चार बच्चों की माँ के साथ मजा

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम समीर है. मेरी लम्बाई 6 फीट और में दिखने में अच्छा लगता हूँ और आप लोगों की तरह में भी पिछले कुछ सालों से सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ. आज में आप सभी को अपनी एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ जो मेरे साथ 5-6 साल पहले घटित हुई और में आज भी इस घटना को भुला ना सका. में उसको आप लोगों को सुनाने जा रहा हूँ जिसमें मैंने अपनी एक मस्त सेक्सी आंटी को चोदकर पूरी तरह से संतुष्ट किया.

वो मेरी चुदाई से बहुत खुश थी और में उम्मीद करता हूँ कि जिस तरफ से मुझे उन्हें चोदने में और उनको मेरे साथ सेक्स करने में जितना मज़ा आया ठीक वैसे ही यह कहानी आज आप लोगों को जरुर पसंद आएगी.

दोस्तों एक आंटी जो एक हाउसवाईफ है, वो मेरे दूर के रिश्ते में रिश्तेदार लगती थी और उनका नाम नीलम था. उनके चार बच्चे थे और सब छोटे 4 या 5 साल के होंगे, लेकिन नीलम आंटी चेहरे से ऐसी लगती नहीं थी कि वो चार बच्चों की माँ है उसकी उम्र करीब 28 के आसपास होगी. उन्होंने अपने शरीर को बहुत अच्छी तरफ सम्भालकर रखा हुआ था, वो बहुत ही गोरी दूध जैसी सफेद, उनके वो बड़े बड़े गोल बूब्स 36 के होंगे और उसकी गांड 40 के करीब होगी और वो बहुत बड़ी और बाहर निकली हुई थी.

दोस्तों वो अक्सर हमारे घर पर आया जाया करती थी और हम लोग भी उनके घर पर आते जाते रहते थे. मैंने कभी भी उसके बारे में कुछ ग़लत नहीं सोचा था और में उनकी बहुत इज्जत किया करता था. उनका प्यार से बात करने का तरीका मुझे हमेशा उनकी तरफ आकर्षित करता था, लेकिन उस दिन की घटना के बाद से मेरा उनको देखने का तरीका अब बिल्कुल ही बदल चुका था. उस घटना ने मुझे उन्हें उस नजर से देखने पर बहुत मजबूर किया.

एक दिन शाम को में किसी काम से उनके घर पर चला गया. तब में 11th क्लास में पढ़ता था और उस समय उनके बच्चे बाहर खेल रहे थे. फिर जब मैंने पूछा उनसे पूछा कि आपकी मम्मी कहाँ है? तो वो बोले कि अंदर रूम में है.

फिर में वहाँ पर चला गया और मैंने देखा तो वहां पर कोई नहीं था, लेकिन बाथरूम का दरवाज़ा खुला हुआ था और मेरी नज़र बाथरूम के अंदर पड़ी और मैंने जैसे ही देखा तो मेरी आँख खुली की खुली रह गई, क्योंकि जो सब मुझे उस समय नजर आ रहा था उसको देखकर में बहुत चकित था, उसकी बड़ी मोटी एकदम गोरी गांड मेरे सामने थी. मेरा लंड वो सब देखकर एकदम टाईट हो गया था और अब मेरी वो सब देखकर फट गयी, लेकिन मन ही मन मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था. में उस समय बहुत खुश था. अब मैंने देखा कि वो पेशाब करने के बाद उठ गई और उसने अभी तक मुझे नहीं देखा था, क्योंकि उसका मुँह दूसरी तरफ था.

में बाहर खड़ा पसीना पसीना हो रहा था और तभी उसने अपनी कमीज़ को उठाई और फिर सलवार का नाड़ा बाँधने लगी. मैंने एक तरफ से थोड़ा सा उसका पेट देखा वो बहुत गोरा गोरा और हल्का गुलाबी था. फिर वो मेरी तरफ घूमी और मुझे ठीक अपने सामने देखकर अचानक से बिल्कुल चकित हो गयी और अब वो मुझसे पूछने लगी कि तू यहाँ पर कब आया? तो मैंने ऐसा चेहरा बनाकर जवाब दिया कि जैसे मैंने कुछ नहीं देखा हो और मैंने उनसे कहा कि में अभी बस अंदर आया ही हूँ और आप बाहर निकले.

