

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