कॉलेज प्रेसीडेंट की चुदाई जम के

ymnvruan l6mraf7w ir9gahuf

यह कहानी है मेरी उर कॉलेज के प्रेसीडेंट और उसके दोस्तों की मेरे अंकल और उनके बेटे(सोन) और नौकर रामू और उसके दोासटो की. जैस की मैने पहले ही कहा है की मुझे छोटे छोटे कपड़े पहने का शुक हैन्न और मैं पनटी और ब्रा तो पहनती ही नई हूँ. ग्रॅजुयेशन के बाद प्ग के लिए मुझे एक बार अपनी पढ़ाई के लिए मुझे अपने अंकल के जाना पड़ा . मैं बहुत ही उदस्स ती . जिसा की अपनी पिछली कहानी मैं ब्ताआया था की किस त्राहा से मैने कॉलेज मैं सेक्स का मज़ा लेती थी. कही इसके लॅंड पर तो कभी उसके .कोई मेरे मुमे दबा रहा है तो कोई मेरे छेड़ो मैं उंगले दल रहा है. उफ़ सच कहूँ तो कॉलेज से घर पर आने के बाद मेरे पुर बदन मैं बिल्कुल भी ताक़त नही बचती थी. कम से कम मैं 12 बार चुड्ती थी. कितना मज़ा आता था. खेर मैं अंकल के घर पर गयी वहाँ पर उनका बेटा और नुकर रामू रहता था. जब मई9न वाहा गयी ती मैने एक छोटि स्कर्ट और छोट सा टॉप पहन रकः आता. मेरे मुमे थोड़े -2 लेकिन साफ साफ धिक रहे थे. मैने अंकल के पास गयी और उनके पैर छूने केलिए नीचे झूकि .नाइस झूकये ही मेरी स्कर्ट अप्पर उठ गयी और मेरे चूतताड बिल्कुल सॉफ -2 दिखनबे लग गये . मेरे पीच्चे नौकर और राज खा था. वो दूनो ही उसे घूर्णर लगे. फिर मैं अप्पर अपने कमरे मैं चली गयी . अगले दी मैं जब सुबह नीचे नाश्ता करने के लाइ आई तो मैं एक छोटि से स्कर्ट और एक टॉप पहन रखा था. मैं जब नाश्तः कार्नर के लिए बेती तो राज ने कहा की “आशि तुम्हारे सांदिल खुली ही है” मैं ओह “तांकष”. राज और अंकल उस वक़्त डाइनिंग टेबल पर बेते हुए थे मैने सोच कियों थ्िॉदा सा मज़ा लिया जाए मैने अपने चुतताड राज और अंकल के चेरे तरफ कर ते हुए बिना पूरा झुके सेंडिल बाँधने लगी इस से मेरे चूतड़ बिल्कुल ही उठ गये और स्कर्ट छोटि होने की वजह से मेरे चूतताड़ो की गोलाई धिकने लग गयी मेरे छुआतड़ उस वक़्त अंकल के चेरे के जीयादा करीब थे वो अपना चेरा मेरे चूतादो के बिल्कुल पास ले कर आए उन्हे सूंघने लग गये . मैने तभी खड़ी हो गयी. फिर मैं राज के बिल्कुल सामने बैठ कर नास्टा करने लगी. राज ने जनभुज कर अपनी स्पून नीचे गिरा दी और टेबल के नीचे झूका मैं फ़ौरन अपनी टाँगे खूल कर अपनी स्कर्ट थ्िॉडी से उपेर कर दी और अपनी छूट उसे धिकाने लगी मैं उसे शो किया की जैसे मुहे कुच्छ मल्लों ही नही है. वैसे यही मेरी ख़ासियत है की मैं भोली बनकर धीरे धीरे अपने बदन को धिका कर मज़ा लेती हूँ इधर मैने कई दीनो से लॅंड को नही देखा था मेरी उसे छूने की उसे चूमने की उसे दबाने की उसे काटने की प्यसस दिन ओ दिन बढ़ती जा रही थी.खेर मैं कॉलेज गयी उर तदोडी देर तक पढ़ती रही.लें अब मैं बिल्कुल पागल से हो रही थी मुहे हर जघा लॅंड ही लॅंड दिख रहे थे . हर लड़का मिझे नंगा नज़र आ रहा था. तभी मेरी नज़र बाय्स टाय्लेट पर गयी और मएरए दिमाग़ मैं एक आइडिया आ याआया मैने चुपके से उसमे घुस गयी और अपने आप को लातिन मीं बंद कर लिया जो की “बाय्स पिस कोमोट” के बिल्कुल बगल मैं ही थी. उसमे एक खिड़की भी थी . मैं कोमोट पर क़हडी हो गयी और ख़िड़ी से देखने लगी ओह मी गोद कितने प्यारे प्यारे लॅंड थे जब टाय्लेट कर रहे थे तो ऐसे लगता था की जैसे मधुर संगीत बाज रहा हो. फिर अचानक एक लड़के की नज़र खिड़की पर गयी और उसने मुझे देख लिया वो हमारे कॉलेज मई स्टूडेंट का प्रेइडेंट था.