दोस्तों उसने मेरे मुहं से यह बात सुनकर चैन की सांस ली और वो मेरी बात सुनकर थोड़ी संतुष्ट हो गई, लेकिन मेरी हालत अब बहुत खराब हो गयी थी और मेरे मन में अब भी उसकी गोरी बड़ी आकार की गांड घूम रही थी और में अब बाहर हॉल में बैठा हुआ था और वो घर के काम करने में लगी हुई थी जिसकी वजह से मुझे उसके बूब्स की लाईन साफ साफ दिख रही थी.

अब मुझे गांड को देखने के बाद उसके झूलते लटकते हुए बूब्स को देखने का वो मौका मिल गया, जो उसने खुद मुझे दिया था में तो बस बैठा हुआ उसके मज़े लेता रहा क्योंकि उसके बूब्स बहुत बड़े थे और वो जब भी घर में अकेली होती थी तो पल्लू नहीं लेती थी और हमेशा ऐसे ही रहती थी.

फिर में कुछ देर उसके गोरे बड़े आकार के बूब्स को देखकर अपने घर पर चला गया. मेरी सोच अब उसके बारे में बिल्कुल बदल गई थी और में उसके सेक्सी बदन के बारे में ना जाने क्या क्या गंदी बातें सोचने लगा, लेकिन थोड़े डर की वजह से में उसके घर पर नहीं जा रहा था.

एक दिन शाम को वो हमारे घर पर आ गई और में उस समय कुर्सी पर बैठा हुआ था और मेरे दोनों पैर ऊपर बेड पर थे वो आकर ऐसे बैठी कि उसने अपनी पूरी गांड मेरे दोनों पैरों के बराबर रख दी जिसकी वजह से मुझे उसकी गांड की गरमी आकार महसूस हो रहा था.

दोस्तों उसने यह जानबूझ कर किया या अंजाने में, मुझे बिल्कुल भी इस बात का पता नहीं था और में फिर थोड़ा टेंशन में आ गया कि मेरा सामान एकदम टाईट हो गया. फिर मैंने अपने पैर थोड़े हिलाए, लेकिन वो तो ऐसे ही बैठी थी जैसे वो ज़मीन पर बैठी है.

फिर मैंने दस मिनट मज़े लेकर पैर हटा दिया उस रात मैंने उसके नाम की एक बार मुठ मारी और ना जाने कब में सो गया मुझे पता ही ना चला और उसके बाद में लगातार उसके घर पर जाने लगा और उसके बूब्स, गांड और सेक्सी बदन को देखने लगा था. दोस्तों में उससे बात भी करता तब भी में अपनी चोर नजर से उसके बूब्स को घूर घूरकर देखता. उसे भी अब सब कुछ पता था कि में क्या देख रहा हूँ? लेकिन वो फिर भी मुझसे कुछ नहीं बोलती और बस थोड़ा सा मुस्कुरा देती.

फिर उसकी इस हरकत से मुझे अब आगे बढ़ने का मौका और हिम्मत मिलने लगी थी और में उसके बारे में सोचकर बहुत खुश था. एक दिन उसने मुझे अपने घर पर बुला लिया और उसने मुझसे कहा कि समीर मुझे यह परदा लगवाना है, क्योंकि मेरा इतनी ऊंचाई पर हाथ नहीं जा रहा है, प्लीज तुम इसे लगा दो, तो मैंने उससे कहा कि ठीक है में इसको अभी लगा देता हूँ, लेकिन आप भी मेरे साथ में मेरी मदद करो और हम साथ में इसको लगाते है.

दोस्तों वो तुरंत मेरी बात मान गई और मैंने उस समय सही मौका देखकर जानबूझ कर उसके करीब 4 से 5 बार बूब्स छुए और बहुत मज़े लिए और जब मुझे लगने लगा कि वो भी अब मुझे कुछ नहीं बोल रही है, शायद उसको मेरा यह सब करना अच्छा लग रहा है तो मैंने जोश में आकर तुरंत पर्दे का काम वहीं पर छोड़कर उसके बूब्स को ज़ोर से दबा दिया, शायद उसको दर्द हुआ होगा और उसके चेहरे की बनावट बदल गई थी.

उसके मुहं से आईईईईई की आवाज बाहर आई जिसको सुनकर अब मेरी गांड फट गई थी और में चुपचाप परदा लगाने लगा और काम खत्म होने के बाद उसने मुझसे पूछा कि तुम अब बिल्कुल फ्री हो? तब उसने मुझसे कहा कि कल तुम दोपहर को एक बजे मेरे पास आ जाना, मुझे तुमसे कुछ काम है और फिर मैंने तुरंत उससे कहा कि हाँ ठीक है में आ जाऊंगा. दोस्तों में बहुत खुश था क्योंकि मैंने आज उनके साथ इतना सब किया, लेकिन उन्होंने मुझे कुछ भी ना कहते हुए मुझे दूसरे दिन अपने घर पर बुला लिया था और फिर में दूसरे दिन बहुत खुश होकर उसके बताए ठीक समय पर उसके घर पर पहुँच गया.

फिर मैंने घर पर पहुंचकर देखा तो वो उस समय घर पर बिल्कुल अकेली थी और घर में एकदम शांति थी, इसलिए मैंने उससे पूछा कि बच्चे कहाँ गये है? तो उसने कहा कि सभी बच्चे स्कूल गए है और उसके पति उस समय नौकरी पर गए हुए थे. फिर में उसके कहने पर तुरंत बैठ गया और उसने आज भी अपनी छाती पर पल्लू नहीं लिया था और में अब उसके लटके हुए गोरे बूब्स को देख रहा था उसके मज़े ले रहा था.

फिर तभी एकदम से उसने मुझे देख लिया इससे पहले कि वो मुझसे कुछ बोलती मैंने उससे पूछ लिया कि क्या काम था आपको मुझसे? तो वो मुझसे बोली कि तुम थोड़ा सा रूको में पहले नहा लेती हूँ उसके बाद बताती हूँ, तुम तब तक थोड़ा सा इंतजार करो और अब वो उठी और सीधी बाथरूम में चली गयी.

फिर में भी पीछे से जाकर दरवाजे के उस छोटे से छेद से उसको नहाते हुए देखने लगा. उसे शायद पहले से ही पता था कि में यह सब करूँगा. अब उसने नहाना शुरू किया और में उसे उसके सेक्सी नंगे बदन को देखने में इतना खो गया था कि मुझे पता ही ना चला उसने एकदम से बाथरूम का दरवाज़ा खोल दिया और फिर उसने ज़ोर से चिल्लाकर मुझसे कहा कि तुम यह क्या कर रहे हो? तो में अचानक से उसको अपने सामने देखकर बहुत ज़्यादा डर गया था और मेरे दिल की धड़कन उस समय बहुत तेज़ हो गयी थी.

मैंने उनसे माफ़ करने के लिए कहा और में अब काँपने लगा था और अब उसने बहुत गुस्से में आकर मुझसे बोला कि में तुम्हारे मम्मी पापा को यह सब बोल दूँगी.

फिर उनके मुहं से यह बात सुनकर में अब रोने लगा और उनसे कहने लगा कि प्लीज ऐसा मत कीजिए और मुझे रोता हुआ देखकर वो हंसने लगी और वो मुझसे बोली कि पागल मुझे तुझसे यही तो काम था तू इतने दिन से मुझे घूर रहा है और वो नंगी बाहर आ गयी.

तभी मेरी जान में जान आ गई उसने मेरे आँसू साफ किए और मुझे किस किया और अचानक से उसने मेरा लंड पकड़ लिया. अब में भी उसे किस करने लगा और बहुत ज़ोर ज़ोर से बूब्स को दबाने लगा. उसकी सिसकियों की आवाज़ बाहर निकलने लगी और उफ्फ्फफ्फ्फ़ आह्ह्हह्ह्ह्ह जिसकी वजह से में अब ज्यादा जोश में आने लगा. तभी उसने मुझे बताया कि कल परदे लगाते समय मैंने उसके बूब्स को कुछ ज्यादा ज़ोर से दबा दिया था, इसलिए उन्हें बहुत दर्द हुआ था और इसलिए उसने अपने चेहरे को ऐसा बना लिया था.

फिर में तो जैसे उसके बूब्स पर टूट पड़ा और में बहुत ज़ोर ज़ोर से दबाने, चूसने लगा, ऐसे कि जैसे उसमें से प्रोटीन आ रहा हो. मैंने दोनों बूब्स को इतना जमकर चूसा कि उन्हें एकदम लाल कर दिया और साथ ही साथ में उसकी प्यासी चूत पर भी हाथ लगा रहा था. उसकी आकार में बड़ी गांड को भी सहलाते सहलाते उंगली डाल देता और किस करते करते उसने मेरे कपड़े उतार दिए और वो अब बिना बोले ही नीचे बैठकर लंड को चूसने लगी.