उस वक़्त टाय्लेट मैं सिर्फ़ मैं और वो था और कोई नही मैं टाय्लेट से भर आई और शरम से हासणे लगी उसने पूचछा की “तुम यहाँ कर रही हूँ ” मैं कहा “कुच्छ नई वो मैं देख रही ती की बाय्स टाय्लेट कैसे कर ते है.” वो हसन और बोला “तो फिर चालों मेरे साठा मैं तुम्हे दिखता हूँ की बाय्स तॉईल्ट कैसे करते है.” मैने उसके साथ भर आ गयी और गाड़ी मैं बैठ कर उसके घर पर गयी. वहाँ उसके और 6 दोस्त भी थे उसने उनसे कहा की “इस से मिलो यॅ है आशि और इसे देखा है की लड़के टाय्लेट किसे करते है.” यह सुन कर कर सब के सब हासणे लगे और देखते ही नंगे हो गये फिर सब के सब मेरे पास आए और अपनेआ इंट्रो करने लगे और पहले वेल ने अपना हाथ मुहसे मिलने के लिए बाध्या .मैने हेस्ट हुए उसके लॅंड को पकड़ कर उसे ज़ोर से खिछा और कहा “मैं तो इसे हॅंडशेक काररूंगी.” तभी एक मेरे फिचे आआया और मेरी स्कर्ट को फिचे से अप्पर की और उसे दबाने लगा और बोला “हाए मैं मार जाऊ बिकुल रूई के गोलो कीतारह मुलायम है” और मेरे चुयताद को छो0ओसने लगा. तभी बाकी सब आगे आ गये ओए मुझे ज़मीन पर लिटा दिया और मेरे साअरए कपड़े उतार दिए. पेझले वाला अभी मेरी चुतताड को ही चूस रहा था फिर एक मेरी छूट के बल्लों को खिकने लगा मुहे दर्द हो रहा था. और फिर वो मेरी छूट को चूमने लगा….एक मेरी मुम्मू को दबाने लगा और एक मेरे हूटन को चूस राझा तो एक मेरे पुर बदन को ..सच कहूँ तो मुझे साँस लेने मैं तकलीफ़ हो रही थी लेकिन कौन प्रवाह करता.मेरे मूँह से आहा आह की अवगे निकल रही थी मैं कहा “अब मैं नही रुक सकती जल्दी जल्दी करूँ”.फिर एक क़हदा हुआ बोला मैं करूँगा ….मैं कहा, “एक से मेरे कुच्छ नहिहूगा एक मेरे आगे तो एक मुझे फिचे छाईए जल्दी करूँ मैं रुक नही सकती”. फिर 3 लड़के आए और एक ने मेरी छूट मैं डाला एक ने छुआत्द मैं एक ने मूह मैं ….मेरी हालत व्काई मैं खराब हो चुकी थी अंदर डालते ही मैं अपनी चुतताड उछले ने लगी और लॅंड को ज़ोर से ज़ोर से चूसने लगी…..2 मिनिट मैं मैं झाड़ गयी. इस तरह से सबने मेरे साथ सेक्स किया….अब तक मैं कुल मिला कर 4 बार चुड चुकी थी.मेरी दोनो छेड़ो मैं आहूत दर्द हो रहा था .मैं कहा “अब मैं जानूं गी” .सबने कहा ओक. तभी पेसिडेंट क़हदा हुआ …एक मिनिट तुमने हन्मे टाय्लेट करते हुए तो तो ड़ख ही नही… . मैं समाः गयी की वो किया चटा है…वो सभी मएरए कहरूम तरफ आ गये और मेरे अप्पर अपने लॅंड टन कर खड़े हू गये ..और देखते ही देखते मेरे अप्पर टाय्लेट की बारिश हो रही थी.उसके स्मेल बहुत आज़िब से थी लेकिन मुझे मज़ा आ रहा था ….मैं कभी अपने मूमो को तबटाई तो कभी छूट को. फिर मैने कहा मई तो अमृत से नहा ली अब तुम अमृत को चक लो मैं खड़ी हो कार कर टेबल पर बैठ गयी औतर टाय्लेट कर ने लगी वो सब के सब आए उसे पीने लगे….उन्होने एक एक बूँद पी. फिर मैं वापस अपने अंकल के घर पर आ गयी. सो किसे लगी ….वेल एक बात कहूँ मैं उ नो यह टाय्लेट वाला उन कर शायद आप को थ्िॉदा गंदा लगे ……लेकिन दोस्तों मेरे यकीन करूँ यहीं थोड़ी गंदी हरकते सेक्स को यागर बना देती है….और सेक्स का पूरा पोरा मज़ा देती है. ओक ओक बाइ

9ln9oqqznae0j34q

(Visited 18 times, 1 visits today)