उसने करीब पांच मिनट ही चूसा होगा कि मेरा वीर्य निकल गया और में उसके मुहं में झड़ गया और पूरा वीर्य उसके मुहं में डाल दिया, लेकिन उसने तुरंत उसको अपने मुहं से बाहर निकाल दिया और फिर चूसने लगी वो मेरा लंबा मोटा लंड बहुत अच्छे से चूस रही थी.

फिर कुछ देर बाद एक बार फिर से मेरा लंड तन गया और जैसे ही मेरा लंड खड़ा हुआ तो उसने मुझे इशारा किया कि में भी अब उसकी चूत को चाटकर उसे वो मज़े दूँ, लेकिन मैंने उससे साफ मना कर दिया, तो उसने कहा कि प्लीज अभी कुछ देर पहले मैंने भी तो तुम्हारा लंड चूसा है प्लीज एक बार ऐसा कर दो और फिर मैंने उसके बहुत बार कहने पर उससे कहा कि ठीक है.

अब वो मेरे सामने तुरंत घोड़ी बन गई और मुझसे बोली कि लो अब चाटो और में चाटने लगा. दोस्तों सच पूछो मुझे बहुत अजीब लग रहा था, क्योंकि उसकी बदबू भी बहुत अज़ीब थी, लेकिन पहली बार सेक्स करने का मौका भी मुझे आंटी ने ही दिया था, इसलिए मुझे वो सब करना पड़ा और मैंने जैसे ही उनकी गीली, गरम, प्यासी चूत को चाटना शुरू किया उनके मुहं से मोन करने की आवाजे बाहर निकलने लगी, वो बिल्कुल गरम हो चुकी थी उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्हह् हाँ थोड़ा और अंदर डाल दे आईईईई में लगातार चूसता चाटता रहा और वो मेरा सर अपनी चूत पर दबाकर मेरी जीभ को पूरा अंदर तक घुसाने लगी थी और करीब दस मिनट बाद वो झड़ गई और में तुरंत पीछे हट गया और उन्होंने झट से वापस मेरा सर पकड़कर वहीं पर घुसा दिया और मुझे उसकी इन हरकतों से ऐसा लग रहा था कि उनको मुझसे चुदवाना नहीं है, खाली अपनी चूत को चटवाना है और मैंने ऐसा करीब बीस मिनट तक किया और वो दो बार झड़ गयी.

अब मेरा मुँह चूसते चाटते दर्द होने लगा था और मैंने कहा कि बस में इससे ज्यादा नहीं कर सकता और फिर वो मुझसे बोली कि चल अब डाल दे अपना लंड मेरी चूत में और मुझे अपने लंड की ताकत दिखा. अब में उसके मुहं से यह बात सुनकर बहुत खुश था और फिर मैंने जैसे ही लंड को चूत के मुहं पर रखकर एक ज़ोर का धक्का देकर अंदर डाल तो वो सिसकियाँ लेने लगी उसस्श उईईईइ आह्ह्हह्ह्ह्ह. फिर में उनको बहुत ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रहा था, जिसकी वजह से फच फच की आवाजें आ रही थी और हम दोनों पूरे जोश में आकर चुदाई में लगे रहे करीब 12 या 15 मिनट में मेरा काम हो गया और मैंने अपना लंड चूत से बाहर निकालकर आंटी की गांड पर अपना पूरा वीर्य गिरा दिया और फिर लेट गया.

अब आंटी भी एकदम मेरे पास मेरे ऊपर अपने बड़े बड़े बूब्स लेकर लेट गयी और ज्यादा थकने की वजह से मेरी तो आँख ही लग गयी. मुझे पता ही नहीं चला और करीब आधे घंटे में मेरी आँख खुली तब मैंने देखा कि वो अब मेरे लंड से खेल रही है और मेरा लंड एकदम खड़ा हुआ उसके मुँह में जा रहा है. उसने जैसे ही मुझे देखा तो वो उठी और तुरंत बैठ गयी और उस पर उछलने कूदने लगी और मोन करने लगी.

फिर पांच मिनट के बाद मेरे दिमाग़ में ख्याल आया कि अब में उसकी चूत नहीं गांड मारूँगा और मैंने उसको रोका तो वो चकित हो गयी कि क्या हो गया? मैंने उससे कहा कि मुझे गांड मारनी है और वो मेरी बात सुनकर हंस पड़ी और उसने मुझसे कहा कि तुम्हे जो मारना है मार लो मेरी जान, में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ और तुम सच में बहुत अच्छे हो, में आज के बाद तुमसे कभी भी किसी भी काम के लिए मना नहीं कर सकती.

फिर मैंने उसकी गांड के छेद पर बहुत सारा थूका और मैंने उससे अपने लंड पर तेल लगाने को कहा. उसने बहुत अच्छे से मेरे लंड पर तेल लगाया और मेरे लंड की मालिश की और फिर वो डॉगी स्टाइल में हो गयी और बोली कि ले मार ले.

दोस्तों मेरा तो यह पहला अनुभव था तो मैंने निशाना लगाया और एक ज़ोर का झटका मारा, लेकिन लंड फिसलता हुआ उसकी गांड के बदले उसकी चूत में चला गया, वो उस दर्द से तुरंत उछल गयी और बोली कि समीर मुझे पता नहीं था कि तुझमें इतना दम है, क्या आज मेरी गांड को तुम फाड़ ही डालोगे, में क्या कहीं भागी जा रही हूँ?

में मुस्कुरा दिया और बोला कि ठीक है और मैंने लंड को चूत से बाहर निकाला और अपने एक हाथ से पकड़ कर हल्का सा अंदर किया जिसकी वजह से उसकी साँसें तेज़ हो गयी और जैसे ही लंड हल्का सा उसकी गांड में अंदर हुआ तो उसको लगा कि में धीरे करूँगा, लेकिन मैंने एकदम ज़ोर से झटका मार दिया और मेरा पूरा लंड उसकी गांड के अंदर चला गया.

उसने बहुत ज़ोर से चीख मारी औच्च्च आईईईई माँ उफफ्फ्फ्फ़ मर गई, साले कुत्ते कमीने थोड़ा धीरे धीरे कर आईईईईइ और वो मेरी तरफ मुहं करके मुझे गुस्से से देखने लगी. में हंसने लगा और उससे बोला कि तुम अब इन सबकी आदत डाल लो और अब में लगातार जोरदार धक्के देकर उसकी चुदाई करने लगा. वो कुछ देर चीखती चिल्लाती रही, लेकिन बाद में जोश में आकर मेरे साथ मज़े लेने लगी.

फिर करीब 15 से 20 मिनट में मेरा वीर्य निकल गया और जब मैंने अपना लंड गांड से बाहर निकाला तो उसने मुझसे धन्यवाद बोला और कहा कि तुमने आज मुझे वो सुख संतुष्टि दी है जिसके लिए में बहुत समय से तरस रही थी तुम बहुत अच्छी चुदाई करते हो. में कब से ऐसी चुदाई अपने पति से चाहती थी, लेकिन मुझे मिल ना सकी और आज अभी इस समय से में तुम्हारी हूँ और तुम अब आज से मुझे जैसे चाहो चोद सकते हो. में तुमसे कभी भी मना नहीं करूंगी आज से में बस तुम्हारी हूँ. अब में और वो उठे साथ में बाथरूम में चले गए और नहाए.

फिर उससे मैंने कहा कि एक बार और तुम मेरा लंड चूस दो. फिर उसने तुरंत वैसा ही किया और बहुत अच्छे से किया. उसके बाद हम दोनों नहाकर बाथरूम से बाहर निकले और अपने अपने कपड़े पहने और फिर में अपने घर पर आ गया. तब तक चार बज गये थे. दोस्तों सच पूछो तो में मन ही मन बहुत खुश था, क्योंकि वो मेरा पहला सेक्स अनुभव था जिसमें मैंने आंटी को अपनी पहली चुदाई से बहुत खुश किया और वो मज़ा मुझे भी मिला.

उस दिन के बाद भी मैंने अपनी आंटी को बहुत बार चोदा और हम दोनों ने कई बार बहुत जमकर सेक्स के मज़े लिए, वो हर बार मेरी चुदाई से संतुष्ट हुई और मैंने उस बात का फायदा उठाकर उनकी चूत गांड मुहं के बहुत मज़े लिए.

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